ITR फाइल करने वालों की चांदी! सिर्फ 7 दिनों में आ रहा है टैक्स रिफंड, अगर आपका अटका है, तो तुरंत करें ये काम

How Many Days to Get ITR Refund: स बार टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से रिफंड जारी करने की रफ्तार पहले से कहीं ज्यादा तेज हो चुकी है। जो रिफंड पहले महीनों के लंबे इंतजार के बाद बैंक खाते में आता था, वह अब कई करदाताओं को सिर्फ 7 से 10 वर्किंग डेज के भीतर मिल रहा है। जानिए कौन सी है वो 4 गलतियां जिनकी वजह से आपका रिफंड फंस सकता है

अपडेटेड Jun 25, 2026 पर 9:44 AM
जो रिफंड पहले महीनों के लंबे इंतजार के बाद बैंक खाते में आता था, वह अब कई करदाताओं को सिर्फ 7 से 10 वर्किंग डेज के भीतर मिल रहा है

Income Tax Refund Status: अगर आपने इस साल अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल कर दिया है, तो आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी है। इस बार टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से रिफंड जारी करने की रफ्तार पहले से कहीं ज्यादा तेज हो चुकी है। जो रिफंड पहले महीनों के लंबे इंतजार के बाद बैंक खाते में आता था, वह अब कई करदाताओं को सिर्फ 7 से 10 वर्किंग डेज के भीतर मिल रहा है।

हालांकि, जिन मामलों में डेटा का मिलान सही नहीं है या टैक्स कैलकुलेशन थोड़ी पेचीदा है, वहां रिफंड आने में अभी भी 4 से 5 हफ्ते या एक महीने तक का समय लग सकता है। आइए जानते हैं कौन सी है वो 4 गलतियां जिनकी वजह से आपका रिफंड फंस सकता है।

आखिर क्यों इतनी जल्दी आ रहा है रिफंड?


इनकम टैक्स विभाग का बैकएंड सिस्टम पिछले कुछ सालों में बेहद आधुनिक और हाई-टेक हो चुका है। रिफंड की इस रफ्तार के पीछे पूरा खेल टेक्नोलॉजी का है:

डेटा का ऑटोमेटेड मिलान: अब विभाग का सिस्टम आपके द्वारा फाइल किए गए रिटर्न का मिलान आपके AIS और TDS के डेटा से सीधे कर लेता है।

रीयल-टाइम इंटीग्रेशन: टैक्स विभाग का सिस्टम बैंकों, कंपनियों, ब्रोकर्स और अन्य रिपोर्टिंग संस्थाओं से सीधे रीयल-टाइम डेटा लेता है। अगर आपके आंकड़े और सरकारी रिकॉर्ड बिल्कुल मैच कर रहे हैं, तो सिस्टम तुरंत रिफंड को हरी झंडी दे देता है।

वैसे यहां ये बात ध्यान देना जरूरी है कि, रिफंड प्रोसेसिंग की प्रक्रिया केवल तभी शुरू होती है, जब टैक्सपेयर अपने भरे हुए रिटर्न को ई-वेरिफाई कर देता है। इसलिए बिना देरी किए ई-वेरिफिकेशन तुरंत पूरा करें।

इन 4 गलतियों के कारण फंस सकता है आपका रिफंड

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सिस्टम जितना तेज हुआ है, वह उतना ही डेटा को लेकर संवेदनशील भी हो गया है। छोटी सी भी गड़बड़ी रिफंड को रोक सकती है। रिफंड अटकने की मुख्य वजहें निम्नलिखित हैं:

AIS और TDS का मिसमैच: अगर आपके बताए गए आंकड़ों और AIS/Form 26AS के आधिकारिक रिकॉर्ड में जरा सा भी अंतर मिला, तो आपका रिफंड रुक जाएगा।

बैंक अकाउंट डिटेल्स में गड़बड़ी: अगर आपने गलत बैंक खाता नंबर दिया है या आपका खाता वैलिडेट नहीं है, तो रिफंड फेल हो जाएगा।

कैपिटल गेन्स और विदेशी आय: शेयर बाजार/प्रॉपर्टी से हुई कमाई की गलत रिपोर्टिंग या विदेशी आय का खुलासा न करना भी बड़ी वजह है।

रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क में फंसना: अगर आपके रिटर्न में कोई संदिग्ध क्लेम या टैक्स चोरी की आशंका दिखती है, तो विभाग का ऑटोमेटेड रिस्क फिल्टर उसे अतिरिक्त जांच के लिए अलग रख देता है।

अगर अभी तक रिफंड नहीं आया, तो क्या करें?

अगर आपको ई-वेरिफिकेशन किए हुए लंबा समय हो गया है और रिफंड खाते में नहीं आया, तो इन स्टेप्स को तुरंत फॉलो करें:

ई-फाइलिंग पोर्टल चेक करें: इनकम टैक्स विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर लॉग-इन करें और अपना Refund Status चेक करें।

ईमेल और इंटिमेशन नोटिस देखें: अपने रजिस्टर्ड ईमेल आईडी को चेक करें कि कहीं विभाग की तरफ से डेटा मिसमैच को लेकर कोई Intimation Notice या मेल तो नहीं आया है।

रिफंड री-इश्यू रिक्वेस्ट: अगर बैंक खाता गलत होने की वजह से रिफंड फेल हुआ है, तो पोर्टल पर जाकर सही बैंक अकाउंट वैलिडेट करें और रिफंड री-इश्यू की रिक्वेस्ट डालें। इसके बाद 7 से 10 दिनों में पैसा खाते में आ जाता है।

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