Gold Price Today: भारत में बुधवार, 10 सितंबर को सोने की कीमत (Gold Price Today) नए शिखर पर पहुंच गई। 24 कैरेट सोना ₹1.10 लाख प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड हुआ। इस तेजी की वजह त्योहार और शादी के सीजन की मजबूत मांग के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर तेजी रही। इसे अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और भू-राजनीतिक तनाव ने और बल दिया।
गोल्ड की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी हैं। इसलिए कुछ परिवार गहनों की खरीदारी टाल सकते हैं, जो कीमतों को लेकर ज्यादा संवेदनशील रहते हैं। हालांकि, एक्सपर्ट का मानना है कि त्योहारों की मांग और निवेश के लिए खरीदारी गोल्ड को सहारा देती रहेगी।
घरेलू बाजार में सोने की मांग बरकरार
इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के वाइस प्रेसिडेंट अक्षय कम्बोज का कहना है, 'त्योहार और शादी का सीजन शुरू होने के चलते घरेलू मांग बनी हुई है। हालांकि इन ऊंची कीमतों से कुछ परिवार हिचक सकते हैं। इसके बावजूद निवेश के लिए खरीद और ETF इनफ्लो जारी रहने की उम्मीद है।'
एस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के सीईओ दर्शन देसाई का मानना है कि गोल्ड में मुनाफावसूली हो सकती है, लेकिन गिरावट आते ही खरीदार सक्रिय होंगे। उन्होंने कहा, 'भू-राजनीतिक तनाव और फेडरल रिजर्व द्वारा उम्मीद से अधिक ब्याज दर कटौती की संभावना सोने को सपोर्ट देती रहेगी। हालांकि, त्योहारों के दौरान रिकॉर्ड दाम उपभोक्ता मांग को कितना प्रभावित करेंगे, यह देखने वाली बात रहेगी।'
वैश्विक बाजार में भी चमका सोना
अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड 0.3% बढ़कर $3,635.32 प्रति औंस हो गया। मंगलवार (9 सितंबर) को सोना अब तक के सबसे ऊंचे स्तर $3,673.95 प्रति औंस पर पहुंचा था। एनालिस्टों के मुताबिक, ग्लोबल मार्केट में गोल्ड की कीमतें बढ़ने के पीछे कई कारण हैं।
अब आगे कैसी रहेगी गोल्ड की चाल
मेहता इक्विटीज में वीपी (कमोडिटीज) राहुल कलंत्री मानना है कि सोना अस्थिर बना रहेगा। उन्होंने कहा, 'भारत में सोने को ₹1.08 लाख से 1.07 लाख प्रति 10 ग्राम पर सपोर्ट और ₹1.08 लाख से 1.09 लाख प्रति 10 ग्राम पर रेसिस्टेंस मिल रहा है।' सोना 2025 में अब तक 38% चढ़ चुका है, जबकि 2024 में इसमें 27% की बढ़त दर्ज हुई थी।
बाजार की नजर अब अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की सितंबर पॉलिसी पर है। एक्सपर्ट का मानना है कि कीमतों में मजबूती बनी रह सकती है। वहीं, भारतीय बाजार में अगला ट्रेंड इस पर निर्भर करेगा कि त्योहारों के दौरान उपभोक्ता रिकॉर्ड ऊंचे दामों पर कितनी खरीदारी करते हैं।
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