गोल्ड और सिल्वरी में 3 जनवरी को जबर्दस्त रिकवरी दिखी। इससे कीमती मेटल्स के निवेशकों को कुछ राहत मिली। रिकवरी की वजह भारत-अमेरिका ट्रेड डील है। इसका मार्केट सेंटिमेंट पर अच्छा असर पड़ा। शाम 5:45 बजे एमसीएक्स में गोल्ड फ्यूचर्स 5.58 फीसदी के उछाल के साथ 1,49,600 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 13.22 फीसदी चढ़कर 2,67,332 रुपये प्रति किलो चल रहा था।
क्या गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में उछाल आया?
सोने और चांदी में तेजी का पॉजिटिव असर गोल्ड ईटीएफ और सिल्वर ईटीएफ पर भी पड़ा। HDFC Silver ETF 15.93 फीसदी उछलकर 249.50 रुपये पर पहुंच गया। मिरै एसेट सिल्वर ईटीएफ 14.61 फीसदी के उछाल के साथ 252.54 रुपये पर पहुंच गया। एसबीआई सिल्वर ईटीएफ में भी 13.82 फीसदी उछाल देखने को मिला।
सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रहेगा?
मिरै एसेट म्यूचुअल फंड ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मार्केट्स में उतार-चढ़ाव दिख सकता है। इसकी वजह यह है कि इनवेस्टर्स और ट्रेडर्स उधार के सौदे काट रहे हैं। वह बाजार की तस्वीर साफ होने तक इंतजार करना चाहते हैं। हालांकि, बीते 3-4 दिनों में आई गिरावट से निवेशकों को यह समझने की जरूरत है कि सुरक्षित माने जाने वाले एसेट्स में भी बड़ी गिरावट आ सकती है।
गोल्ड-सिल्वर के इनवेस्टर्स को क्या करना चाहिए?
ग्रो म्यूचुअल फंड के सीईओ वरुण गुप्ता ने कहा, "निवेशकों को गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ का इस्तेमाल लंबी अवधि के निवेश के लिए करना चाहिए। इस दौरान उन्हें पोर्टफोलियो में ऐलोकेशन का ध्यान रखना जरूरी है।" दूसरे एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को सोने और चांदी की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्हें निवेश में अनुशासन बरतने पर फोकस रखना चाहिए। इनवेस्टर्स अपने पोर्टफोलियो में गोल्ड और सिल्वर की हिस्सेदारी 10-15 फीसदी तक बनाए रख सकते हैं।
गोल्ड और सिल्वर में क्यों आई थी बड़ी तेजी?
बीते साल गोल्ड में आई जबर्दस्त तेजी की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी, जियोपॉलिटिकल टेंशन में इजाफा और केंद्रीय बैंकों की गोल्ड की खरीदारी रही। इससे सुरक्षित निवेश के लिए निवेशकों ने सोने में ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। चांदी की कीमतों को जैसे पंख लग गए। चांदी का इंडस्ट्रियल इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। इसका सोलर पैनल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और ईवी सहित कई इंडस्ट्रीज में इस्तेमाल होता है। पिछले कुछ सालों से सिल्वर की सप्लाई डिमांड के मुकाबले कम है। इससे कीमतों में उछाल देखने को मिला है।