Home Loan: घर खरीदना हर परिवार का बड़ा सपना होता है और इस सपने को पूरा करने के लिए ज्यादातर लोग होम लोन लेते हैं। लेकिन लोन लेते समय होमबायर्सओं के सामने एक अहम फैसला होता है कि फिक्स्ड ब्याज दर चुनें या फ्लोटिंग ब्याज दर? अक्सर बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां दोनों विकल्प पेश करती हैं, लेकिन सही जानकारी नहीं होने पर ग्राहक परेशान होने लगते हैं। गलत चुनाव करने पर होमबायर्स पर फ्यूचर में EMI का बोझ बढ़ने का डर रहता है।
होमबायर्स के लिए फिक्स्ड रेट कितना सेफ?
फिक्स्ड रेट होम लोन में ब्याज दर एक तय पीरियड तक नहीं बदलता। इसका सीधा फायदा यह है कि EMI हर महीने समान रहती है। इससे होमबायर्स को यह भरोसा रहता है कि बाजार में चाहे ब्याज दरें बढ़ें, उसकी जेब पर अचानक असर नहीं पड़ेगा। यह विकल्प खासतौर पर उन होमबायर्सओं के लिए सुरक्षित माना जाता है जो पहली बार घर खरीद रहे हैं या जिनकी सैलरी सीमित है। या जिनके लिए EMI बढ़ना बड़ा जोखिम हो सकता है। हालांकि, होमबायर्सओं को यह भी समझना चाहिए कि फिक्स्ड रेट आमतौर पर फ्लोटिंग रेट से थोड़ा ज्यादा होता है। साथ ही, अगर कोई बीच में लोन शिफ्ट करना चाहता है तो चार्ज या पेनाल्टी लग सकती है।
फ्लोटिंग रेट: सस्ता दिखता है, लेकिन जोखिम भी
फ्लोटिंग रेट होम लोन बाजार और RBI की नीतियों से जुड़ा होता है। शुरुआत में इसकी ब्याज दर कम होती है, जिससे EMI भी कम रहती है। जब ब्याज दरें घटती हैं, तो इसका फायदा सीधे होमबायर्स को मिलता है। लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है अगर दरें बढ़ीं तो EMI अचानक बढ़ सकती है, जिससे मंथली खर्च बिगड़ सकता है।
यह विकल्प उन होमबायर्सओं के लिए बेहतर हो सकता है जिनकी इनकम स्थिर और ज्यादा है। जो EMI में उतार-चढ़ाव झेल सकते हैं। वो लोग लोन जल्दी चुकाने की योजना रखते हैं। सिर्फ ब्याज दर न देखें, अपनी स्थिति को समझें और उसके बाद फैसला लें।
होमबायर्स एक्सपर्ट का कहना है कि सिर्फ कम ब्याज देखकर फैसला लेना गलत हो सकता है। सही फैसला लेने के लिए इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है।
कुछ होमबायर्स हाइब्रिड होम लोन भी चुनते हैं, जिसमें शुरुआत में फिक्स्ड रेट और बाद में फ्लोटिंग रेट होता है। यह उन लोगों के लिए बैलेंस विकल्प हो सकता है जो जोखिम भी नहीं लेना चाहते और पूरी तरह फिक्स्ड में फंसना भी नहीं चाहते।