Income Tax Refund: 63 लाख ITR अभी भी नहीं हुए प्रोसेस, जानिए रिफंड मिलने में क्यों हो रही देरी?

Income Tax Refund: 31 दिसंबर की डेडलाइन के बाद भी 63 लाख ITR प्रोसेस नहीं हुए हैं। इससे रिफंड में देरी हो रही है। जानिए इस बार रिफंड मिलने में क्यों देरी हो रही और अब टैक्सपेयर्स को क्या करना चाहिए।

अपडेटेड Jan 06, 2026 पर 3:15 PM
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टैक्स रिफंड में देरी की वजह सिस्टम की खराबी नहीं, बल्कि सख्त जांच और रिस्क-बेस्ड प्रोसेसिंग है।

Income Tax Refund: 31 दिसंबर की डेडलाइन निकलने के बाद भी बड़ी संख्या में टैक्सपेयर्स अपने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) के प्रोसेस होने का इंतजार कर रहे हैं। कई लोगों के रिफंड अब तक नहीं आए हैं, जिससे चिंता बढ़ी हुई है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के आंकड़ों के मुताबिक, असेसमेंट ईयर 2025–26 के लिए अब तक करीब 8.80 करोड़ ITR फाइल किए जा चुके हैं। इनमें से 8.66 करोड़ रिटर्न वेरिफाई हो चुके हैं और 8.02 करोड़ रिटर्न प्रोसेस भी कर दिए गए हैं। यानी करीब 63 लाख रिटर्न अब भी प्रोसेसिंग में हैं और इनके रिफंड रुके हुए हैं।

क्या रिफंड में देरी परेशानी की बात है?


टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रिफंड में यह देरी असामान्य नहीं है। इनकम टैक्स कानून के तहत सेंट्रलाइज्ड प्रोसेसिंग सेंटर (CPC) को रिटर्न प्रोसेस करने के लिए फाइनेंशियल ईयर खत्म होने के बाद 9 महीने तक का समय मिलता है।

AY 2025-26 के मामलों में इसका मतलब है कि विभाग के पास 31 दिसंबर 2026 तक का समय है। चूंकि, 90 प्रतिशत से ज्यादा वेरिफाई रिटर्न पहले ही प्रोसेस हो चुके हैं, इसलिए मौजूदा पेंडेंसी कानून के दायरे में ही है।

इस साल रिफंड क्यों ज्यादा अटके हैं

एक्सपर्ट का कहना है कि देरी की वजह सिस्टम की खराबी नहीं, बल्कि सख्त जांच और रिस्क-बेस्ड प्रोसेसिंग है। अब इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास कई तरह का थर्ड-पार्टी डेटा मौजूद है। जैसे कि TDS रिटर्न, AIS, फॉर्म 26AS, बैंक और म्यूचुअल फंड ट्रांजैक्शन, SFT रिपोर्ट्स।

अगर रिटर्न में दी गई जानकारी इन डेटा से पूरी तरह मेल नहीं खाती, तो रिटर्न अपने आप फ्लैग हो जाता है और प्रोसेसिंग रुक जाती है।

‘नज’ कैंपेन से भी बढ़ी देरी

देरी की एक बड़ी वजह CBDT का 'नज' कैंपेन (nudge campaign) भी है, जिसे दिसंबर 2025 में शुरू किया गया था। इसके तहत जिन टैक्सपेयर्स के रिटर्न में डेटा मिसमैच पाया जाता है, उन्हें पहले SMS या ईमेल के जरिए बताया जाता है।

टैक्सपेयर्स को गलती स्वीकार करने या रिवाइज्ड या अपडेटेड रिटर्न फाइल करने का मौका दिया जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब तक टैक्सपेयर जरूरी सुधार नहीं करता, तब तक विभाग जानबूझकर रिटर्न की प्रोसेसिंग रोक कर रखता है।

बैकएंड बदलाव भी वजह

इस साल कुछ तकनीकी और ऑपरेशनल कारणों से भी देरी हुई है। AY 2025-26 के लिए कई ITR फॉर्म और यूटिलिटीज सामान्य से देर से, यानी जून से अगस्त के बीच जारी किए गए। इससे फाइलिंग और प्रोसेसिंग दोनों प्रभावित हुईं।

इसके अलावा, डेडलाइन के आसपास पोर्टल पर भारी ट्रैफिक के कारण लॉगइन और टाइम-आउट जैसी दिक्कतें भी आईं।

क्या देरी से रिफंड पर ब्याज मिलेगा

हां, लेकिन शर्तों के साथ। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 244A के तहत देरी से मिलने वाले रिफंड पर ब्याज का प्रावधान है। लेकिन, कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

  • देरी होने पर टैक्सपेयर्स को 0.5 प्रतिशत प्रति माह ब्याज दर पर रिफंड के पैसे मिलेंगे।
  • रिफंड रकम ₹100 या कुल टैक्स का 10 प्रतिशत, जो भी ज्यादा हो, उससे अधिक होनी चाहिए।
  • समय पर फाइल किए गए रिटर्न में ब्याज 1 अप्रैल से रिफंड मिलने तक मिलता है।
  • लेट रिटर्न में ब्याज फाइलिंग की तारीख से गिना जाता है।
  • उदाहरण के लिए, अगर ₹40,000 का रिफंड आठ महीने लेट होता है, तो ब्याज ₹1,600 बनेगा।

रिफंड अटका है, क्या करें टैक्सपेयर्स

  • AIS और फॉर्म 26AS नियमित रूप से जांचें।
  • विभाग से आए SMS और ईमेल का समय पर जवाब दें।
  • गलती हो तो रिवाइज्ड या अपडेटेड रिटर्न फाइल करें।
  • घबराएं नहीं, ज्यादातर देरी कंप्लायंस की वजह से होती है।

ज्यादातर मामलों में रिफंड इसलिए नहीं रुका है क्योंकि टैक्सपेयर ने कुछ गलत किया है, बल्कि इसलिए कि विभाग पहले पूरी तरह साफ और सही डेटा चाहता है। अगर आप पात्र हैं, तो आप रिफंड मिलेगा। भले ही इसमें थोड़ी देर हो जाए।

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