Bank Debits: आजकल अक्सर लोगों की शिकायतें देखने को मिलती हैं कि उनके बैंक ने मनमाने तरीके से कोई चार्ज बता पैसे काट लिए हैं। लोग इस परेशानी से जूझते हैं तो उन्हें कस्टमर केयर की याद आती है। लोग तुरंत कस्टमर केयर पर फोन करते हैं, लेकिन केवल फोन करना ही काफी नहीं होता। अपने पैसे वापस पाने के लिए शिकायत को सही तरीके से दर्ज करना और तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।
हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अनाधिकृत डिजिटल लेनदेन से ग्राहकों को बचाने के लिए खास नियम बनाए हैं। अगर बैंक आपकी समस्या का समाधान समय पर नहीं करता है, तो आप रिजर्व बैंक के लोकपाल यानी ओम्बड्समैन के पास भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अगर आपके खाते से भी गलत या अनधिकृत चार्ज कटा है, तो पैसा वापस पाने के लिए ये 6 काम तुरंत करें:
1- अनधिकृत लेनदेन की तुरंत सूचना दें
अगर आपके खाते से ऐसा कोई लेनदेन हुआ है जो आपने नहीं किया है तो बिना कोई देरी किए तुरंत अपने बैंक को उसके आधिकारिक चैनलों के माध्यम से सूचित करें। आरबीआई के नियमों के मुताबिक अगर ग्राहक बैंक से अलर्ट मिलने के 3 वर्किंग डे के भीतर अनाधिकृत लेनदेन की रिपोर्ट कर देता है तो कई मामलों में ग्राहक की देनदारी शून्य होती है। रिपोर्ट करने में देरी करने पर आपका नुकसान बढ़ सकता है, इसलिए अगले बैंक स्टेटमेंट का इंतजार न करें और तुरंत शिकायत दर्ज कराएं।
2- पैसा रिवर्स करने के लिए लिखित शिकायत दर्ज करें
बैंक को फोन करने के अलावा अपनी शिकायत को लिखित रूप में दर्ज कराना बेहद जरूरी है। आप बैंक के मोबाइल ऐप, ऑनलाइन पोर्टल, ईमेल या नजदीकी बैंक शाखा में जाकर औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज कराएं। इसमें लेनदेन की तारीख, काटी गई राशि और गलती का स्पष्ट कारण दर्ज करें। इसके बाद शिकायत का रेफरेंस नंबर, ईमेल थ्रेड्स, स्क्रीनशॉट और बैंक के जवाबों को संभालकर रखें। जहां आरबीआई के नियम लागू होते हैं, वहां बैंक को सूचना मिलने के 10 वर्किंग डे के भीतर विवादित राशि को अस्थायी रूप से ग्राहक के खाते में जमा करना होता है।
3- फ्रॉड नहीं बल्कि गलत फीस होने पर सबूत मांगें
कई बार मामला फ्रॉड का नहीं, बल्कि गलत फीस का होता है, जैसे बैंक के तय रेट लिस्ट से ज्यादा पैसे काटना। ऐसे में बैंक से कहें कि वह अपने नियमों और शर्तों का हवाला देकर उस चार्ज का स्पष्टीकरण दे और कैलकुलेशन का हिसाब दिखाए। अपने बैंक स्टेटमेंट, फीस शेड्यूल और बैंक से हुई पूरी बातचीत के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखें, क्योंकि एक मजबूत दस्तावेजी फाइल आपके पक्ष को काफी मजबूत बनाती है।
4- ऑम्बड्समैन के पास जाने से पहले बैंक को जवाब देने का समय दें
आरबीआई ऑम्बड्समैन के पास जाने से पहले नियमनुसार सबसे पहले अपने बैंक के समक्ष शिकायत उठाना जरूरी है। 1 जुलाई 2026 से लागू रिजर्व बैंक-इंटीग्रेटेड ओंबड्समैन स्कीम, 2026 वित्तीय संस्थानों द्वारा दी जाने वाली सेवाओं में कमी के खिलाफ पूरी तरह से मुफ्त समाधान की व्यवस्था देती है। अगर बैंक को शिकायत दर्ज कराने के 30 दिनों के भीतर कोई जवाब नहीं मिलता है या आप बैंक के जवाब से असंतुष्ट हैं तब आप लोकपाल का रुख कर सकते हैं।
5- बैंक आपकी मदद न दे तो RBI के पोर्टल पर करें शिकायत
अगर आपका बैंक आपकी समस्या का संतोषजनक समाधान नहीं निकाल पाता है तो आप आरबीआई के कम्प्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम - CMS के जरिए सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से फ्री है। इसके अलावा आरबीआई की हेल्पलाइन नंबर 14448 पर कॉल करके भी शिकायत की स्थिति और पूरी प्रक्रिया के बारे में समझा जा सकता है। 2026 की योजना के तहत दर्ज की जाने वाली शिकायतों को पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा और बैंक की समयसीमा समाप्त होने या जवाब मिलने के बाद तय समय सीमा के अंदर जमा करना होगा।
6- जब तक पैसा वापस न आ जाए, तब तक सतर्क रहें
सिर्फ शिकायत दर्ज करा देने से मामला खत्म नहीं होता। अपने बैंक खाते पर लगातार नजर बनाए रखें कि कहीं कोई अन्य अनियमित कटौती तो नहीं हो रही है और रिफंड की राशि वास्तव में खाते में आई है या नहीं। अगर बैंक ने प्रोविजनल क्रेडिट जारी किया है, तो जब तक मामला आधिकारिक रूप से बंद नहीं हो जाता तब तक सभी सबूतों को संभालकर रखें। भविष्य के लिए अपने खाते में ट्रांजैक्शन अलर्ट चालू रखें और समय-समय पर बैंक स्टेटमेंट चेक करते रहें। कोई भी गलत कटौती चाहे कितनी भी छोटी क्यों न हो, उसे चुनौती जरूर दें और अपने सभी सबूतों को हमेशा व्यवस्थित रखें।