Health Insurance Lapsed: अगर आपकी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लैप्स हो गई है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कई मामलों में इसे दोबारा चालू यानी रिवाइव किया जा सकता है, लेकिन इसमें टाइम बहुत अहम होता है। देरी करने पर आपको कुछ जरूरी फायदे खोने पड़ सकते हैं।
Health Insurance Lapsed: अगर आपकी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लैप्स हो गई है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। कई मामलों में इसे दोबारा चालू यानी रिवाइव किया जा सकता है, लेकिन इसमें टाइम बहुत अहम होता है। देरी करने पर आपको कुछ जरूरी फायदे खोने पड़ सकते हैं।
पॉलिसी रिन्यू करने के लिए मिलता है 30 दिन का ग्रेस पीरियड
आमतौर पर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में प्रीमियम की तय तारीख के बाद 15 से 30 दिन का ग्रेस पीरियड मिलता है। इस दौरान पॉलिसी एक्टिव रहती है और आप बिना किसी पेनल्टी के प्रीमियम जमा कर सकते हैं। हालांकि, इस दौरान किए गए क्लेम कई बार स्वीकार नहीं किए जाते, इसलिए इसे पूरी तरह सुरक्षित पीरियड नहीं माना जाता है।
ग्रेस पीरियड निकलने पर क्या करें?
अगर ग्रेस पीरियड भी निकल गया है, तो तुरंत अपनी इंश्योरेंस कंपनी से संपर्क करना चाहिए। कई कंपनियां पॉलिसी लैप्स होने के 30 से 90 दिनों के भीतर रिवाइवल की सर्विस देती हैं, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें लागू होती हैं। जैसे कि आपको बकाया प्रीमियम के साथ ब्याज देना पड़ सकता है या हेल्थ डिक्लेरेशन जमा करना पड़ सकता है।
खत्म हो सकता है वेटिंग पीरियड
कुछ मामलों में मेडिकल टेस्ट भी कराना पड़ सकता है और इंश्योरर की मंजूरी जरूरी होती है। अगर पॉलिसी लंबे समय तक बंद रही है, तो पहले से मिली सर्विस जैसे वेटिंग पीरियड का फायदा खत्म हो सकता है। जैसे प्रेगनेंसी के लिए कई पॉलिसी में एक साल से तीन का वेटिंग पीरियड होत है। यानी, इस दौरान इंश्योरेंस कंपनी आपको हॉस्पिटल बिल का पैसा नहीं देगी।
वेटिंग पीरियड
एक्सपर्ट का कहना है कि लैप्स पॉलिसी को दोबारा चालू करना आसान प्रोसेस नहीं है। इसमें नई अंडरराइटिंग हो सकती है और पहले से मौजूद बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड फिर से लागू हो सकता है। इसलिए पॉलिसीहोल्डर्स को सलाह दी जाती है कि वे ग्रेस पीरियड को सिर्फ एक मौका मानें, न कि एक्स्ट्रा समय। समय पर रिन्यूअल करना ही सबसे सेफ और समझदारी भरा तरीका है, जिससे आपकी पॉलिसी के सभी फायदे बने रहते हैं।
ग्रेस पीरियड का रखें ध्यान
साथ ही पॉलिसी डॉक्यूमेंट में दिए गए नियमों को ध्यान से पढ़ना चाहिए, क्योंकि हर कंपनी का ग्रेस पीरियड और रिवाइवल नियम अलग हो सकता है। अगर कोई कन्फ्यूजन हो, तो समय से पहले इंश्योरर से बात कर लेना बेहतर रहता है।
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