Gold Silver Crash: ऑल-टाइम हाई से सिल्वर 40% क्रैश, सोना 25% गिरा; ये कारण हैं जिम्मेदार
Gold Silver Crash: सोना और चांदी में तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है। सिल्वर ऑल टाइम हाई से 40 प्रतिशत और गोल्ड 25 प्रतिशत टूट चुका है। जानिए किस वजह से सोने-चांदी में भारी गिरावट आई और इसका ट्रंप से क्या कनेक्शन है।
सोना और चांदी के लिए लंबे समय के सपोर्टिंग फैक्टर्स अभी भी बने हुए हैं।
Gold Silver Crash: सोना और चांदी में भारी करेक्शन देखने को मिल रहा है। इससे हाल के महीनों में बनी रिकॉर्ड तेजी का बड़ा हिस्सा मिट गया है। यह गिरावट उस रैली के बाद आई है, जो मुख्य रूप से वैश्विक अनिश्चितता और सट्टा खरीदारी के दम पर चल रही थी। अब जैसे ही बाजार की दिशा बदली, निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी गिरावट
सोमवार को भी सोना और चांदी पर दबाव बना रहा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना करीब 4,500 डॉलर पर ट्रेड कर रहा है, जो करीब 7.7 प्रतिशत नीचे है। वहीं चांदी में और ज्यादा कमजोरी दिखी और यह करीब 14 प्रतिशत टूटकर 72 डॉलर के आसपास पहुंच गई।
भारतीय बाजार में भी दबाव
भारतीय बाजार में भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। MCX गोल्ड फ्यूचर्स का 02 अप्रैल 2026 कॉन्ट्रैक्ट करीब 1,40,999 रुपये पर ट्रेड कर रहा है। इसमें 4.57 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं MCX सिल्वर का 05 मार्च 2026 कॉन्ट्रैक्ट करीब 13 प्रतिशत टूटकर 2,30,732 रुपये पर आ गया है।
ऑल टाइम हाई से बड़ी टूट
सोना अपने ऑल टाइम हाई से अब तक 1,100 डॉलर से ज्यादा गिर चुका है। वहीं, चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 50 डॉलर नीचे आ गई है।
2 फरवरी तक के आंकड़ों के मुताबिक, सोना 5,602.23 डॉलर के ऑल टाइम हाई से करीब 25 प्रतिशत टूट चुका है। चांदी की हालत और खराब रही है और यह 121 डॉलर के रिकॉर्ड स्तर से लगभग 40 प्रतिशत नीचे आ गई है।
डॉलर की मजबूती से बढ़ा दबाव
सोना और चांदी की कीमतों पर दबाव की एक बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती मानी जा रही है। डॉलर इंडेक्स पिछले 12 महीनों में अब भी 10 प्रतिशत से ज्यादा नीचे है। लेकिन, केविन वार्श को अमेरिकी फेड चेयरमैन पद के लिए नामित किए जाने की खबर से डॉलर को सपोर्ट मिला है।
ट्रंप के बयान से अनिश्चितता
कुछ दिन पहले ट्रंप ने कमजोर डॉलर के समर्थन में बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि इससे अमेरिकी निर्यातकों को फायदा होगा। इसके साथ ही उन्होंने फेडरल रिजर्व से आक्रामक ब्याज दर कटौती की मांग भी की थी।
दूसरी तरफ, केविन वार्श को क्वांटिटेटिव ईजिंग का विरोधी माना जाता है। ऐसे में आने वाले हफ्तों या महीनों में फेड की नीति किस दिशा में जाएगी, इस पर अनिश्चितता बनी हुई है। वार्श के नामांकन की खबर से सोना और चांदी में गिरावट आना संभव था, लेकिन बाजार मान रहा है कि यह करेक्शन पहले से ही काफी समय से लंबित था।
COMEX मार्जिन बढ़ने से बढ़ी बिकवाली
कीमतों पर दबाव बढ़ने की एक और बड़ी वजह CME ग्रुप का फैसला रहा। CME ग्रुप ने सोमवार से सोना और चांदी के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स पर मार्जिन जरूरतें बढ़ा दी हैं।
COMEX गोल्ड फ्यूचर्स का मार्जिन 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं, COMEX 5000 सिल्वर फ्यूचर्स का मार्जिन 11 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है।
मार्जिन बढ़ा तो पोजिशन घटाने लगे ट्रेडर्स
मार्जिन बढ़ने का सीधा असर यह होता है कि ट्रेडर्स अपनी पोजिशन घटाने लगते हैं। जैसे ही पोजिशन अनवाइंड होती है, बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ता है और कीमतें और नीचे जाती हैं।
एनालिस्ट्स का कहना है कि ज्यादा लीवरेज लेकर ट्रेड करने वाले निवेशकों को भारी नुकसान हुआ है। ऐसे में उन्हें मार्जिन कॉल पूरी करने के लिए न सिर्फ सोना और चांदी, बल्कि दूसरे एसेट्स भी बेचने पड़ रहे हैं।
लंबी अवधि के लिए सपोर्ट अब भी मौजूद
हालांकि इतनी बड़ी गिरावट के बावजूद सोना और चांदी के लिए लंबे समय के सपोर्टिंग फैक्टर्स अभी भी बने हुए हैं। बाजार को उम्मीद है कि 2026 में कम से कम दो बार ब्याज दरों में कटौती हो सकती है, जो कीमती धातुओं के लिए अहम माना जाता है।
कम ब्याज दरों में क्यों चमकता है सोना
इतिहास बताता है कि बिना ब्याज देने वाली धातुएं, जैसे सोना, कम ब्याज दर वाले माहौल में बेहतर प्रदर्शन करती हैं। जब ब्याज दरें नीचे जाती हैं, तो निवेशक सोने को एक सुरक्षित और आकर्षक विकल्प के तौर पर देखने लगते हैं। यही वजह है कि मौजूदा करेक्शन के बावजूद, लंबी अवधि में सोना और चांदी पर निवेशकों की नजर बनी हुई है।