Health Insurance Claim Rejection: जब कोई व्यक्ति या उसका परिवार किसी मेडिकल इमरजेंसी से गुजर रहा होता है, तो हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी की तरफ से क्लेम रिजेक्ट होने का नोटिस मिलना किसी बड़े झटके से कम नहीं होता। मानसिक तनाव के साथ-साथ यह आर्थिक रूप से भी तोड़ देता है।
ज्यादातर पॉलिसीधारकों को लगता है कि एक बार क्लेम रिजेक्ट हो गया, तो बात खत्म हो गई और अब कुछ नहीं किया जा सकता। लेकिन असलियत ऐसी नहीं है! क्लेम रिजेक्ट होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपकी पॉलिसी अमान्य या बेकार हो गई है। अगर आप सही कदम उठाएं, तो रिजेक्ट हुआ क्लेम भी पास हो सकता है। आइए समझते हैं कि क्लेम रिजेक्ट होने के बाद आपको तुरंत क्या करना चाहिए।
1. रिजेक्शन लेटर को ध्यान से पढ़ें
बीमा कंपनी जब भी आपका क्लेम खारिज करती है, तो वह एक 'रिजेक्शन लेटर' भेजती है। सबसे पहले शांत दिमाग से उस लेटर में लिखे कारणों को समझें। कंपनी इन वजहों से क्लेम रिजेक्ट कर सकती है:
2. पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स से मिलान करें
कारण पता चलने के बाद, अपनी मूल पॉलिसी के नियमों और शर्तों को निकालें। जांचें कि कंपनी ने जिस नियम का हवाला देकर क्लेम रोका है, क्या वह वाकई आपकी पॉलिसी में लिखा है? कहीं ऐसा तो नहीं कि अस्पताल का कोई मेडिकल रिकॉर्ड, डॉक्टर का पर्चा या कोई बिल सबमिट होने से छूट गया था या उसे और स्पष्ट करने की जरूरत थी?
3. कंपनी से स्पष्टीकरण मांगें
अगर आपको रिजेक्शन लेटर की भाषा या कारण समझ नहीं आ रहा है, तो तुरंत अपनी इंश्योरेंस कंपनी के कस्टमर केयर या क्लेम डिपार्टमेंट से संपर्क करें। उनसे सीधे पूछें कि क्लेम पास होने के लिए किस अतिरिक्त दस्तावेज या स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।
4. बातचीत का पूरा रिकॉर्ड रखें
इंश्योरेंस कंपनी, एजेंट या टीपीए (TPA) के साथ आपकी जो भी बातचीत हो रही है, उसका पूरा लिखित रिकॉर्ड रखें। फोन पर हुई बात की तारीख और समय नोट करें।ईमेल के जरिए संवाद करने को प्राथमिकता दें ताकि आपके पास हर बात का पक्का सबूत रहे। अगर मामला आगे बढ़ता है, तो ये दस्तावेज आपके सबसे बड़े हथियार बनेंगे।
5. विवाद समाधान प्रक्रिया का लें सहारा
अगर आपको पूरा भरोसा है कि कंपनी ने गलत तरीके से आपका क्लेम रिजेक्ट किया है, तो आप कंपनी के इंटरनल ग्रीवेंस सेल के पास अपील कर सकते हैं। सभी आवश्यक मेडिकल प्रूफ, डॉक्टर की चिट्ठी और बिलों को दोबारा सही तरीके से अटैच करके रिव्यू के लिए आवेदन करें। अगर कंपनी फिर भी आपकी बात नहीं सुनती है, तो आप इंश्योरेंस ओम्बुड्समैन यानी बीमा लोकपाल के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
क्लेम रिजेक्ट होने पर तुरंत की गई कार्रवाई और सही कागजी कार्रवाई आपके फंसे हुए पैसे को वापस दिलाने की संभावना को कई गुना बढ़ा देती है। इसलिए इसे अंतिम फैसला मानकर हार न मानें।