HDFC Mutual Fund ने डिफेंस सेक्टर फंड लॉन्च किया है। इसका नाम HDFC Defense Fund (HDF) है। यह NFO 19 मई को खुला है। यह 2 जून को बंद हो जाएगा। दुनिया के कुछ हिस्सों में तनाव बढ़ा है। ऐसे में इंडिया को अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। इसलिए डिफेंस सेक्टर की रौनक बढ़ी है। इस सेक्टर की कंपनियों को काफी ऑर्डर मिल रहे हैं। इसी मौके का फायदा उठाने के लिए एचडीएफसी म्यूचुअल फंड ने यह स्कीम लॉन्च की है।
HDF अपने फंड का कम से कम 80 फीसदी हिस्से का निवेश डिफेंस और इससे जुड़ी कंपनियों के शेयरों में करेगा। इसमें डिफेंस, एक्सप्लोसिव, शिपबिल्डिंग और एलायड सर्विसेज शामिल हैं। इसमें ऐसी कंपनियां भी आएंगी, जिनके रेवेन्यू में कम से कम 10 फीसदी हिस्सेदारी डिफेंस सेगमेंट की होगी।
इस स्कीम का प्रबंधन अभिषेक पोद्दार करेंगे। इस स्कीम के प्रदर्शन के लिए Nifty India Defense Index TRI बेंचमार्क होगा। इस फंड की इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी का फोकस ग्रोथ और अच्छी वैल्यूएशन पर क्वालिटी शेयरों पर होगा। पिछले कुछ सालों से सरकार कई डिफेंस इक्विपमेंट की मैन्युफैक्चरिंग देश में करना चाहती है, जिनका अब तक आयात होता रहा है।
सरकार लगातार डिफेंस सेक्टर में पूंजीगत निवेश भी बढ़ा रही है। आत्मनिर्भरता के लिए ज्यादा से ज्यादा डिफेंस इक्विपमेंट की मैन्युफैक्चरिंग देश में करने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इससे मुश्किल वक्त में रक्षा से जुड़ी हमारी तैयारी में मदद मिलेगी। साथ ही देश में डिफेंस इक्विपमेंट की मैन्युफैक्चरिंग देश में होने से रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। सरकार उन देशों को डिफेंस इक्विपमेंट का निर्यात भी करना चाहती है, जिनके साथ इंडिया के अच्छे रिश्ते हैं।
एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी के फंड मैनेजर अभिषेक पोद्दार ने कहा, "अभी कुल रेवेन्यू में एक्सपोर्ट की हिस्सेदारी काफी कम है। हथियारों के कुल एक्सपोर्ट्स में भी इंडिया की हिस्सेदारी मुश्किल से 1-2 फीसदी है। हालाकिं, पिछले 8 साल में यह 8 गुना बढ़ा है। R&D पर फोकस बढ़ाने से इंडिया को एक्सपोर्ट के क्षेत्र में मौजूदा संभावनाओं का लाभ उठाने में मदद मिलेगी।"
हालांकि, गेनिंग ग्राउंड इनवेस्टमेंट सर्विसेज के फाउंडर रवि कुमार टीवी ने कहा कि डिफेंस सेक्टर काफी रेगुलेटेड है। इस क्षेत्र में मौजूद कंपनियों का भविष्य बहुत हद तक सरकार की तरफ से होने वाली खरीदारी पर निर्भर करता है। सरकारी पॉलिसी में बदलाव, रक्षा खर्च में कमी और एक्सपोर्ट रेगुलेशंस का असर इस सेक्टर की कंपनियों पर पड़ सकता है।
पोद्दार ने कहा, "सरकार डिफेंस प्रोडक्ट्स की सबसे बड़ी खरीदार है। इससे बायर कंसंट्रेशन रिस्क दिखता है। हालांकि, डिफेंस फोर्सेज को लगातार अपग्रेड और मॉडर्नाइजेशन की जरूरत पड़ती है। इसकी वजह यह है कि पुरानी टेक्नोलॉजी और प्रोडक्ट्स पुराने पड़ जाते है। इस वजह से इस फील्ड में डिमांड लगातार बनी रहती है, जो कंपनियों की ग्रोथ के लिए जरूरी है।" उन्होंने यह भी कहा कि कंपनियां भविष्य में एक्सपोर्ट में उपलब्ध संभावनाओं का फायदा उठाने की कोशिश कर सकती हैं।
अभी डिफेंस के क्षेत्र में लिस्टेंड कंपनियां ज्यादा नहीं हैं। इनवेस्टर्स के अपने पोर्टफोलियो के डायवर्सिफिकेशन के लिए लिस्टेड कंपनियों की संख्या बढ़नी जरूरी है। बीते एक साल में (17 मई, 2023 को) Nifty India Defense Index ने 56 फीसदी रिटर्न दिया है। 28 अप्रैल 2023 को इस बेंचमार्क में 13 कंपनियां शामिल थीं। इनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स भी थी, जिनका एलोकेशन करीब 20-20 फीसदी था। तीसरी सबसे बड़ी कंपनी Solar Industries का एलोकेशन 18 फीसदी था। HDF के यूनिवर्स में कुल 21 कंपनियां हैं। उसे अपना 80 फीसदी फंड इन कंपनियों के शेयरों में निवेश करना होगा।
क्या आपको निवेश करना चाहिए?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आप बीते एक साल के लिए रिटर्न को देख इस सेक्टर में निवेश करना चाहते हैं तो आपको इस फंड में इनवेस्ट नहीं करना चाहिए। अगर आप लंबी अवधि के लिए इनवेस्ट करना चाहते हैं तो इस फंड में पैसे लगा सकते हैं। चूंकि यह सेक्टरोल फंड है, जिससे नए निवेशक को इस फंड के साथ निवेश की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। अगर आपको कई मार्केट साइकिल का अनुभव है और पहले से आपका कोर पोर्टफोलियो है तो आप इस फंड में थोड़ा एलोकेशन कर सकते हैं।
हालांकि, पिछले एक साल में डिफेंस कंपनियों के शेयरों में जितनी तेजी आई है, उसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। अगर आप डिफेंस सेक्टर में मौजूद संभावनाओं का फायदा उठाना चाहते हैं तो भी आपको ज्यादा पैसा इस एनएफओ में नहीं लगाना चाहिए।