नकली GST रिफंड, सरकारी अधिकारी, 3 वकील, ट्रांसपोर्टर ने मिलकर सरकार को लगाया 54 करोड़ को चूना, पूरी फिल्मी है स्कैम की कहानी

GST Fraud: नकली GST रिफंड, सरकारी अधिकारी, 3 वकील, ट्रांसपोर्टर और फर्जी कंपनी ने मिलकर सरकार को लगाया 54 करोड़ को चूना। जिस तरीके से GST रिफंड के स्कैम को अंजाम दिया है.. उस तरीके से कहानी पूरी फिल्मी लगती है

अपडेटेड Aug 13, 2024 पर 5:19 PM
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GST fraud gst officer 3 lawyer transporter fake firms scam of 54 crore filmy kahani GST Fraud: नकली GST रिफंड, सरकारी अधिकारी, 3 वकील, ट्रांसपोर्टर और फर्जी कंपनी ने मिलकर सरकार को लगाया 54 करोड़ को चूना।

GST Fraud: नकली GST रिफंड, सरकारी अधिकारी, 3 वकील, ट्रांसपोर्टर और फर्जी कंपनी ने मिलकर सरकार को लगाया 54 करोड़ को चूना। जिस तरीके से GST रिफंड के स्कैम को अंजाम दिया है.. उस तरीके से कहानी पूरी फिल्मी लगती है। किसी को भी भनक नहीं लगी और कुछ लोग मिलकर अपना खेल खेलते रहे। दिल्ली सरकार के एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक बड़े GST घोटाले का पर्दाफाश किया है। नए फ्रॉड में 96 फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर 54 करोड़ रुपये का स्कैम किया गया। अधिकारियों के मुताबिक इस स्कैम में सात लोग शामिल थे, जिनमें एक GST अधिकारी बबीता शर्मा भी शामिल हैं। ये 54 करोड़ रुपये का स्कैम सरकारी अधिकारी और कुछ लोगों ने मिलकर किया है।

ACB के जॉइंट कमिश्नर मधुर वर्मा ने बताया कि इस घोटाले में बबीता शर्मा के अलावा तीन वकील राज सिंह सैनी, नरेंद्र कुमार सैनी और मुकेश सोनी, दो ट्रांसपोर्टर और एक फर्जी कंपनी का मालिक भी शामिल थे। इन लोगों ने लगभग 100 फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर फर्जी GST क्लेम किए और 718 करोड़ रुपये के फर्जी इनवॉइस जनरेट किए ताकि GST रिफंड ले सके। रिपोर्ट के अनुसार ये फर्जी कंपनियां मेडिकल सामान के आयात और निर्यात में लगी हुई बताई गई थीं।

बबीता शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने 96 फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल कर GST विभाग को धोखा देने की साजिश रची। 2021 और 2022 के बीच उन्होंने 400 से अधिक रिफंड को मंजूरी दी, जिनकी कुल राशि 35.51 करोड़ रुपये थी। वकीलों को इन मंजूर किए गए रिफंड का फायदा मिला, जबकि ट्रांसपोर्टर्स ने फर्जी ई-वे बिल और जाली माल रीसिप्ट का इस्तेमाल कर और रिफंड का फायदा उठाया।


GST विभाग ने इस घोटाले का पता कैसे लगाया?

सितंबर 2021 में बबीता शर्मा के GST ऑफिस के वार्ड 22 में ट्रांसफर के बाद GST सतर्कता विभाग ने माइग्रेशन रिक्वेस्ट में अचानक बढ़ोतरी देखी। कुछ दिनों के अंदर 50 से अधिक कंपनियों ने वार्ड 6 से वार्ड 22 में ट्रांसफर होने के लिए अप्लाई किया। उनके आवेदन जल्द क्लीयर भी होने लगे। इससे विभाग को शक हुआ और उन्होंने मामले की जांच शुरू की।

बिना किसी जांच के पास किये गए GST रिफंड

जांच के दौरान जब फर्मों का फिजिकल चेक किया गया तो वे मौजूद नहीं पाई गईं। इसके अलावा ACB ने पाया कि बबीता शर्मा ने इनपुट टैक्स क्रेडिट की जांच किए बिना रिफंड स्वकार किए, जो कि फर्जी क्लेम का पता लगाने के लिए महत्वपूर्ण होता है। जांच में और भी अनियमितताएं पाई गईं। जैसे कि एक ही PAN नंबर, ईमेल एड्रेस और मोबाइल नंबर का कई फर्मों में इस्तेमाल करना और आधार ऑथेंटिकेशन का न होना।

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