NPS vs UPS: बड़ी राहत! NPS में वापस आ सकते हैं UPS चुन चुके कर्मचारी, सरकार ने दिया आखिरी मौका
NPS vs UPS: केंद्र सरकार ने UPS चुन चुके कर्मचारियों को आखिरी मौका दिया है कि वे चाहें तो NPS में स्विच कर सकते हैं। यह विकल्प सिर्फ एक बार मिलेगा। NPS में जाने पर पेंशन बाजार के रिटर्न के हिसाब से होगी और निश्चित पेंशन की गारंटी खत्म हो जाएगी। जानिए NPS और UPS के फायदे और दोनों के बीच अंतर।
अगर कर्मचारी UPS से NPS में स्विच कर लेते हैं तो फिर उन पर NPS के नियम लागू होंगे।
NPS vs UPS: केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन से जुड़ा एक बड़ा फैसला लिया है। अब जिन कर्मचारियों ने यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) चुना है, उन्हें एक खास मौका दिया गया है कि वे चाहें तो अपनी पेंशन योजना को बदलकर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में जा सकते हैं।
इसका मतलब है कि अगर किसी सरकारी कर्मचारी ने जल्दबाजी में UPS चुन लिया। लेकिन, अब उसे लगता है कि NPS ज्यादा फायदेमंद है, तो वह NPS में वापस आ सकता है। हालांकि, यह मौका सिर्फ एक बार मिलेगा और फिर वापसी का विकल्प नहीं होगा।
क्या है सरकार का नया नियम?
वित्त मंत्रालय ने कहा है कि UPS वाले कर्मचारी रिटायरमेंट से एक साल पहले तक या अगर वे स्वैच्छिक रिटायरमेंट (VRS) ले रहे हैं तो रिटायरमेंट से तीन महीने पहले तक NPS में स्विच कर सकते हैं। यह सुविधा उन कर्मचारियों पर भी लागू होगी जो Rule 56J के तहत रिटायर या इस्तीफा देते हैं। लेकिन, अगर कोई तय समय पर यह विकल्प नहीं चुनता है तो उसे उसी UPS में रहना होगा।
किसे मिलेगी यह सुविधा?
यह सुविधा सिर्फ उन्हीं केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए है जो अभी UPS में हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह स्विच एकतरफा है। इसका मतलब है कि एक बार UPS से NPS में जाने के बाद दोबारा UPS में नहीं लौट सकते।
साथ ही, जिन कर्मचारियों को हटाया गया है, बर्खास्त किया गया है, दंडस्वरूप जबरन रिटायर किया गया है या जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है, वे इस सुविधा का फायदा नहीं ले पाएंगे।
NPS में जाने के बाद क्या होगा?
अगर कर्मचारी UPS से NPS में स्विच कर लेते हैं तो फिर उन पर NPS के नियम लागू होंगे। इसका मतलब है कि अब उन्हें UPS जैसी गारंटी वाली पेंशन नहीं मिलेगी, बल्कि NPS के तहत मिलने वाला पैसा उनके निवेश और मार्केट से जुड़े रिटर्न पर निर्भर करेगा।
सरकार की तरफ से जो 4% का अतिरिक्त योगदान दिया जाता है, वह भी UPS से बाहर निकलते समय कर्मचारी के NPS खाते में जमा कर दिया जाएगा।
UPS vs NPS: जानिए प्रमुख अंतर
पहलू
NPS
UPS
योजना
मार्केट आधारित
गारंटीड हाइब्रिड
सरकार का योगदान
बेसिक सैलरी और डीए का 14%
बेसिक सैलरी और डीए का 8.50%
पेंशन
निवेश और एन्यूटी पर निर्भर
अंतिम बेसिक पे का 50% (25+ साल सेवा पर)
एकमुश्त राशि
60% टैक्स-फ्री, 40% एन्यूटी
नहीं
DA एडजस्टमेंट
नहीं
हां
जोखिम
मार्केट रिस्क
जीरो रिस्क
क्यों खास है यह बदलाव?
इस नए विकल्प से कर्मचारियों को अपने रिटायरमेंट पैसों को मैनेज करने की ज्यादा आजादी मिलेगी। UPS में रिटायरमेंट के बाद तय पेंशन की गारंटी होती है। वहीं, NPS बाजार से जुड़ा होता है और इसमें लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलने की उम्मीद रहती है।
सरकार के हालिया फैसले के बाद कर्मचारी अपनी मर्जी से तय कर पाएंगे कि उन्हें कौन-सी पेंशन स्कीम में रहना है- UPS या फिर NPS।
NPS vs UPS: अक्सर पूछे जाने वाले सवालों के जवाब (FAQ)
सवाल: NPS और UPS में कौन बेहतर है?
जवाब: NPS निजी सेक्टर और ग्रोथ चाहने वालों के लिए अच्छा है, पर गारंटी नहीं। UPS तय पेंशन और स्थिरता देता है।
सवाल: UPS आने के बाद NPS का क्या होगा?
जवाब: सरकारी कर्मचारियों के लिए UPS, NPS की जगह ले सकता है। ट्रांसफर और टैक्स नियम अभी स्पष्ट नहीं हैं।
सवाल: 2025 की नई पेंशन योजना क्या है?
जवाब: UPS, जिसमें न्यूनतम ₹10,000 पेंशन और सरकार का 8.5% योगदान तय है।
सवाल: NPS से कितनी पेंशन मिल सकती है?
जवाब: फिक्स नहीं है। यह कॉर्पस, एन्युटी रेट और मार्केट पर निर्भर करता है।
सवाल: क्या UPS सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए है?
जवाब: हां, अभी केवल केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए।