मुश्किल नहीं है एक साथ बच्चों और माता-पिता की आर्थिक जिम्मेदारी निभाना, अपनाएं ये टिप्स

आम तौर पर 40 की उम्र पार करने के साथ ही आप जिदंगी से जुड़े उन फैसलों के बारे में समझने लगते हैं जो आपके पिता ने आपके लिए लिए थे। आपसे उम्मीद की जाती है कि आप अपने बच्चों को भी वैसी परवरिश देंगे, जैसी आपके पिता ने आपको दी थी

अपडेटेड Oct 10, 2022 पर 5:20 PM
आपके सामने एक तरफ अपने बच्चों का भविष्य बनाने और दूसरी तरफ अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखरेख की जिम्मेदारी होती है। आपको यह दोनों काम एक साथ करना पड़ता है।

एक पिता की जिम्मेदारी काफी चुनौतीपूर्ण होती है। आप अपने परिवार के सदस्यों के हीरे होते हैं, बच्चों के कोच और लीडर होते हैं। साथ ही जरूरत पड़ने पर बच्चों के लिए एक ढाल होते हैं। जीवन में एक समय ऐसा आता है जब आपको बच्चों के साथ ही अपने पेरेंट्स की आर्थिक जिम्मेदारियां भी संभालनी पड़ती है।

आम तौर पर 40 की उम्र पार करने के साथ ही आप जिदंगी से जुड़े उन फैसलों के बारे में समझने लगते हैं जो आपके पिता ने आपके लिए लिए थे। आपसे उम्मीद की जाती है कि आप अपने बच्चों को भी वैसी परवरिश देंगे, जैसी आपके पिता ने आपको दी थी।

आपके सामने एक तरफ अपने बच्चों का भविष्य बनाने और दूसरी तरफ अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखरेख की जिम्मेदारी होती है। आपको यह दोनों काम एक साथ करना पड़ता है। यह लेख ऐसे सभी पिता को समर्पित है, जो इन दोनों जिम्मेदारियों को संतुलन के साथ निभाते हैं। वे अपने काम के लिए किसी से वाहवाही भी नहीं चाहते हैं। आप रोज यह साबित करते हैं कि सभी हीरो खास तरह के कपड़े नहीं पहनते।


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पिता अपने बच्चों को हमेशा सबसे अच्छा देने की कोशिश करता है। बच्चे को बड़ा करने के दौरान उसे कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इसमें स्कूल से लेकर दूसरे तरह की चीजें शामिल होती हैं। इसलिए आपके लिए जल्द फाइनेंशियल प्लानिंग शुरू करना जरूरी है।

सबसे पहले आपको अपने लक्ष्य पहचानने होंगे। फिर आपको जरूरी बचत करने के लिए आपको पैसे अलग करने होंगे। आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि बच्चे के लिए दो तरह के खर्च बहुत अहम होते हैं। एक तो पढ़ाई और दूसरा शादी। दोनों के लिए बचत करने के लिए आपको लक्ष्य आधारित सेविंग पोर्टफोलियो बनाना होगा। फिर रिस्क लेने की अपनी क्षमता के हिसाब से निवेश करना होगा। आपको यह काम तभी शुरू कर देना होगा, जब आपका बच्चा 10 साल से कम उम्र का होगा। इससे आपको अपने लक्ष्य के लिए पैसे जुटाने के खातिर लंबा समय मिल जाएगा।

उच्च शिक्षा

हायर एजुकेशन के लिए सेविंग करने के दौरान आपको यह तय करना होगा कि जब बच्चा कॉलेज जाएगा तो कितने पैसे की जरूरत होगी। यह बच्चे के पंसद के कोर्स, एजुकेशन, यूनिवर्सिटी और लोकेशन (देश या विदेश) पर निर्भर करेगा।

अगर आप अपने बच्चे के विदेश में पढ़ाई के लिए प्लानिंग करना चाहते हैं तो अमेरिका जैसे देश में यूजी और पीजी के लिए करीब 4 करोड़ रुपये पर्याप्त हो सकते हैं। इस पैसे का इंतजाम करने के लिए आपको सावधानी से फाइनेंशियल प्लानिंग करनी होगी।

शादी

शादी में भी बड़ा अमाउंट खर्च होता है। खासकर अगर आपकी बेटी है तो उसकी शादी अच्छी तरह से करना आपकी बड़ी चाहत होगी। आप अच्छी शादी के लिए खर्च में किसी तरह की कमी नहीं करना चाहते हैं। बेटी की शादी में सोने की ज्वैलरी देना आम बात है। चूंकि, इसके लिए अच्छा पैसा चाहिए, इसीलिए आपको इसके लिए फाइनेंशियल प्लानिंग समय रहते करने की जरूरत है।

माता-पिता की आर्थिक जिम्मेदारियां कैसे निभाएं?

40 की उम्र पार करने के बाद आपको न सिर्फ अपने बच्चों के लिए पिता की भूमिका निभानी पड़ती है बल्कि अपने माता-पिता के लिए बेटे का रोल भी प्ले करना पड़ता है। माता-पिता से जुड़े दो खर्च बहुत अहम होते हैं। पहला, रेगुलर इनकम का स्रोत और दूसरा हेल्थ पर आने वाले खर्च का इंतजाम।

रेगुलर इनकम

माता-पिता के लिए रेगुलर इनकम का इंतजाम करने के लिए आप सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम, सीनियर फिक्स्ड डिपॉजिट, प्रधानमंत्री वय वंदना योजना जैसी स्कीमों की मदद ले सकते हैं। आप कम से मध्यम रिस्क वाले म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में भी निवेश कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड्स से रेगुलर विड्रॉल के लिए सिस्टमैटिक विड्रॉल स्कीम का इस्तेमाल कर सकते हैं।

मेडिकल खर्च

उम्र बढ़ने पर स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ जाता है। इसलिए माता-पिता के हेल्थ इंश्योरेंस का कवर बढ़ाना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर आप वित्तीय मुश्किल में फंस सकते हैं। इसके अलावा आपको समय-समय पर अपने माता-पिता का हेल्थ चेक-अप भी कराना पड़ेगा। इससे किसी तरह की हेल्थ प्रॉब्लम होने पर समय रहते उसका इलाज शुरू किया जा सकता है। ये सावधानियां बरत कर आप चिंतामुक्त रह सकते हैं।

बच्चे और माता-पिता की आर्थिक जिम्मेदारियां निभाने में कैसे संतुलन बनाएं?

बच्चे और माता-पिता के लिए सेविंग करते वक्त आपको कई बातें ध्यान में रखने की जरूरत होती है। दोनों का टाइम-फ्रेम और प्राथमिकताएं अलग-अलग होती हैं। इसलिए दोनों लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आप किसी फाइनेंशियल एडवाइजर की मदद ले सकते हैं।

आपको दोनों पोर्टफोलियो अलग-अलग रखने होंगे। इससे आपको दोनों के प्रोग्रेस और उनके वैल्यूएशन पर नजर रखना आसान हो जाएगा। उदाहरण के लिए अगर आपने दोनों पोर्टफोलियो के लिए साल में दो बार पेमेंट का विकल्प चुना है तो पहला पेमेंट आपके लिए मार्च और सितंबर में करने का विकल्प चुनना सही रहेगा। दूसरे कि लिए जून और दिसंबर का ऑप्शन ठीक रहेगा। इससे नियमित अंतराल पर पैसा दोनों पोर्टफोलियो में जाता रहेगा।

इससे आपको एक बार में ज्यादा अमाउंट एलोकेट करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दूसरा आपका निवेश अनुशासित रहेगा। सेना के जवान की तरह एक पिता की ड्यूटी भी कभी खत्म नहीं होती है। इसलिए हमें सही प्लानिंग करना जरूरी है।

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