गोल्ड पीक से 28% फिसला, अगर आप गोल्ड लोन लेने जा रहे हैं तो ये बातें जरूर जान लें

पैसे की जरूरत पूरी करने के लिहाज से गोल्ड लोन पर लोगों की निर्भरता बढ़ रही है। रिटेल लोन पोर्टफोलियो में गोल्ड़ लोन की हिस्सेदारी FY23 में 18 फीसदी थी, जो FY26 में बढ़कर 41 फीसदी पर पहुंच गई

अपडेटेड Jul 04, 2026 पर 12:57 PM
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बीते पांच सालों में गोल्ड की ग्लोबल कीमतें करीब 130 फीसदी बढ़ी हैं।

गोल्ड में पिछले कुछ महीनों में बड़ी गिरावट आई है। जनवरी के आखिर में अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 28 फीसदी फिसल चुका है। जब गोल्ड की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर थीं तो लोगों की दिलचस्पी गोल्ड लोन में बढ़ गई थी। इसकी वजह थी कि उन्हें अपने गोल्ड पर पहले के मुकाबले लोन मिल रहा था।

गोल्ड लोन पर बढ़ रही लोगों की निर्भरता

एक्सपेरियन की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, पैसे की जरूरत पूरी करने के लिहाज से गोल्ड लोन पर लोगों की निर्भरता बढ़ रही है। रिटेल लोन पोर्टफोलियो में गोल्ड़ लोन की हिस्सेदारी FY23 में 18 फीसदी थी, जो FY26 में बढ़कर 41 फीसदी पर पहुंच गई। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते पांच सालों में गोल्ड की ग्लोबल कीमतें करीब 130 फीसदी बढ़ी हैं।


ज्यादा लोन का ऑफर दिक्कत बढ़ा सकता है

हालिया गिरावट के बावजूद बीते कुछ सालों के मुकाबले गोल्ड की कीमतें काफी ऊपर हैं। इससे गोल्ड ज्वेलरी पर ज्यादा लोन मिल रहा है। इक्विफैक्स इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अभिनव ठाकुर ने कहा, "लोगों को अपने गोल्ड की वैल्यू पर ज्यादा लोन मिल रहा है। इससे गोल्ड लोन में लोगों का भरोसा बढ़ा है। लेकिन, लोगों को अपने गोल्ड पर ज्यादा लोन के ऑफर का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।"

सिर्फ लोन के ऑफर के आधार प फैसला लेना ठीक नहीं

उन्होंने कहा कि गोल्ड की कीमतें बढ़ने से ज्यादा अमाउंट के लोन ऑफर किए जा रहे हैं। लेकिन, पैसे की अपनी जरूरत के हिसाब से ही लोन का अमाउंट तय करना जरूरी है। साथ ही अलग-अलग बैंकों और एनएफसी के ऑफर की तुलना करना भी जरूरी है। पहली बार गोल्ड लोन लेने वाले ज्यादातर लोग सिर्फ यह देखते हैं कि बैंक या एनबीएफसी उन्हें मैक्सिमम कितना लोन ऑफर कर रहे हैं।

इंटरेस्ट रेट के साथ दूसरी शर्तों के बारे में जान लें

आपको उस बैंक या एनबीएफसी से गोल्ड लेने का फैसला करना चाहिए, जिसका इंटरेस्ट रेट कम है। स्टॉकटिक कैपिटल के फाउंडर विजय माहेश्वरी ने कहा, "बैंक आम तौर पर गोल्ड लोन करीब 8-11 फीसदी इंटरेस्ट रेट पर देते हैं। एनबीएफसी 9-18 फीसदी इंटरेस्ट लेते हैं। इंटरेस्ट के अलावा ग्राहक को प्रोसेसिंग फीस, वैल्यूएशन चार्ज, रिन्यूएल फीस और पेमेंट में देर पर पेनाल्टी भी चुकानी पड़ती है।" इसलिए इंटरेस्ट रेट को देखने की जगह ग्राहक को इफेक्टिव एनुअल पर्सेंटेज रेट देखना चाहिए।

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लोन रीपेमेंट के सही विकल्प का करें चुनाव

कुछ बैंक और एनबीएफसी रेगुलेर EMI रीपेमेंट की सुविधा ऑफर करते हैं। कुछ बुलेट रीपमेंट की सुविधा देते हैं, जिसमें प्रिंसिपल अमाउंट लोन की अवधि के आखिर में चुकाना होता है। आरबीआई के नए नियम के मुताबिक, बुलेट रीपेमेंट के लिए मैक्सिमम अवधि 12 महीने हो सकती है। ग्राहक को अपनी स्थिति के हिसाब से रीपेमेंट के विकल्प का चुनाव करना चाहिए। इससे बाद में दिक्कत नहीं आती है। डिफॉल्ट का खतरा भी नहीं होता है।

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