Gold Silver Outlook: सात महीने के निचले स्तर पर आए सोने-चांदी के दाम, जानें आगे कैसी रहेगी चाल
Gold Silver Outlook: 1 जुलाई को सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई कमजोरी, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और ब्याज दरों के ऊंचे स्तर पर बने रहने की आशंकाओं के चलते घरेलू सर्राफा बाजार में बिकवाली का तगड़ा दबाव देखा गया। एक्सपर्ट्स से जानें आगे कैसी रहेगी सर्राफा बाजार की चाल
आज MCX पर दोनों कीमती धातुओं में भारी बिकवाली देखने को मिली
Gold Silver Price Analysis: भारतीय घरेलू वायदा बाजार में बुधवार, 1 जुलाई को सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई कमजोरी, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और ब्याज दरों के ऊंचे स्तर पर बने रहने की आशंकाओं के चलते घरेलू सर्राफा बाजार में बिकवाली का तगड़ा दबाव देखा गया। आइए समझते हैं सोने-चांदी में आई इस बड़ी गिरावट की प्रमुख वजहें।
MCX पर कितना गिरे सोने और चांदी के दाम?
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुओं में भारी बिकवाली देखी गई:
सोना: अगस्त डिलीवरी वाला सोना ₹1701 (1.19%) की भारी गिरावट के साथ ₹1.40 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
चांदी: सितंबर डिलीवरी वाली चांदी में और भी बड़ी गिरावट रही। यह ₹5380 (2.35%) टूटकर ₹2.23 लाख प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) की बात करें तो वहां भी सोना करीब सात महीने के निचले स्तर पर $3993 प्रति औंस के आसपास ट्रेड कर रहा था, जबकि चांदी करीब 3% लुढ़ककर $57.73 प्रति औंस पर आ गई।
गिरावट की 3 सबसे बड़ी वजहें
1. अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और बढ़ती ब्याज दरें
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी सेंट्रल बैंक की नीतियां हैं। फेडरल रिजर्व के अधिकारियों के बयानों से संकेत मिले हैं कि अगर महंगाई काबू में नहीं आती है, तो इस साल के अंत में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की जा सकती है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो लोग सोने-चांदी जैसे बिना ब्याज वाले एसेट्स से पैसा निकालकर अन्य वित्तीय विकल्पों में लगाने लगते हैं, जिससे सोने के दाम गिरते हैं।
2. मिडिल ईस्ट का तनाव और कच्चे तेल की आंच
मिडिल ईस्ट में बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। क्षेत्रीय विवादों के दोबारा बढ़ने के बाद ईरान ने अमेरिकी दूतों के साथ तत्काल बातचीत करने से इनकार कर दिया है, जिससे अमेरिका-ईरान शांति समझौते की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं। इस तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जिसने वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंता को और बढ़ा दिया है।
3. अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकी नजरें
निवेशक और ट्रेडर्स इस समय अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। इनमें जून का ADP एम्प्लॉयमेंट डेटा और आगामी नॉन-फार्म पेरोल आंकड़े शामिल हैं। इन आंकड़ों से साफ होगा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाने वाला है।
आगे क्या होगी सोने-चांदी की चाल?
रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर पृथ्वीराज कोठारी के मुताबिक, सोना और चांदी दोनों सात महीने के निचले स्तर के करीब आ जाने से दबाव में बने हुए हैं। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $4000 प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बना रहता है, तो तकनीकी रूप से यह नीचे $3600 प्रति औंस के सपोर्ट जोन तक जा सकता है।
वहीं चांदी का $60 प्रति औंस से नीचे जाना यह इशारा करता है कि इसमें $50 प्रति औंस के स्तर तक और कमजोरी आ सकती है। हालांकि, बाजार के ओवरसोल्ड जोन में होने के कारण शॉर्ट-टर्म में एक रिकवरी रैली भी देखने को मिल सकती है।
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