कंपाउंडिंग इंटरेस्ट आपको बना सकता है सुपर रिच, जानिए कैसे काम करता है ये फॉर्मूला

Compounding Interest: कंपाउंडिंग समय के साथ ब्याज पर ब्याज कमाने का एक तरीका है। इसका मतलब यह है कि आप जो ब्याज कमा रहे हैं, उसे आपके प्रिंसिपल अमाउंट से जोड़ दिया जाता है और फिर ब्याज का कैलकुलेशन होता है। अब नए प्रिंसिपल अमाउंट यानी प्रिंसिपल प्लस ब्याज के पैसे पर ब्याज कैलकुलेट किया जाता है

अपडेटेड Apr 19, 2023 पर 5:21 PM
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Compounding Interest: कंपाउंडिंग इंटरेस्ट समय के साथ ब्याज पर ब्याज कमाने का एक तरीका है।

Compounding Interest: कंपाउंडिंग समय के साथ ब्याज पर ब्याज कमाने का एक तरीका है। इसका मतलब यह है कि आप जो ब्याज कमा रहे हैं, उसे आपके प्रिंसिपल अमाउंट से जोड़ दिया जाता है और फिर ब्याज का कैलकुलेशन होता है। अब नए प्रिंसिपल अमाउंट यानी प्रिंसिपल प्लस ब्याज के पैसे पर ब्याज कैलकुलेट किया जाता है।  इसे चक्रवृद्धि ब्याज यानी कंपाउंडिंग इंटरेस्ट कहते हैं, जिसमें ब्याज आपके प्रिंसिपल के साथ हर बार जुड़ता है। कंपाउंडिंड इंटरेस्ट का ये फॉर्मूला आपको कम सयम में सुपर रिच बना सकता है। आपका पैसा चक्रवृद्धि ब्याज के लिए जितना अधिक समय तक छोड़ा जाता है, उसका असर यानी रिटर्न उतना ज्यादा होता है।

आइए जानते हैं क्या होता है चक्रवृद्धि ब्याज (What is Compounding Interest)

चक्रवृद्धि ब्याज के कई निवेश के विकल्प मार्केट में है जिसमें पैसा लगाने से कमाई की उम्मीद बढ़ जाती है। यहां तक कि कम अमाउंट भी एसआईपी, पीपीएफ में निवेश का अच्छा विकल्प बन सकता है। इससे पैसे का एक अच्छा पूल बन सकता है। हालांकि, जब हम पैसे बचाने और उस पर ब्याज कमाने के बारे में बात कर रहे हैं, तो उसमें इससे फर्क पड़ता है कि चक्रवृद्धि ब्याज कैसे कैलकुलेट किया जा रहा है। चक्रवृद्धि ब्याज को 'ब्याज पर ब्याज' के तौर पर भी जाना जाता है। इसमें ब्याज को हर बार आपके प्रिंसिपल अमाउंट में जोड़ दिया जाता है।


यहां कमा सकते हैं ज्यादा पैसा

इक्विटी मार्केट के साथ-साथ सरकार कई कंपाउंडिंग बेस्ड इंटरेस्ट कैलकुलेशन पर काम करती हैं। इक्विटी मार्केट के अंदर म्युचुअल फंड, पीपाएफ में लंबे समय के लिए निवेश कर संपत्ति बनाने में मदद कर सकते हैं। बशर्ते कि आपके निवेश के फैसले समय पर लिये गए हों।

कंपाउंडिंग इंटरेस्ट कैसे काम करता है?

उदाहरण के लिए, मान लें कि आप बचत खाते में 1,000 रुपये का निवेश करते हैं, जिस पर सालाना 5% ब्याज मिलता है। पहले साल के बाद आपने ब्याज में 50 रुपये कमाए होंगे, जिससे आपका कुल टोटल 1,050 रुपये हो जाएगा। दूसरे साल में आप न केवल अपने मूल 1,000 रुपये पर ब्याज कमाएंगे बल्कि ब्याज पर भी ब्याज कमाएंगे। यानी, 50 रुपये एक्स्ट्रा पर भी ब्याज कमाएंगे। तो दूसरे साल के आखिर में आपके पास 1,102.50 रुपये होंगे। फिर आपको 1,102 रुपये पर ब्याज मिलेगा। इस तरीके से आपका कंपाउंडिंग इंटरेस्ट यानी चक्रवृद्धि ब्याज काम करेगा।

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