Gold Silver Prices: सोना-चांदी में बड़ी गिरावट! खरीदारी का मौका, या फिर भागने में भलाई? जानिए एक्सपर्ट से

Gold Silver Prices: सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट से निवेशकों में चिंता बढ़ गई है। गोल्ड और सिल्वर अपने हालिया उच्च स्तर से काफी नीचे आ गए हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह गिरावट अवसर भी हो सकती है, लेकिन सावधानी जरूरी है। जानिए डिटेल।

अपडेटेड Mar 23, 2026 पर 11:00 PM
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एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल सोना और चांदी दोनों में तकनीकी कमजोरी दिख रही है।

Gold Silver Prices: सोमवार को कीमती धातुओं के बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली। स्पॉट गोल्ड 4,200 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गया और नवंबर 2025 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। वहीं चांदी में भी भारी बिकवाली दिखी। इसका भाव गिरकर एक वक्त लगभग 61 डॉलर प्रति औंस तक आ गया था।

घरेलू बाजार में भी इसी तरह की गिरावट देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अप्रैल डिलीवरी वाले गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट के भाव ने इंट्राडे में 1,29,595 रुपये प्रति ग्राम का लो बनाया। यह जनवरी में बने अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर 1,93,096 रुपये से करीब 33 प्रतिशत नीचे है।

चांदी में भी भारी गिरावट


चांदी में गिरावट और ज्यादा तेज रही। MCX पर मई डिलीवरी वाले सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट का भाव दिसंबर के बाद पहली बार 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे आ गया। कारोबार के दौरान यह गिरकर इंट्राडे में 1,99,643 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। यह जनवरी के उच्च स्तर 4,09,800 रुपये से 50 प्रतिशत से ज्यादा कम है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमला टालने के बयान के दोनों धातुओं में रिकवरी दिखी।

सोने और चांदी तेज गिरावट के बाद बाजार में यह चर्चा तेज हो गई कि क्या सोना और चांदी अब बेयर मार्केट में प्रवेश कर चुके हैं। हालांकि कई एक्सपर्ट् का मानना है कि यह गिरावट स्थायी कमजोरी नहीं बल्कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों का असर है।

डॉलर की मजबूती और लिक्विडिटी का दबाव

कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च प्रमुख अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक सोना और चांदी में गिरावट की बड़ी वजह डॉलर की मजबूत मांग है। निवेशक नकदी जुटाने और जोखिम कम करने के लिए अपनी पोजिशन घटा रहे हैं।

उनका कहना है कि ऊर्जा कीमतों में तेजी से वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां कड़ी हो गई हैं। इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से डॉलर में निवेश ज्यादा आकर्षक हो गया है। ऐसे माहौल में पारंपरिक सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने पर भी दबाव पड़ रहा है।

अनिंद्य बनर्जी का कहना है कि जनवरी तक बाजार में जरूरत से ज्यादा उत्साह था, जबकि अब डर का माहौल बन गया है। उनके अनुसार मौजूदा गिरावट फंडामेंटल कमजोरी नहीं बल्कि शॉर्ट टर्म लिक्विडिटी दबाव का असर है।

गोल्ड के लिए अहम स्तर

टेक्निकल नजरिए से देखें तो निकट अवधि में सोने का भाव 3,700 से 4,100 डॉलर प्रति औंस के बीच स्थिर हो सकता है। MCX पर यह स्तर लगभग 1.15 लाख से 1.30 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बराबर है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सोना 1.30 लाख रुपये से नीचे आता है तो लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह खरीदारी का अच्छा मौका हो सकता है। वहीं ऊपर की तरफ 4,700 डॉलर यानी लगभग 1.46 से 1.50 लाख रुपये का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

चांदी में ज्यादा दबाव क्यों

चांदी पर दबाव सोने के मुकाबले ज्यादा है। इसकी वजह यह है कि चांदी सिर्फ निवेश धातु नहीं बल्कि औद्योगिक धातु भी है। ऊर्जा कीमतों में तेजी और वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंका से औद्योगिक मांग कमजोर होने का डर बढ़ गया है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक चांदी के लिए 50 से 55 डॉलर प्रति औंस का दायरा मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। MCX पर यह लगभग 1.70 से 1.80 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के बराबर है।

उनका कहना है कि अगर चांदी 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे आती है तो इसे धीरे-धीरे खरीदने का मौका माना जा सकता है। वहीं ऊपर की तरफ 71 से 71.5 डॉलर यानी लगभग 2.25 से 2.30 लाख रुपये का स्तर रेजिस्टेंस हो सकता है।

क्या सच में बेयर मार्केट शुरू हो गया?

Geojit Investments के कमोडिटी रिसर्च प्रमुख हरीश वी का कहना है कि सोना तभी असल बेयर मार्केट में जाएगा, जब इसका भाव 3,200 डॉलर प्रति औंस से नीचे आएगा। वहीं चांदी में स्ट्रक्चरल कमजोरी तब मानी जाएगी, जब भाव 44 डॉलर से नीचे गिर आएगा।

उनका कहना है कि पिछले दो साल में सोने ने 170 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दिखाई है। इसलिए हाल की गिरावट के बावजूद इसका लंबी अवधि का रुझान अभी भी मजबूत माना जा रहा है।

 3,600 डॉलर तक गिरेगा सोना?

LKP Securities के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी और करेंसी रिसर्च) जतीन त्रिवेदी के मुताबिक- गोल्ड में गिरावट की मुख्य वजह महंगाई का जोखिम हैं। इसके कारण ब्याज दरों में कटौती को लेकर उम्मीदें बदल रही हैं। बाजार अब लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों के माहौल की संभावना मानकर चल रहा है।

जतीन त्रिवेदी का कहना है कि तकनीकी और मैक्रो नजरिए से देखें तो निकट अवधि में सोने के लिए 4,000 डॉलर और 3,600 डॉलर के स्तर तक गिरावट की संभावना बनी हुई है। हालांकि अगर भू राजनीतिक तनाव में कमी आती है और ब्याज दरों को लेकर स्पष्ट संकेत मिलते हैं, तो सोने में तेज रिकवरी भी देखने को मिल सकती है। ऐसे में कीमतें 5,000 डॉलर तक पहुंचने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

निवेशकों के लिए क्या रणनीति

एक्सपर्ट्स का कहना है कि फिलहाल सोना और चांदी दोनों में तकनीकी कमजोरी दिख रही है। ऐसे में ट्रेडर्स के लिए उछाल आने पर बिकवाली की रणनीति अपनाना बेहतर हो सकता है।

हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह गिरावट अवसर भी बन सकती है। उनका कहना है कि बाजार में अभी लालच की जगह डर का माहौल है और ऐसे समय में धैर्य के साथ की गई निवेश रणनीति लंबे समय में फायदा दे सकती है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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