Percentage of Indians Earning: भारत में जब भी कोई व्यक्ति नौकरी या बिजनेस शुरू करता है, तो शुरुआती दौर में 'महीने की ₹1 लाख सैलरी' एक बड़ा ड्रीम फिगर होती है। मिडिल क्लास परिवारों में ₹1 लाख महीना कमाने वाले को बेहद सफल और अमीर माना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 145 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले इस देश में असल में कितने प्रतिशत लोग हर महीने ₹1 लाख या उससे ज्यादा कमा पाते हैं?
विभिन्न डेटा और आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट जो आंकड़े पेश करती हैं, वे आपको चौंका सकती हैं। अगर आप महीने का ₹1 लाख कमा रहे हैं, तो आप देश की आम आबादी का हिस्सा नहीं, बल्कि भारत के सबसे एलीट 'टॉप क्लास' क्लब में शामिल हैं। आइए आंकड़ों के जरिए समझते हैं कि कमाई के मामले में आप देश में कहां खड़े हैं।
सिर्फ इतने लोग कमाते हैं ₹1 लाख
भारत में लोगों की सटीक कमाई का डेटा मुख्य रूप से दो जगहों से मिलता है- पहला इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) के आंकड़ों से और दूसरा पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) से।
इनकम टैक्स के आंकड़े: आयकर विभाग के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, भारत में कुल वर्कफोर्स यानी कामकाजी आबादी करीब 60 करोड़ है, जिसमें से केवल 8 से 9 करोड़ लोग ही इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते हैं। इस डेटा के विश्लेषण से पता चलता है कि देश में सालाना ₹10 लाख से अधिक यानी करीब ₹80000 से ₹1 लाख महीना की टैक्सेबल इनकम घोषित करने वाले लोग कुल आबादी का 3% से भी कम हैं।
लेबर फोर्स सर्वे का डेटा: सरकारी पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) और पीपुल्स रिसर्च ऑन इंडियाज कंज्यूमर इकॉनमी (PRICE) की रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में एक नियमित वेतन पाने वाले कर्मचारी की औसत मासिक आय महज ₹21285 के आसपास है। इस बड़े अंतर से साफ है कि ₹1 लाख प्रति माह की आय देश के बहुत छोटे हिस्से तक सीमित है।
जानिए आप किस 'प्रतिशत' में आते हैं
विश्व असमानता लैब और भारत के आर्थिक थिंक-टैंक्स की रिपोर्ट के आधार पर भारतीय समाज की कमाई का एक ढांचा तैयार किया गया है। आप अपनी सैलरी के हिसाब से देख सकते हैं कि आप किस पायदान पर हैं:
यानी, अगर आपकी व्यक्तिगत मासिक आय ₹1 लाख या उससे अधिक है, तो आप देश के उन शीर्ष 2 प्रतिशत भाग्यशाली और मेहनती लोगों में शामिल हैं, जो बाकी 98 प्रतिशत आबादी से ज्यादा कमा रहे हैं।
महीने में ₹1 लाख कमाने वाले लोग रहते कहां हैं?
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ऐसे परिवार जिनकी मासिक आय ₹1 लाख या उससे अधिक है, उनकी संख्या लगभग 55 लाख से 60 लाख परिवारों के बीच है। यह पूरी आबादी का एक बहुत छोटा हिस्सा है और इनमें से अधिकांश लोग देश के टियर-1 या मेट्रो शहरों में रहते हैं। इस एलीट क्लास की सबसे बड़ी आबादी मुंबई, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद, चेन्नई और चंडीगढ़ जैसे आर्थिक और आईटी हब्स में केंद्रित है।
भारत में क्यों है यह बड़ा अंतर?
आर्थिक विशेषज्ञों और वरिष्ठ अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, भारत में कृषि क्षेत्र और असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों की संख्या बहुत बड़ी है, जहां औसत आय काफी कम होती है। देश की लगभग आधी कामकाजी आबादी आज भी औसतन ₹10000 से ₹15000 प्रति माह ही कमा पाती है। यही कारण है कि कॉर्पोरेट सेक्टर, आईटी, बैंकिंग, सीनियर कंसल्टिंग या बड़े बिजनेस से हर महीने ₹1 लाख कमाने वाले लोग देश के टॉप 2% वेल्थ क्रिएटर्स की श्रेणी में आ जाते हैं।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।