Gold-Silver Crash: सोना-चांदी में हाहाकार! 27000 तक टूटा भाव, जानिए गिरावट के पीछे के 5 बड़े कारण

Gold-Silver Crash: सोना और चांदी की कीमतों में सोमवार को बड़ी गिरावट आई। MCX पर सोना 15000 और चांदी करीब 27000 रुपये तक टूट गई। जानिए किन 5 वजहों से गोल्ड और सिल्वर में आई बड़ी गिरावट।

अपडेटेड Mar 23, 2026 पर 3:38 PM
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पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी में तेज तेजी देखी गई थी।

Gold-Silver Crash: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को भारी गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट इसलिए भी हैरान करती है, क्योंकि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से वैश्विक तनाव अभी भी बना हुआ है। आमतौर पर ऐसे समय में सोना और चांदी जैसे कीमती धातुओं को सुरक्षित निवेश माना जाता है। ऐसे में यह गिरावट कई निवेशकों को चौंका रही है।

दोपहर करीब 3.15 बजे MCX पर सोने का वायदा भाव 1,34,042 रुपये पर कारोबार कर रहा था। यह 10,420 रुपये यानी 7.25 प्रतिशत नीचे था। वहीं चांदी का वायदा भाव 2,05,439 रुपये पर था। इसमें 21,172 रुपये यानी 9.43 प्रतिशत गिरावट आई थी। अगर शुक्रवार के बंद लेवल से देखें, तो सोमवार को सोना करीब 15000 और चांदी लगभग 27000 रुपये तक टूटी है।

यह गिरावट ऐसे समय आई है जब पिछले कुछ महीनों में सोने और चांदी में तेज तेजी देखी गई थी। उस दौरान भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में इन धातुओं की ओर तेजी से बढ़े थे।


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सोना-चांदी का भाव गिरने के 5 कारण

सोमवार के कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। वैश्विक तनाव के बावजूद कीमती धातुओं में आई इस कमजोरी ने निवेशकों को चौंका दिया है। बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और वैश्विक संकेतों की वजह से दोनों धातुओं पर दबाव बना हुआ है। आइए जानते हैं इसकी मुख्य वजहें।

1. ईरान की चेतावनी: ईरान ने कहा है कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के बिजली ग्रिड पर हमला करने की धमकी को अमल में लाते हैं, तो जवाब में खाड़ी देशों के ऊर्जा और जल ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। इस चेतावनी से बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है।

2. होर्मुज पर तनाव: ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि अगर ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला हुआ, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। यह रास्ता वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है, इसलिए इससे बाजार की चिंता बढ़ गई है।

3. कच्चा तेल का भाव: कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की धमकियों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

4. ग्लोबल मार्केट्स में दबाव: अमेरिका और एशिया के शेयर बाजारों में भी कमजोरी दिख रही है। अमेरिकी फ्यूचर्स नीचे हैं और एशियाई बाजार भी गिरावट के साथ खुले हैं। इससे बाजार में जोखिम से बचने का रुझान बढ़ा है।

5. ब्याज दर अनिश्चितता: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले कदम को लेकर भी निवेशक सतर्क हैं। बाजार में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। इससे सोना और चांदी जैसी धातुओं की आकर्षकता कम हो जाती है।

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वैश्विक बाजारों से भी मिला दबाव

वैश्विक बाजारों के संकेत भी इसी रुझान की ओर इशारा कर रहे हैं। स्पॉट गोल्ड करीब 4,372 डॉलर प्रति औंस तक गिर गया है, जो लगभग 2.5 प्रतिशत नीचे है। वहीं अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में करीब 4.4 प्रतिशत की गिरावट आई है।

सोने की कीमत लगातार नौ कारोबारी सत्रों से गिर रही है और यह जनवरी की शुरुआत के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। पिछले एक सप्ताह में ही सोने की कीमतों में 10 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।

हर एसेट क्लास में बिकवाली

मौजूदा समय में बाजार में कई तरह के एसेट क्लास में एक साथ बिकवाली देखी जा रही है। Geojit Investments Limited के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी के विजयकुमार ने कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़े जोखिम ने सभी एसेट्स को प्रभावित किया है। इसमें शेयर, बॉन्ड और सोना-चांदी जैसी कीमती धातुएं भी शामिल हैं।

उनका कहना है कि कई बार सुरक्षित माने जाने वाले सोने में गिरावट शेयर बाजार से भी ज्यादा हो जाती है। इतनी अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे घबराएं नहीं और शांत रहें।

निवेशकों के लिए क्या मतलब

मौजूदा गिरावट का यह मतलब नहीं है कि सोने और चांदी का लंबी अवधि का रुझान पूरी तरह बदल गया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हालिया तेजी के बाद यह स्वाभाविक गिरावट है। आमतौर पर युद्ध या वैश्विक संकट के समय सोना और चांदी मजबूत होते हैं, क्योंकि निवेशक सुरक्षित विकल्प तलाशते हैं। लेकिन इस बार बड़ी खरीदारी पहले ही हो चुकी थी, इसलिए अब कीमतें संतुलन की ओर लौटती दिखाई दे रही हैं।

निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे छोटे समय के उतार-चढ़ाव पर ज्यादा प्रतिक्रिया न दें। जब तक वैश्विक तनाव और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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