गोल्ड के लिए बीते 13 सालों में सबसे खराब रही जून तिमाही, 14 फीसदी फिसली कीमत

अमेरिकी डॉलर में मजबूती और फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के अनुमान का असर गोल्ड की कीमतों पर दिख रहा है। सिर्फ जून में गोल्ड की कीमतें 11 फीसदी गिरी हैं। सेंटीमेंट कमजोर होने से गोल्ड में तेजी टिक नहीं पा रही है

अपडेटेड Jul 01, 2026 पर 11:29 AM
जून तिमाही में गोल्ड में करीब 500 डॉलर प्रति औंस की गिरावट आई है।

गोल्ड के लिए जून तिमाही बीते 13 सालों में सबसे खराब रही। 1 जुलाई को भी गोल्ड में कमजोरी दिखी। देश और विदेश में इसके कीमतों पर दबाव दिखा। विदेश में गोल्ड फ्यूचर्स 0.86 फीसदी की कमजोरी के साथ 3,973 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। चांदी भी 1.55 फीसदी की गिरावट के साथ 57.61 डॉलर प्रति औंस पर चल रही थी।

एमसीएक्स में भी गोल्ड और सिल्वर फ्यूचर्स में गिरावट

इधर, भारत में कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स 1.07 फीसदी यानी 1,532 रुपये गिरकर 1,40,999 रुपये प्रति 10 ग्राम था। सिल्वर फ्यूचर्स भी 2.61 फीसदी यानी 5,933 रुपये फिसलकर 2,21,110 रुपये प्रति किलोग्राम था।


डॉलर में मजबूती और फेड के रेट बढ़ाने की उम्मीद से गोल्ड पर दबाव

अमेरिकी डॉलर में मजबूती और फेडरल रिजर्व के इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के अनुमान का असर गोल्ड की कीमतों पर दिख रहा है। सैक्सो बैंक के एनालिस्ट ओले हैनसेन ने कहा कि गोल्ड में तेजी टिक नहीं पा रही है। इससे कमजोर सेंटीमेंट का पता चलता है। ट्रेडर्स कीमतें गिरने पर खरीदारी करने की जगह कीमतें चढ़ने पर बिकवाली कर रहे हैं। इससे कीमतों में तेजी टिक नहीं पा रही है।

सिर्फ जून महीने में 11 फीसदी से ज्यादा फिसला गोल्ड

सिर्फ जून में गोल्ड 11 फीसदी से ज्यादा गिरा है। इस तरह यह गोल्ड में गिरावट का लगातार चौथा महीना है। 2024 के बाद गोल्ड में पहली बार तिमाही आधार पर गिरावट दिखी है। इससे पहले 2013 में जून तिमाही में सोने में बड़ी गिरावट आई थी। हैनसेन ने कहा कि गोल्ड में तेजी बने रहने के लिए पहले इसका 4,100 डॉलर के ऊपर बने रहना जरूरी है। लेकिन, बीते कुछ हफ्तों में गोल्ड इस लेवल से ऊपर बने रहने में नाकाम रहा है।

जनवरी के अपने पीक से करीब 30 फीसदी गिरा गोल्ड

जून तिमाही में गोल्ड में करीब 500 डॉलर प्रति औंस की गिरावट आई है। फीसदी में यह 14 फीसदी से ज्यादा गिरावट है। इस साल जनवरी के आखिर में गोल्ड की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई थी। अपने 5,589 डॉलर प्रति औंस के पीक से सोना करीब 30 फीसदी गिर चुका है। मध्यपूर्व में टेंशन में कमी के बावजूद गोल्ड पर दबाव बना हुआ है। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद बुलियन की कीमतों पर दबाव दिखा था।

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कीमतें और गिरने के डर से पुराना गोल्ड बेच रहे लोग

लोग गोल्ड की कीमतों में और गिरावट के डर से अपने पुराने गोल्ड बेच रहे हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, जून तिमाही में करीब 50 टन पुराने गोल्ड की बिक्री हुई है। यह एक साल पहले की समान अवधि के मुकाबले 43 फीसदी ज्यादा है। गोल्ड की कीमतों में गिरावट पर आरबीआई ने भी चिंता जताई है। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गोल्ड की कीमतों में गिरावट से डिफॉल्ट का खतरा बढ़ सकता है।

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