इंश्योरेंस इंडस्ट्री (Insurance Industry) में दो प्रस्तावों पर काफी चर्चा हो रही है। पहला प्रस्ताव बीमा नियामक का है, जो पॉलिसी के सरेंडर चार्च से जुड़ा है। दूसरा, स्टैंडएलोन हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की पॉलिसी की प्राइसिंग से जुड़ा है। हालांकि, दोनों प्रस्ताव ग्राहकों के हित में हैं, लेकिन इनको लेकर राय बंटी हुई है। मनीकंट्रोल ने इस बारे में GoDigit Group of Insurance Companies के चेयरमैन कमलेश गोयल से बात की। मनीकंट्रोल से एक्सक्लूसिव बातचीत में उन्होंने दोनों प्रस्तावों को ग्राहकों के हितों के खिलाफ बताया। उनका यह रुख इंश्योरेंस इंडस्ट्री के रुख से अलग है। उन्होंने हेल्थ पॉलिसी की क्लेम-आधारित प्राइसिंग के प्रस्ताव का विरोध किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के किसी देश में नियामक क्लेम आधारित प्राइसिंग की इजाजत नहीं दे सकता।
तीन साल प्रीमियम चुकाने के बाद ही कुछ पैसा वापस मिलता है
उन्होंने कहा कि डेटा से पता चलता है कि अगर प्रीमियम पेमेंट टर्म 5 साल से ज्यादा है तो सबसे अच्छी कंपनियों के मामले में भी पर्सिटेंसी (Persistency) सिर्फ करीब 50 फीसदी है। जब तक कस्टमर तीन साल के प्रीमियम का पेमेंट नहीं कर देता है, उसे कुछ नहीं मिलता है। अगर आप पिछले 10 साल को देखें तो नॉन-पार पॉलिसी खरीदने वाले 100 परिवारों में से 90 फीसदी ने अपने पैसे गवांए होंगे। करीब पूरा कमीशन भी अपफ्रंट होता है। इस तरह इस प्रोडक्ट नेचर लॉन्ग टर्म का नहीं है। इससे होने वाले लॉस को देखते हुए कस्टमर के लिहाज से इसे लेना बुद्धिमानी नहीं है।
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पॉलिसी का रिटर्न बैंक एफडी से ज्यादा
गोयल ने कहा कि उम्मीद है कि IRDAI वही करेगा जो कस्टमर्स के हित में होगा। इन बदलावों का असर हम पर भी पड़ेगा। पहले पांच साल में हमारे खर्च ज्यादा होंगे। इसलिए हर सरेंडर पर ज्यााद नुकसान उठाना पड़ेगा। अगर आप नॉन-पार कैटेगरी में सिंगल प्रीमियम पॉलिसी खरीदते हैं तो आज भी आपको 7-7.5 फीसदी का गारंटीड रिटर्न मिलता है। बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में टैक्स के बाद आपको अपने टैक्स-स्लैब के लिहाज से 5.1-5.5 फीसदी रिटर्न मिलता है।
क्लेम आधारित पॉलिसी की प्राइसिंग का प्रस्ताव ठीक नहीं
हेल्थ पॉलिसी की क्लेम आधारित प्राइसिंग के बारे में उन्होंने कहा कि मान लीजिए पांच साल में 30 फीसदी लोगों ने क्लेम दर्ज किया है और 70 फीसदी ने नहीं किया है। जो लोग क्लेम नहीं करते हैं उनका प्रीमियम हेल्थ इनफ्लेशन के मुताबिक बढ़ जाएगा। फिर, ऐसे लोग है जो क्लेम फाइल करते हैं। इनमें कुछ के लिवर या किडनी से जुड़े मसले हो सकते हैं। कैंसर या कोई दूसरी गंभीर बीमारी हो सकती है। ऐसे लोगों के हर साल या हर दूसरे साल क्लेम फाइल करने की संभावना है। ऐसे में अगर प्रीमियम रेट आज 5 फीसदी है तो यह कुछ समय में बढ़कर 20-25 फीसदी हो जाएगा। 10 साल में पांच लाख के कवर के लिए ऐसे पॉलिसीहोल्डर्स को सालाना 2-30 लाख रुपये प्रीमियम चुकाना होगा।