Gold Rate: भारत में सोने की कीमतें लगातार नए पीक छू रही हैं। मंगलवार 2 सितंबर को 24 कैरेट सोना 1.06 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। ये गोल्ड का अब तक का सबसे ऊंचा लेवल है। ग्लोबल मार्केट में भी सोना पहली बार 3,500 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया। घरेलू डिमांड, फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर कटौती और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी ने गोल्ड की कीमतों में तेजी को हवा दी है।
सोने ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारत में सोने के दाम ने मंगलवार 2 सितंबर को अब तक का सबसे ऊंचा स्तर छू लिया। 24 कैरेट सोना 1.06 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जबकि 22 कैरेट सोना 97,250 रुपये और 18 कैरेट सोना 79,570 रुपये प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड हुआ। यह लगातार आठवां दिन है जब घरेलू मार्केट में सोने की कीमतें बढ़ी हैं।
इस तेजी के पीछे अंतरराष्ट्रीय मार्केट की बड़ी भूमिका है। ग्लोबल मार्केट में स्पॉट गोल्ड पहली बार 3,500 डॉलर प्रति औंस के पार चला गया। शुरुआती कारोबार में यह 3,508.50 डॉलर तक पहुंचा और बाद में 3,496 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड हुआ। वहीं, अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स दिसंबर डिलीवरी के लिए 1.4% बढ़कर 3,565.50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गए।
एनालिस्ट्स का कहना है कि कमजोर अमेरिकी डॉलर, सितंबर में फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद और सेंट्रल बैंकों की लगातार खरीदारी ने सोने को मजबूती दी है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों का सेफ ऑप्शन तलाशना भी कीमतों को सहारा दे रहा है।
राहुल कालंत्री, वीपी कमोडिटीज, मेहता इक्विटीज के मुताबिक भारत में सोने के दाम 1.04 लाख–1.03 लाख रुपये पर सपोर्ट और 1.05 लाख–1.06 लाख रुपये पर रेजिस्टेंस दिखा रहे हैं।
भारत की घरेलू डिमांड भी अहम
एक्सपर्ट का मानना है कि भारतीय मार्केट की डिमांड भी सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव को थामे रखेगी। आस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के सीईओ दर्शन देसाई का कहना है कि ईटीएफ में लगातार निवेश और सेंट्रल बैंकों की खरीद ने किसी बड़ी गिरावट को रोका है। पहली बार ऐसा हुआ है कि सेंट्रल बैंकों के पास अमेरिकी ट्रेजरी से ज्यादा सोना है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मोहित कम्बोज ने कहा कि त्योहारी सीजन और शादियों की खरीदारी घरेलू स्तर पर कीमतों में गिरावट को सीमित रखेगी।
अब निवेशकों की नजरें 5 सितंबर को आने वाले अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर हैं, जो इस महीने फेड की अगली नीति पर बड़ा असर डाल सकते हैं।