Gold News: 18 साल में सबसे तेज स्पीड से गिर रहा गोल्ड, जून में बेतहाशा फीकी पड़ी चमक, अब ये है रुझान

Gold worst month in 18 years: पश्चिमी एशिया में उथल-पुथल ने गोल्ड पर ऐसा दबाव डाला कि इस महीने इसकी चमक में 18 साल में सबसे अधिक गिरावट आई। गोल्ड के लिए इस बार की गिरावट काफी झटका देने वाली साबित हो रही है। जानिए कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बावजूद गोल्ड की चमक फीकी क्यों पड़ी और आगे क्या रुझान है

अपडेटेड Jun 30, 2026 पर 11:25 AM

Gold worst month in 18 years: यह मंगलवार गोल्ड के लिए मंगल नहीं साबित हो रहा है। इसके भाव 1% से अधिक टूट गए। अब यह अक्टूबर 2008 के बाद अपनी सबसे बड़ी मासिक गिरावट की तरफ बढ़ रहा है। पश्चिमी एशिया में अमेरिका और ईरान से जुड़ी लड़ाई को लेकर अनिश्चितता के कम होने और अमेरिका में महंगाई की तेज रफ्तार पर काबू पाने के लिए ब्याज दरों में उछाल की बढ़ती उम्मीदों ने इसकी चमक फीकी की है। स्पॉट गोल्ड 02:21 GMT (भारतीय समयानुसार 07:51 AM) पर 1.5% फिसलकर प्रति औंस (28.34 ग्राम) $3,956.92 पर आ गया और इसके साथ ही यह इस महीने अब तक 12.7% नीचे आ चुका है। लगातार चौथे महीने इसकी चमक फीकी हुई है। वहीं अगस्त डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 1.7% गिरकर $3,969.30 पर आ गया।

गोल्ड के लिए इस बार की गिरावट काफी झटका देने वाली साबित हो रही है। साल 2024 के बाद से पहली बार किसी तिमाही में इसकी चमक फीकी पड़ी है और जून 2013 के बाद इसमें सबसे बड़ी गिरावट हो सकती है। न्यूज एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2008 के बाद से यानी 18 साल में गोल्ड को इस महीने सबसे बड़ा झटका लगने वाला है।

इस कारण जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बावजूद फीका पड़ा गोल्ड


पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मैरेक्स के एनालिस्ट एडवर्ड मीर का कहना है कि महंगाई की रफ्तार तेज है तो इसे काबू में करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाई जा सकती है और डॉलर मजबूत है। ये दोनों बातें मिलकर गोल्ड को ऊपर ले जाने वाले फैक्टर्स पर भारी पड़ रहे हैं। यही वजह कि जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बावजूद सेफ हेवन एसेट्स कहे जाने वाले गोल्ड की चमक फीकी पड़ी है। गोल्ड को महंगाई से लड़ाई में मजबूत हथियार माना जाता है लेकिन ब्याज दरें बढ़ती हैं तो इसका आकर्षण कम हो जाता है।

ट्रेडर्स को उम्मीद है कि इस साल अमेरिकी फेडरल रिजर्व तीन बार दरें बढ़ा सकता है और अभी सितंबर में बढ़ोतरी के आसार लगभग 64% माने जा रहे हैं। [

अब आगे क्या है रुझान

निवेशकों की नजर अब इस हफ्ते जारी होने वाली जून के ADP रोजगार आंकड़ों और नॉन-फार्म पेरोल डेटा पर है। इनसे फेड की आगामी मौद्रिक नीति का संकेत मिल सकता है। अमेरिकी डॉलर लगातार दूसरे महीने मजबूती की तरफ बढ़ रहा है, जिससे डॉलर के अलावा बाकी करेंसी में गोल्ड खरीदना और महंगा हो गया है। एडवर्ड मीर का अनुमान है कि इस साल की दूसरी छमाही में गोल्ड की ट्रेडिंग $3,500 से $4,400 की रेंज में होगी।

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