कहां गायब हो रही है Gen Z की सैलरी? वो 5 खर्चे जो आपको भी हैरान कर देंगे!

Gen Z Salary Spending Habits: Gen Z के खर्च करने की हैबिट को लेकर अक्सर यह माना जाता है कि जेन जी अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा दिखावे, घूमने-फिरने और बड़े लाइफस्टाइल ब्रांड्स पर खर्च करते हैं। लेकिन एक हालिया रिपोर्ट ने इस धारणा को पूरी तरह से पलट कर रख दिया है

अपडेटेड Aug 12, 2026 पर 4:23 PM
इस स्टडी में मनोरंजन और डिजिटल कंटेंट के मामले में भी जेन-जी की अपनी खास पसंद नजर आती है

Gen Z Salary Spending: आज कल देश में Gen Z की खूब चर्चा है। आम आदमी से लेकर नेता-अभिनेता तक सभी के जुबान पर जेन जी का खुमार छाया हुआ है। सब लोग अपने-अपने तरीके से उन्हें डिफाइन कर रहे हैं। इसी बीच एक चर्चा Gen Z के खर्च करने की हैबिट को लेकर भी चल रही है। इसे लेकर एक स्टडी सामने आई है। अक्सर यह माना जाता है कि Gen Z अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा दिखावे, घूमने-फिरने और बड़े लाइफस्टाइल ब्रांड्स पर खर्च करते हैं। लेकिन नई रिपोर्ट ने इस धारणा को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

एआई और यूपीआई चालित एंप्लॉय फाइनेंशियल बेनेफिट्स प्लेटफॉर्म 'SalarySe' की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का युवा वर्कफोर्स अपनी सैलरी का सबसे बड़ा हिस्सा गैर-जरूरी सामानों पर लुटाने के बजाय रोजाना की जरूरतों, बिलों और फाइनेंशियल सर्विसेज पर खर्च कर रहा है। 5.2 लाख से अधिक सैलरी पाने वाले जेन-जी यूजर्स के करोड़ों यूपीआई लेन-देन के विश्लेषण पर आधारित इस स्टडी की एक-एक बारीकी को समझिए।

कहां जाता है 70% से ज्यादा बजट?


स्टडी से पता चलता है कि जेन-जी का मासिक बजट किसी एक बड़े खर्च के बजाय 5 मुख्य श्रेणियों में बंटता है, जो उनके कुल खर्च का 70% से अधिक हिस्सा कवर करती हैं:

1- बिल भुगतान और सब्सक्रिप्शन (20.1%): जेन-जी की सैलरी का सबसे बड़ा हिस्सा यूटिलिटी बिलों और डिजिटल सेवाओं के सब्सक्रिप्शन में जाता है।

2- किराना और घरेलू सामान (15.7%): रोजाना के राशन और जरूरी सामान पर यह दूसरी सबसे बड़ी रकम खर्च करते हैं।

3- वित्तीय सेवाएं (12.2%): लोन ईएमआई, एसआईपी या इंश्योरेंस जैसे वित्तीय प्रबंधन में।

4- शॉपिंग (11.9%): व्यक्तिगत सामान और कपड़ों की खरीदारी।

5- खाना (11.5%): बाहर से खाना मंगाना या रेस्टोरेंट में खर्च करना।

यह आंकड़ा साबित करता है कि डिजिटल यूपीआई भुगतान प्रणाली में पला-बढ़ा यह युवा वर्ग फिजूलखर्ची के बजाय जिम्मेदार वित्तीय आदतों को अपना रहा है।

मनोरंजन सब्सक्रिप्शन में किसका दबदबा?

मनोरंजन और डिजिटल कंटेंट के मामले में भी जेन-जी की अपनी खास पसंद नजर आती है। ऑटो-पे और रिकरिंग पेमेंट्स में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स और म्यूजिक ऐप्स का बड़ा योगदान है:

  • JioHotstar (12.4%): सब्सक्रिप्शन सेगमेंट में जिओहॉटस्टार सबसे आगे है और कुल रिकरिंग सब्सक्रिप्शन में इसकी हिस्सेदारी 12.4% है।
  • Netflix (10.7%): दूसरे पायदान पर नेटफ्लिक्स है, जिस पर युवा अपनी सैलरी का एक फिक्स्ड हिस्सा खर्च कर रहे हैं।
  • Spotify (5.6%): म्यूजिक स्ट्रीमिंग के लिए स्पॉटीफाई तीसरी सबसे लोकप्रिय पसंद है।

इसके अलावा, यूपीआई ऑटो-पे का इस्तेमाल केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा बिजली, पानी, इंटरनेट बिल और अन्य डिजिटल सेवाओं तक फैला हुआ है।

उम्र बढ़ने के साथ बदलती हैं प्राथमिकताएं

रिपोर्ट में 18 से 29 वर्ष की आयु के जेन-जी के खर्च करने के पैटर्न का गहराई से विश्लेषण किया गया है, जिससे दो अलग-अलग जीवन चरणों का पता चलता है:

डिस्क्रेशनरी खर्च स्थिर (32%): 18–23 साल और 24–29 साल, दोनों ही उम्र समूहों में गैर-जरूरी या इच्छा-आधारित खर्च कुल सैलरी का 32% बना रहता है।

जरूरी खर्च में वृद्धि: जैसे-जैसे उम्र और जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, अनिवार्य खर्चों का हिस्सा 50% (18-23 वर्ष) से बढ़कर 59% (24-29 वर्ष) हो जाता है।

मिथक बनाम हकीकत: ट्रैवल पर सिर्फ 5% खर्च

अक्सर यह माना जाता है कि जेन-जी 'एक्सपीरिएंस' और ट्रेवल पर सबसे ज्यादा पैसे उड़ाती है। लेकिन इस स्टडी ने दिखाया है कि युवा प्रोफेशनल अपने बजट का केवल 5% हिस्सा ट्रेवल पर खर्च करते हैं।

SalarySe के सह-संस्थापक पीयूष बगारिया का कहना है कि 'भारत की जेन-जी पहली ऐसी पीढ़ी है जो अपनी वित्तीय जिंदगी का हर पहलू डिजिटल-फर्स्ट इकोसिस्टम के जरिए संभाल रही है। यूपीआई की पहुंच ने युवाओं के खर्च करने और पैसे मैनेज करने के तरीके को बदल दिया है। आने वाले दशक में यह व्यवहारिक बदलाव बैंकों, नियोक्ताओं और वित्तीय संस्थानों को अपने प्रोडक्ट डिजाइन करने में मदद करेगा।'

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