जब आप किसी दोस्त या रिश्तेदार के लिए बैंक लोन के गारंटर बनते हैं, तो यह सोचकर ही सावधान हो जाना चाहिए कि यह एक बड़ी जिम्मेदारी है। अगर लोन लेने वाला EMI समय पर चुकाता है, तो ठीक है, लेकिन अगर नहीं करता तो बैंक आपकी सैलरी, प्रॉपर्टी तक जब्त कर सकता है और आपका सिबिल स्कोर भी खराब हो सकता है।
गारंटर बनने का मतलब क्या है?
भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 की धारा 128 के अनुसार, गारंटर की जिम्मेदारी लोन लेने वाले के बराबर होती है। यानि अगर लोनधारी डिफॉल्ट करता है तो बैंक आपकी भी संपत्ति जब्त कर सकता है और भुगतान आपके ऊपर आ जाता है।
अगर आप गारंटर हैं और परेशान हैं तो जान लें कि बैंक से नाम हटाना संभव है, लेकिन कुछ शर्तों के साथ। सबसे आसान तरीका है कि लोन लेने वाला कोई दूसरा नया गारंटर लेकर आए और बैंक में इसकी मंजूरी हो जाए। तभी आपका नाम गारंटर की लिस्ट से हट सकता है।
अगर बैंक नाम हटाने से मना कर दे तो आप कानूनी मदद लेकर कोर्ट में मामला दर्ज करा सकते हैं। कोर्ट में यह साबित करना होगा कि आपने गारंटर बनने से पहले यह उम्मीद नहीं की थी कि लोनधारी डिफॉल्ट करेगा।
- गारंटर बनने से पहले लोनधारी की आर्थिक स्थिति को अच्छे से समझें।
- बिना सोचे-समझे गारंटर मत बनें क्योंकि डिफॉल्ट की स्थिति में आपकी आर्थिक सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।
- यदि संभव हो तो दूरी बनाएं और नाम हटाने का प्रयास करें।
लोन गारंटर बनने का मतलब है आप भी लोन की जिम्मेदारी नियमित रूप से उठाएंगे, इसलिए सोच-समझ कर कदम उठाएं और जरूरत हो तो विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।