Gold में 1.6% का उछाल, ट्रंप के सीजफायर के ऐलान ने बढ़ाई सोने की चमक

Gold News: अमेरिका ने ईरान के साथ सीजफायर की बात कही तो गोल्ड की चमक बढ़ गई। हालांकि अभी भी स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल दो हफ्ते के लिए लड़ाई बंद होने की बात चल रही। जानिए कि युद्ध के बावजूद सोना क्यों गिरा था और अभी क्या स्थिति है और आगे क्या रुझान रह सकता है

अपडेटेड Apr 08, 2026 पर 10:07 AM
Gold News: बॉन्ड ट्रेडर्स का मानना है कि फेडरल रिजर्व इस साल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा जोकि गोल्ड जैसे नॉन-यील्ड एसेट के लिए निगेटिव है।

Gold News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से सीजफायर को लेकर हामी भरी तो गोल्ड की चमक बढ़ गई। ट्रंप ने युद्ध बंद करने के लिए बातचीत को अंतिम रूप देने को दो हफ्ते का समय बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसने गोल्ड में जोश भर दिया और उछलकर यह प्रति औंस (1 किग्रा=36.27 औंस) $4,780 के भाव पर पहुंच गया। एक दिन पहले भी यह यह 1.2% ऊपर चढ़ा था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्होंने ईरान पर बमबारी रोकने पर सहमति दी है। इससे पहले ट्रंप ने ईरान की पूरी सभ्यता को खत्म करने की धमकी दी थी और इसके लिए जो डेडलाइन तय की थी, उसके खत्म होने के दो घंटे से भी कम समय पहले ट्रंप ने सीजफायर की बात कह दी। इससे तेल की कीमते फिसल गई और अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ, जिससे गोल्ड को सहारा मिला।

युद्ध के बावजूद क्यों गिरा था सोना और अब क्या है स्थिति?

फरवरी के आखिरी में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच लड़ाई शुरू हुई थी। शुरुआत में तो इसने गोल्ड और सिल्वर की चमक बढ़ाई। हालांकि अब स्थिति ये है कि इस लड़ाई के शुरू होने के बाद यह गोल्ड के भाव करीब 10% गिर गए। इसकी वजह ये रही कि कुछ निवेशकों को अन्य जगहों पर हुए नुकसान की भरपाई के लिए अपने गोल्ड के निवेश बेचने पड़े, इससे गोल्ड की सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) वाली छवि भी कमजोर हुई है। अभी की बात करें तो स्पॉट गोल्ड के भाव फिलहाल 1.4% बढ़कर प्रति औंस $4,770.50 हो गया। इसके साथ ही चांदी भी 2.6% बढ़कर प्रति औंस $74.90 तक पहुंच गई। प्लैटिनम और पैलेडियम की कीमतों में भी उछाल आई। अमेरिकी करेंसी डॉलर को मापने वाला ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स 0.3% फिसल गया।


Iran-US War ने बढ़ाई महंगाई का खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही लड़ाई अब छठे हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है। इसने एनर्जी की कीमतें बढ़ा दी है। फिलहाल सीजफायर हुआ है लेकिन युद्ध के माहौल के चलते महंगाई के बढ़ने का रिस्क बना हुआ है। इसके चलते माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को कम करने या बढ़ाने में देरी कर सकता है यानी कि अभी ब्याज दरें स्थिर रह सकती हैं। बॉन्ड ट्रेडर्स का मानना है कि फेडरल रिजर्व इस साल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा जोकि गोल्ड जैसे नॉन-यील्ड एसेट के लिए निगेटिव है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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