सावधान! सिर्फ 2 बीमारियों पर खर्च हो रहे 22% हेल्थ क्लेम, रिपोर्ट में हुआ भारत में बढ़ते मेडिकल खर्चों का बड़ा खुलासा
Medical Inflation In India: कैंसर और दिल के रोगों जैसे गंभीर इलाज का खर्च किस बेकाबू रफ्तार से बढ़ रहा है, इसका बड़ा खुलासा एक हालिया रिपोर्ट में हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि कुल इंश्योरेंस क्लेम का 22% हिस्सा सिर्फ इन्हीं दो बीमारियों पर खर्च हो रहा है, जबकि बुजुर्गों के इलाज का खर्च 2.7 गुना तक बढ़ चुका है। जानिए मेट्रो शहरों में बढ़ते अस्पताल बिलों का पूरा गणित और खुद को इस बड़े वित्तीय संकट से बचाने के तरीके
आंकड़ों के मुताबिक कुल क्लेम्स में से 56% क्लेम 26 से 45 साल के कामकाजी युवाओं द्वारा किए जा रहे हैं
Rising Healthcare Costs in India: देश में इलाज की आधुनिक तकनीकें जितनी तेजी से बढ़ी हैं, उतनी ही तेजी से अस्पताल के बिल भी आम आदमी की जेब खाली कर रहे हैं। आज किसी गंभीर बीमारी में अस्पताल का सिर्फ एक चक्कर ही मध्यमवर्गीय परिवारों की बरसों की मेहनत की कमाई को एक झटके में स्वाहा करने के लिए काफी है। पिछले कुछ सालों में 'मेडिकल महंगाई' जिस बेलगाम रफ्तार से भागी है, उसने यह साफ कर दिया है कि हेल्थ इंश्योरेंस अब केवल एक ऑप्शन नहीं, बल्कि आपकी जेब की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।
इसी बढ़ते मेडिकल खर्च और हेल्थकेयर के बदलते रुझानों को लेकर पॉलिसीबाजार की हालिया रिपोर्ट 'The Cost of Care in India' में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। साल 2021 से 2026 तक के 5 वर्षों के क्लेम डेटा के विश्लेषण पर आधारित यह रिपोर्ट बताती है कि देश में कुल हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम अमाउंट का 22% हिस्सा सिर्फ दो गंभीर बीमारियों कैंसर और दिल के रोगों पर खर्च हो रहा है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बढ़ती उम्र के साथ अस्पताल का बिल लगभग तीन गुना हो जाता है और मेट्रो शहरों में इलाज छोटे शहरों के मुकाबले काफी महंगा हो गया है। आइए समझते हैं इस रिपोर्ट के आंकड़े क्या इशारा कर रहे हैं।
कैंसर और दिल की बीमारियों पर कुल क्लेम का ₹860 करोड़ से ज्यादा खर्च
रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि कैंसर और दिल की बीमारियों के मामलों की संख्या आम मौसमी बीमारियों से कम है, लेकिन इलाज महंगा होने के कारण वित्तीय बोझ सबसे ज्यादा इन्हीं पर पड़ रहा है।
कैंसर और ट्यूमर: कुल इंश्योरेंस क्लेम की रकम का 12% हिस्सा अकेले कैंसर के इलाज पर खर्च होता है। कैंसर का औसतन एक क्लेम ₹5.55 लाख का बैठता है।
हृदय रोग, बीपी और स्ट्रोक: क्लेम की कुल रकम में 10% हिस्सा दिल से जुड़ी बीमारियों का है। दिल की बीमारी का औसतन क्लेम ₹2.08 लाख है।
दोनों बीमारियों ने मिलकर अध्ययन अवधि के दौरान ₹860 करोड़ से अधिक के क्लेम जनरेट किए।
ब्रेस्ट कैंसर का क्लेम सबसे महंगा
महिलाओं के स्वास्थ्य क्लेम में केवल मैटरनिटी ही नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों का खर्च तेजी से बढ़ा है। प्रमुख बीमारियों में ब्रेस्ट कैंसर का औसत क्लेम सबसे महंगा दर्ज हुआ, जो ₹7.50 लाख प्रति क्लेम है। 5 सालों में ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के लिए करीब ₹99 करोड़ के क्लेम का भुगतान किया गया। साथ ही महिलाओं के कुल स्वास्थ्य क्लेम में 29% हिस्सा रीप्रोडक्टिव हेल्थ डिसऑर्डर का रहा।
उम्र बढ़ने के साथ 2.7 गुना बढ़ता है अस्पताल का खर्च
रिपोर्ट में पाया गया कि युवाओं के मुकाबले 60 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के इलाज पर काफी ज्यादा खर्च होता है। उम्र के हिसाब से औसत अस्पताल का खर्च:
0–25 वर्ष: ₹65,124
26–35 वर्ष: ₹70,664
36–45 वर्ष: ₹93,204
46–60 वर्ष: ₹1.39 लाख
60+ वर्ष: ₹1.77 लाख (25 साल से कम उम्र के मुकाबले 2.7 गुना अधिक)
कम उम्र के लोग इन्फेक्शन, चोट या मैटरनिटी के लिए एडमिट होते हैं, जबकि बुजुर्गों को कैंसर, किडनी, और कार्डियक जैसी गंभीर और लंबे इलाज वाली बीमारियों के लिए भर्ती होना पड़ता है।
कामकाजी वर्ग (26-45 वर्ष) सबसे ज्यादा ले रहा क्लेम
एक आम धारणा है कि इंश्योरेंस का इस्तेमाल बुजुर्ग ज्यादा करते हैं, लेकिन आंकड़ों के मुताबिक कुल क्लेम्स में से 56% क्लेम 26 से 45 साल के कामकाजी युवाओं द्वारा किए जा रहे हैं। इस उम्र में करियर और परिवार संभालने के साथ-साथ खराब लाइफस्टाइल और हादसों के कारण अस्पताल में भर्ती होने की दर बढ़ी है।
मेडिकल खर्च के हिसाब से देश के टॉप शहरों में मुंबई नंबर 1
मेट्रो शहरों में इलाज की लागत छोटे शहरों से काफी अधिक है। टियर-1 (बड़े शहरों) में औसत क्लेम ₹1.73 लाख है, जो टियर-3 शहरों (₹1.20 लाख) की तुलना में 44% अधिक है। मुंबई में औसत अस्पताल बिल सबसे ज्यादा ₹1.92 लाख दर्ज किया गया। इसके बाद बेंगलुरु (₹1.72 लाख) और दिल्ली (₹1.65 लाख) का नंबर आता है।
बिल में सबसे बड़ा हिस्सा सर्जरी का
गंभीर बीमारियों के अस्पताल बिलों में कमरे के किराए से ज्यादा खर्च प्रक्रियाओं पर होता है। हड्डियों और मांसपेशियों के इलाज में बिल का 43% हिस्सा सर्जरी पर खर्च होता है। कैंसर के मामले में 32% सर्जरी और 16% दवाओं का खर्च होता है, जबकि दिल की बीमारियों में आईसीयू और देखभाल जैसे 25% विविध खर्च शामिल होते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार कैंसर का इलाज सालाना 10–14% की दर से महंगा हो रहा है, जबकि दिल और हड्डियों का इलाज 6–10% सालाना महंगा हो रहा है। पॉलिसीबाजार के हेल्थ इंश्योरेंस हेड सिद्धार्थ सिंघल के मुताबिक, देश में मेडिकल टेक्नोलॉजी और जटिल बीमारियों के इलाज की क्षमता तो बढ़ी है, लेकिन उसके साथ वित्तीय जोखिम भी बढ़ा है। ऐसे में लोगों को समय-समय पर अपने हेल्थ इंश्योरेंस कवर की समीक्षा करना बेहद जरूरी हो गया है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।