PM Kisan Samman Nidhi: पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाले सालाना ₹6000 रुपये को लेकर अक्सर कई तरह के सवाल उठते हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि इतनी छोटी रकम से किसानों का क्या फायदा होता होगा? लेकिन अब विभिन्न रिसर्च और सरकारी रिपोर्टों से एक बेहद दिलचस्प बात सामने आई है। इस सरकारी मदद ने देश के अन्नदाताओं की किस्मत बदलने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
यह योजना साल 2019 से देश के किसानों के सशक्तिकरण का एक बड़ा जरिया बनी है। आइए जानते हैं कि देश के करोड़ों किसान इस राशि का इस्तेमाल आखिर कहां और कैसे कर रहे हैं।
मौज-मस्ती नहीं, खेती में हो रहा है निवेश
रिसर्च और ग्राउंड स्टडीज से ये बात निकलकर आई है कि अधिकांश पीएम-किसान लाभार्थी इस सहायता राशि का उपयोग किसी गैर-जरूरी काम में नहीं, बल्कि सीधे खेती से जुड़े उत्पादक निवेशों के लिए कर रहे हैं। किसान इन पैसों का इस्तेमाल मुख्य रूप से इन जरूरी चीजों को खरीदने में करते हैं:
उन्नत किस्म के बीज: सीजन की शुरुआत में अच्छी क्वालिटी के बीज खरीदने के लिए नकदी की जरूरत होती है, जिसे यह फंड पूरा करता है।
उर्वरक और कीटनाशक: खेतों में सही समय पर खाद और कीटनाशक डालने के लिए किसान इस राशि का उपयोग करते हैं।
कृषि उपकरण और जुताई: छोटे किसान ट्रैक्टर की बुकिंग या अन्य कृषि उपकरणों के किराए के लिए इन पैसों का इस्तेमाल तुरंत कर पाते हैं।
2014 से पहले के संघर्ष बनाम 2019 के बाद का सशक्तिकरण
भारतीय कृषि और किसानों की स्थिति में एक बहुत बड़ा 'आइडेंटिटी ट्रांजिशन' यानी पहचान में बदलाव आया है। 2014 से पहले के दौर में किसानों के लिए कोई डायरेक्ट इनकम सपोर्ट नहीं था। पैसों की जरूरत पड़ने पर किसान पूरी तरह से अनौपचारिक साहूकारों पर निर्भर रहते थे, जो उनसे भारी ब्याज वसूलते थे। इसके अलावा सरकारी योजनाओं में बिचौलियों का भी पूरा बोलबाला था।
साल 2019 से पीएम-किसान योजना के तहत हर साल किसानों को ₹6000 की सीधी सालाना सहायता दी जा रही है। सबसे खास बात यह है कि यह पैसा बिना किसी बिचौलिए के सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में पहुंचता है। रिपोर्ट के अनुसार, 22 किस्तों के जरिए अब तक ₹4.27 लाख करोड़ से अधिक की राशि सीधे किसानों को ट्रांसफर की जा चुकी है।
साहूकारों के कर्जजाल से मिली मुक्ति, किसान बन रहे आत्मनिर्भर
इस योजना का सबसे बड़ा सामाजिक और आर्थिक प्रभाव यह पड़ा है कि छोटे और सीमांत किसानों को अब बुवाई के समय स्थानीय साहूकारों के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता। समय पर ₹2000 की किस्त मिलने से उन्हें तुरंत खाद-बीज मिल जाता है, जिससे उनकी फसल चक्र की गाड़ी बिना रुके चलती रहती है। यह पहल देश के किसानों को न सिर्फ समृद्ध बना रही है, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान के साथ आत्मनिर्भर बनने की ताकत भी दे रही है।