Govt Pension Schemes: यूपी में सरकारी पेंशन पाने के लिए क्या करें? स्टेप बाई स्टेप जानें पूरा तरीका, सीधे खाते में आएगा पैसा

UP Pension Schemes: अगर आप या आपके परिवार में कोई इस योजना का लाभ उठाना चाहता है, तो इसके नियम, जरूरी कागजात और आवेदन का पूरा तरीका नीचे बेहद आसान भाषा में समझाया गया है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद अधिकारी कागजातों की जांच करते हैं। सब कुछ सही पाए जाने पर पेंशन मंजूर हो जाती है और पैसे तीन-तीन महीने की किस्तों में सीधे खाते में आते हैं

अपडेटेड Jun 06, 2026 पर 1:44 PM
Govt Pension Schemes: यूपी में सरकारी पेंशन पाने के लिए क्या करें? स्टेप बाई स्टेप जानें पूरा तरीका, सीधे खाते में आएगा पैसा

उत्तर प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर बुजुर्गों, विधवा महिलाओं और दिव्यांगजनों को सहारा देने के लिए सरकार कई तरह की सरकारी पेंशन योजनाएं चलाती है। इस समय राज्य में 67 लाख से भी ज्यादा बुजुर्गों को इसका सीधा फायदा मिल रहा है।

अगर आप या आपके परिवार में कोई इस योजना का लाभ उठाना चाहता है, तो इसके नियम, जरूरी कागजात और आवेदन का पूरा तरीका नीचे बेहद आसान भाषा में समझाया गया है।

UP में मिलने वाली मुख्य पेंशन योजनाएं


यूपी सरकार मुख्य रूप से तीन तरह की सामाजिक सुरक्षा पेंशन देती है। इन सभी में पेंशन की राशि सीधे बैंक खाते में (DBT के जरिए) भेजी जाती है:

वृद्धावस्था पेंशन (Old Age Pension): 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों के लिए। इसमें ₹1,000 महीना (यानी ₹12,000 सालाना) मिलता है।

निराश्रित महिला (विधवा) पेंशन: 18 साल से ऊपर की ऐसी महिलाएं जिनके पति की मृत्यु हो चुकी हो। इसमें ₹1,000 महीना मिलता है।

दिव्यांगजन पेंशन: 18 साल या उससे ऊपर के व्यक्ति जो 40% या उससे ज्यादा दिव्यांग (Disability) हैं। इसमें ₹1,000 महीना (कुष्ठ रोगियों के लिए ₹3,000 महीना) दिया जाता है।

कौन ले सकता है इसका लाभ? 

पेंशन पाने के लिए सरकार ने कुछ बेहद जरूरी शर्तें रखी हैं:

यूपी के निवासी: आवेदक का उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी होना जरूरी है।

कमाई की सीमा (Income Limit):

  • गांव वालों के लिए: पूरे परिवार की सालाना कमाई ₹46,080 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
  • शहर वालों के लिए: पूरे परिवार की सालाना कमाई ₹56,460 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
  • विधवाओं के लिए: विधवा पेंशन के लिए पारिवारिक आय की सीमा ₹2,00,000 सालाना तक है।
  • कोई दूसरी पेंशन न हो: आवेदन करने वाला व्यक्ति पहले से किसी अन्य सरकारी पेंशन (जैसे रेलवे, सेना या राज्य/केंद्र की किसी और स्कीम) का लाभ न ले रहा हो।

जरूरी कागजात

अब यूपी सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। उम्र साबित करने के लिए केवल आधार कार्ड मान्य नहीं होगा। आधार को सिर्फ पहचान और पते का सबूत माना जाएगा। उम्र के सत्यापन के लिए आपको नीचे दिए गए अन्य कागजात देने होंगे।

आवेदन करते समय आपके पास ये दस्तावेज तैयार होने चाहिए:

  • पहचान और पता: आधार कार्ड, वोटर ID या राशन कार्ड।
  • उम्र का प्रमाण (Age Proof): हाईस्कूल/इंटर की मार्कशीट। अगर बुजुर्ग पढ़े-लिखे नहीं हैं, तो उन्हें वोटर ID, राशन कार्ड या फिर एक आयु सत्यापन का स्व-घोषित शपथ पत्र देना होगा।
  • आय का सबूत: तहसील के तहसीलदार की ओर से जारी किया गया आय प्रमाण पत्र (Income Certificate)।
  • बैंक खाता: आधार कार्ड से लिंक एक्टिव बैंक अकाउंट की पासबुक।
  • अन्य (योजना के अनुसार): विधवा पेंशन के लिए पति का मृत्यु प्रमाण पत्र और दिव्यांग पेंशन के लिए अस्पताल से जारी दिव्यांगता सर्टिफिकेट।
  • पासपोर्ट साइज फोटो।

आवेदन कैसे करें?

यूपी में पेंशन के लिए आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। आप इसे अपने घर से या नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) या साइबर कैफे में जाकर करवा सकते हैं।

स्टेप 1.सबसे पहले उत्तर प्रदेश सरकार की एकीकृत सामाजिक पेंशन पोर्टल की ऑफिशियल वेबसाइट sspy-up.gov.in पर जाएं।

स्टेप 2.होमपेज पर आपको तीन विकल्प दिखेंगे - वृद्धावस्था पेंशन, निराश्रित महिला पेंशन, या दिव्यांग पेंशन। अपनी जरूरत के हिसाब से सही विकल्प पर क्लिक करें और फिर "Apply Online" को चुनें।

स्टेप 3.अपना जिला, मोबाइल नंबर और आधार नंबर डालकर रजिस्ट्रेशन करें। इसके बाद खुले फॉर्म में अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक खाता नंबर, IFSC कोड और आय प्रमाण पत्र का विवरण बिल्कुल सही-सही भरें।

स्टेप 4.अपनी पासपोर्ट साइज फोटो और ऊपर बताए गए सभी जरूरी कागजात (जैसे आय प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण) को स्कैन करके सही साइज में अपलोड करें। फॉर्म को अच्छी तरह जांचने के बाद 'Submit' कर दें।

पेंशन जारी रखने के लिए क्या है जरूरी?

फॉर्म जमा होने के बाद अधिकारी कागजातों की जांच करते हैं। सब कुछ सही पाए जाने पर पेंशन मंजूर हो जाती है और पैसे तीन-तीन महीने की किस्तों में सीधे खाते में आते हैं।

ध्यान रहे, पेंशन शुरू होने के बाद हर साल 'जीवन प्रमाण पत्र' (Life Certificate) या e-KYC करवाना जरूरी होता है, ताकि सरकार को पता चल सके कि लाभार्थी जीवित हैं और उन्हें योजना का लाभ मिलता रहे। यह काम भी आप किसी भी जन सेवा केंद्र से आसानी से करवा सकते हैं।

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