इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने से पहले HRA का हिसाब लगाना भी जरूरी है। आमतौर पर यह लगता है कि सैलरी में जितना HRA है, उतनी टैक्स छूट मिलेगी। लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता है।
कई बार ऐसा होता है कि HRA के मुताबिक टैक्स छूट क्लेम करने पर भी उसका फायदा नहीं मिल पाता। कई बार लोग उत्साहित होकर HRA से ज्यादा टैक्स छूट क्लेम कर देते हैं।
यानी HRA 10,000 रुपए है तो कई लोग उसे थोड़ा बढ़ाकर 12,000 रुपए की रेंट रसीद देकर टैक्स छूट क्लेम करने की कोशिश करते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको 12,000 रुपए पर टैक्स छूट का फायदा मिलेगा।
आखिरी वक्त में झटका न लगे इसलिए जरूरी है कि आप भी अपने HRA का कैलकुलेशन उसी तरह करें जिस तरह आयकर विभाग करता है।
जानिए क्या है HRA कैलकुलेशन का तरीका?
HRA कैलकुलेशन तीन चीजों पर निर्भर है।
सैलरी में शामिल HRA
बेसिक सैलरी का 40 फीसदी
टोटल HRA क्लेम - बेसिक सैलरी का 10 फीसदी
इन तीनों कैलकुलेशन में जो रकम सबसे कम रहेगी, उसी पर आपको एचआरए छूट मिलेगा। इसे एक उदाहरण के जरिए बेहतर ढंग से समझते हैं।
a) मान लीजिए आपकी बेसिक सैलरी 10,175 रुपए है। आपका HRA मंथली 4070 रुपए है। अगर आप एक साल के लिए HRA क्लेम करते हैं तो यह रकम होगी 12 x 4070= 48,840 रुपए।
b) यह रकम एक साल की बेसिक सैलरी (1,22100 रुपए) के 40 फीसदी के बराबर है।
इस हिसाब से अगर आप हर महीने 4070 रुपए क्लेम करते हैं तो C (टोटल HRA क्लेम - बेसिक सैलरी का 10 फीसदी) के हिसाब से यह ज्यादा है।
c) अब इसे हम टोटल HRA में से बेसिक सैलरी का 10 फीसदी घटाकर देखते हैं। टोटल HRA क्लेम यानी 48,840 में से बेसिक सैलरी का 10% यानी 12210 घटाए तो बचेंगे 47,790 रुपए।
इस हिसाब से आप टोटल 47,790 रुपए पर ही HRA क्लेम कर सकते हैं, क्योंकि यही रकम सबसे कम है।
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