Dhanteras Gold & Silver Price Outlook: धनतेरस से ठीक पहले सोना और चांदी अपनी रिकॉर्ड ऊंचाइयों से बड़ी गिरावट देखने के बाद फिर से रिकवरी के रास्ते पर लौट आए हैं। डॉलर इंडेक्स में नरमी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के बल पर भारतीय वायदा बाजार (MCX) पर 5 नवंबर को सोना और चांदी दोनों मजबूती के साथ ट्रेड कर रहे हैं।
MCX पर दिसंबर गोल्ड फ्यूचर्स ₹1.44 लाख प्रति 10 ग्राम पर 1.11% की बढ़त के साथ कारोबार कर रहा है, जबकि दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स ₹1.87 लाख प्रति किलोग्राम पर बना हुआ है। जनवरी 2026 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने के $5,600 प्रति औंस और चांदी के $100 प्रति औंस का स्तर छूने के बाद आई भारी गिरावट के बाद यह नई तेजी निवेशकों और खरीदारों दोनों का ध्यान खींच रही है। आइए आपको बताते हैं इस धनतेरस पर सोने-चांदी का क्या है गणित।
पहले जानिए हालिया रिकवरी को किन कारणों से मिल रहा है सहारा?
अमेरिकी राजनीतिक घटनाक्रम: अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक गतिरोध और सख्त बजटीय खर्चों की उम्मीदों के कारण डॉलर इंडेक्स सुस्त हुआ है और ट्रेजरी यील्ड में गिरावट आई है।
सुरक्षित निवेश की मांग: अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव ने अनिश्चितता के माहौल में बहुमूल्य धातुओं को सेफ-हेवन एसेट के रूप में सपोर्ट किया है।
फेडरल रिजर्व की नीति: हालांकि यूएस फेड द्वारा ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि मीडियम-टर्म में दरों का रुझान सोने के पक्ष में रहेगा।
गिरावट के बाद भी क्यों मजबूत है गोल्ड का आउटलुक?
ब्रोकरेज फर्म और फंड मैनेजर्स का मानना है कि हालिया बिकवाली एक टेक्निकल करेक्शन थी, न कि किसी बड़े बेयर मार्केट की शुरुआत।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंसियल सर्विसेज ने अपनी रिपोर्ट 'Gold's Rally: Deferred, Not Derailed' में स्पष्ट किया है कि लंबी अवधि में सोने में तेजी का ट्रेंड पूरी तरह सुरक्षित है। वहीं मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस धनतेरस तक घरेलू 24-कैरेट सोना 7% से 8% का रिटर्न दे चुका है।
सोना और चांदी: आगे के टारगेट और एक्युमुलेशन लेवल्स
धनतेरस 2026: फेस्टिव बायर्स का बदलता ट्रेंड
डिजिटल और पेपर गोल्ड की तरफ रुझान: निवेश प्लैटफॉर्म 'Trackk' के अनुसार, खरीदार अब केवल भारी-भरकम ज्वेलरी तक सीमित नहीं हैं। वे कॉइन्स, लाइटवेट ज्वेलरी और गोल्ड ETFs व डिजिटल फंड्स की तरफ तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं।
ज्वेलरी बनाम इनवेस्टमेंट का अंतर: एक्सपर्ट्स की सलाह है कि निजी इस्तेमाल के लिए खरीदी जाने वाली ज्वेलरी में मेकिंग चार्जेस और वेस्टेज कॉस्ट शामिल होती है। यदि उद्देश्य विशुद्ध निवेश है, तो एक्सचेंज-ट्रेडेड प्रोडक्ट्स (ETFs) स्टोरेज और मेकिंग चार्जेस के झंझट के बिना बेहतर रिटर्न देते हैं।
स्टाइल और सिक्योरिटी का संगम: 'DishiS Designer Jewellery' के अनुसार, धनतेरस पर सोने की खरीदारी का पारंपरिक और सांस्कृतिक महत्व हमेशा बना रहेगा, लेकिन इस साल ग्राहक हल्के और ट्रेंडी डिजाइन्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।