प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने जनता से खास अपील की थी। उन्होंने कहा था कि एक साल तक सोना खरीदने से बचे, ताकि विदेशी मुद्रा बचाया जा सके। पीएम मोदी की अपील के बाद सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले महीने जनता से खास अपील की थी। उन्होंने कहा था कि एक साल तक सोना खरीदने से बचे, ताकि विदेशी मुद्रा बचाया जा सके। पीएम मोदी की अपील के बाद सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।
कितना सस्ता हुए सोना-चांदी?
इंडियन बुलियन एसोसिएशन (IBA) के आंकड़ों के मुताबिक, 10 मई को जब प्रधानमंत्री ने यह अपील की थी, तब 24 कैरेट सोना 1,53,140 रुपये प्रति 10 ग्राम था। वहीं, चांदी 2,62,350 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बिक रही थी।
अब 28 जून तक सोना 13,267 रुपये सस्ता होकर 1,39,873 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है। वहीं, चांदी 45,809 रुपये टूटकर 2,16,541 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई है।
इस दौरान सरकार के कुछ फैसलों और वैश्विक बाजार में कीमती धातुओं में बिकवाली का असर भी कीमतों पर देखने को मिला।
पीएम मोदी ने क्या अपील की थी?
10 मई को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और भारत के बढ़ते आयात बिल का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से गैर-जरूरी खरीदारी टालने की अपील की थी।
उन्होंने कहा था कि एक साल तक सोना खरीदने और विदेश यात्रा जैसी गैर-जरूरी चीजों पर खर्च टालें, ताकि देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचाया जा सके।
प्रधानमंत्री का कहना था कि अगर सोना, ईंधन और दूसरी गैर-जरूरी वस्तुओं का आयात कम होगा, तो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा और रुपये को भी मजबूती मिलेगी।
भारत में इसका असर क्यों ज्यादा पड़ता है?
भारत दुनिया में सबसे ज्यादा सोना खरीदने और आयात करने वाले देशों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है।
जब सोने का आयात बढ़ता है, तो डॉलर में ज्यादा भुगतान करना पड़ता है। इससे ट्रेड डेफिसिट और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है।
इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से भी बढ़ा दबाव
प्रधानमंत्री की अपील के कुछ दिन बाद सरकार ने सोना और चांदी पर प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी। इसके लिए कस्टम ड्यूटी और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) में बढ़ोतरी की गई।
Senco Gold के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO सुवंकर सेन ने पहले Moneycontrol से कहा था कि इस फैसले का सबसे ज्यादा असर कीमत को लेकर संवेदनशील ग्राहकों पर पड़ेगा। उनके मुताबिक, इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से निकट भविष्य में सोने की मांग कम हो सकती है। साथ ही सोने का आयात 10% से 15% तक घटने का अनुमान है।
हालांकि, सरकार का मकसद कीमतें घटाना नहीं, बल्कि सोने के आयात पर लगाम लगाना था। लेकिन ऊंची ड्यूटी और कमजोर मांग की वजह से आने वाले समय में आयात पर असर पड़ सकता है।
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