Gold Hallmarking: केंद्र सरकार के नए आदेश के मुताबिक आज 16 जून से सोने पर हॉलमार्किंग अनिवार्य हो गई है। यानी अब ज्वैलर्स बिना हॉलमार्किंग वाले सोने की ज्वैलरी नहीं बेच पाएंगे। सोने पर हॉलमार्किंग का नियम पूरे देश में चरणबद्ध तरीके लागू किया जाएगा। शुरुआत में देश के 256 जिलों में इसे लागू किया जाएगा। ऐसे में अगर आप भी हॉलमार्क गोल्ड ज्वैलरी खरीदने का प्लान कर रहे हैं तो आपके लिए ये जानना जरूरी है कि उस पर छपे मार्क सही हैं या नहीं।
ज्वैलर्स कई बार अपने बनाए हालमार्क निशान भी ज्वैलरी पर लगा देते हैं। आपको ऐसी ज्वैलरी खरीदने से बचना होगा। ऐसे निशानों को डब्बा हॉलमार्किंग भी कहते हैं। आप इन तरीकों से पता कर सकते हैं कि ज्वैलरी के यह निशान असली हैं या नकली..
1- हॉलमार्क के निशानों की जाँच करें जिसमें तीन चीजें शामिल हैं – पहला- बीआईएस (BIS - भारतीय मानक ब्यूरो) चिह्न एक त्रिकोण द्वारा दर्शाया जाता है, दूसरा- कैरेट (22K915) शुद्धता को दर्शाता है। तीसरा- ज्वैलर का चिह्न और AHC का होता है । AHC जहां ज्वैलरी की हॉलमार्किंग हुई है।
2- आप ज्वैलर को BIS लाइसेंस मांग सकते हो। बीआईएस नियमों के मुताबिक ज्वैलर्स को अपना लाइसेंस सामने की ओर या गेट या दरवाजे पर लगाना होता है। आप चेक कर लीजिए कि लाइसेंस स्लिप पर दिया एड्रेस और स्टोर का एड्रेस एक है या नहीं।
4- आप ज्वैलरी को हॉलमार्किंग लैब में स्वयं फीस भरकर जांच करा सकते हैं। BIS की वेबसाइट पर हॉलमार्किंग सेंटर्स की लिस्ट मिल जाएगी। इसमें कैंसल हुए AHC का नाम भी मिल जाएगा। जांच के बाद AHC सोने की प्योरिटी की पूरी जानकारी देगा।
5- रिपोर्ट के साथ आप ज्वैलर के पास शिकायत कर सकते हैं। ज्वैलर प्योरिटी के लिए जिम्मेदार होता है और ऐसे में नुकसान की भरपाई करने की जिम्मेदारी उसकी होगी।