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मैंने 40 साल पहले एक प्लॉट खरीदा था, सेल डीड नहीं होने पर उसे कैसे बेचा जा सकता है?

प्लॉट पर मालिकाना हक साबित करने के लिए ऑरिजिनल सेल डीड जरूरी है। इसके नहीं होने पर रेवेन्यू रिकॉर्ड के जरिए इस प्लॉट पर मालिकाना हक साबित किया जा सकता है। डीड के उपलब्ध नहीं होने पर रेवेन्यू रिकॉर्ड में एंट्री भी ओनरशिप की मजबूत सबूत मानी जाती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 06, 2026 पर 3:01 PM
मैंने 40 साल पहले एक प्लॉट खरीदा था, सेल डीड नहीं होने पर उसे कैसे बेचा जा सकता है?
पुरानी रेवेन्यू (लगाना) रसीद, ट्यूबवेल के इलेक्ट्रिसिटी बिल से भी ओनरशिप स्थापित करने में मदद मिलती है।

40 साल पहले खरीदे गए प्लॉट को बेचने पर टैक्स लायबिलिटी कितनी बनेगी? अक्सर ऐसे सवाल रीडर्स पूछते हैं। इसी तरह का एक सवाल गाजियाबाद के मोहित सक्सेना ने पूछा है। उन्होंने बताया कि 40 साल पहले उन्होंने एक एग्रीकल्चरल प्लॉट खरीदा था। लेकिन, उनेके पास पर्चेज डीड नहीं है। यह अब एग्रीकल्चरल प्लॉट भी नहीं रह गया है। वह इसे अब बेचना चाहते हैं। वह जानना चाहते हैं कि इस पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस का कैलकुलेशन किस तरह होगा? मनीकंट्रोल ने यह सवाल मशूहर टैक्स एक्सपर्ट और सीए बलवंत जैन से पूछा।

रजिस्टर्ड सेल डीड प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए प्राइमरी डॉक्युमेंट

जैन ने कहा कि मोहित सक्सेना ने यह प्लॉट 40 साल पहले खरीदा था। लेकिन, उनके पास इसका ऑरिजिनल सेल डीड नहीं है। ऐसी स्थिति में वह रेवेन्यू रिकॉर्ड के जरिए इस प्लॉट पर अपना मालिकाना हक साबित कर सकते हैं। आम तौर पर रजिस्टर्ड सेल डीड को प्रॉपर्टी के लीगल ट्रांसफर के लिए प्राइमरी डॉक्युमेंट माना जाता है। लेकिन, डीड के उपलब्ध नहीं होने पर रेवेन्यू रिकॉर्ड में एंट्री ओनरशिप की मजबूत सबूत मानी जाती है।

ऑफिशियल रेवेन्यू रिकॉर्ड में नाम की लगातार एंट्री जरूरी

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