सोने को हमेशा सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। क्योंकि आर्थिक संकट या भूराजनीतिक तनाव के वक्त इसका भाव अमूमन बढ़ता है। लेकिन इस बार तस्वीर अलग है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद सोने पर लगातार दबाव बना हुआ है।
सोने को हमेशा सबसे सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। क्योंकि आर्थिक संकट या भूराजनीतिक तनाव के वक्त इसका भाव अमूमन बढ़ता है। लेकिन इस बार तस्वीर अलग है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बावजूद सोने पर लगातार दबाव बना हुआ है।
सोना लगातार चौथे महीने गिरावट की ओर बढ़ रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार निवेशकों का फोकस सिर्फ युद्ध पर नहीं, बल्कि महंगाई, ब्याज दर और अमेरिकी डॉलर पर ज्यादा है।
आखिर सोना क्यों गिर रहा है?
सोने पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का है। ईरान ने हाल ही में कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। इससे आशंका बढ़ गई कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबा चला तो तेल महंगा बना रह सकता है।
तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में अमेरिका का केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है।
सोने का ब्याज दर पर असर?
सोना कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं देता। इसलिए जब ब्याज दर बढ़ती हैं, तो निवेशक बॉन्ड जैसे विकल्पों की तरफ रुख करते हैं।
ऊंची ब्याज दर से अमेरिकी डॉलर भी मजबूत होता है। इससे सोना निवेशकों के लिए कम आकर्षक हो जाता है और उसकी कीमतों पर दबाव बढ़ता है।
फेडरल रिजर्व पर टिकी है नजर
बाजार को अब उम्मीद है कि अमेरिका में ब्याज दर लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।
निवेशकों की नजर इस हफ्ते अमेरिका के रोजगार से जुड़े आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियों पर रहेगी। इन्हीं से ब्याज दरों की अगली दिशा का संकेत मिलेगा।
सुरक्षित निवेश का क्या हुआ?
आमतौर पर युद्ध के समय सोने की मांग बढ़ जाती है। लेकिन इस बार निवेशक युद्ध से ज्यादा उसके आर्थिक असर को लेकर चिंतित हैं।
तेल की बढ़ती कीमतों ने महंगाई की चिंता बढ़ा दी है। इससे सोने की सुरक्षित निवेश वाली छवि कमजोर पड़ गई है।
क्या फिर चढ़ेगा सोना?
एनालिस्टों का मानना है कि आने वाले समय में सोने की चाल तीन बातों पर निर्भर करेगी। पहली, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कितना बढ़ता या घटता है। दूसरी, कच्चे तेल की कीमतें किस दिशा में जाती हैं। और तीसरी, फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लेकर क्या फैसला करता है।
अगर पश्चिम एशिया में तनाव कम होता है, कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं और अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ती है, तो सोने में फिर तेजी लौट सकती है। फिलहाल एक्सपर्ट्स का कहना है कि ऊंची तेल कीमतें, मजबूत डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड सोने पर भारी पड़ रही हैं।
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