वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के यूनियन बजट से टैक्सपेयर्स को इस बार भी बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। पिछले बजट में उन्होंने 12 लाख रुपये तक की इनकम टैक्स-फ्री कर दी थीं। स्टैंडर्ड डिडक्शन को भी बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि लोगों की बढ़ती लिविंग कॉस्ट को देखते हुए वित्तमंत्री 1 फरवरी को बड़े एलान करने वाली हैं।
कितना बढ़ेगा स्टैंडर्ड डिडक्शन?
1 फरवरी को वित्तमंत्री स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने का ऐलान कर सकती हैं। नई रीजीम के टैक्सपेयर्स के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन 1 लाख रुपये हो सकता है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा सिर्फ नौकरी करने वाले लोगों को मिलता है। यह ऐसा टैक्स बेनेफिट्स है, जिसके लिए कोई निवेश नहीं करना पड़ता है और कोई प्रूफ पेश नहीं करना पड़ता है। नई रीजीम में ज्यादातर डिडक्शन और एग्जेम्प्शंस नहीं मिलते हैं। लेकिन, इसमें टैक्स के रेट्स कम हैं।
नई रीजीम में कब शुरू हुआ स्टैंडर्ड डिडक्शन?
इनकम टैक्स की नई रीजीम में पहले स्टैंडर्ड डिडक्शन नहीं मिलता था। नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने के लिए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 2023 में इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन का ऐलान किया था। शुरुआत में स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 रुपये था। यूनियन बजट 2024 में इसे बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया।
ओल्ड रीजीम में कितना है स्टैंडर्ड डिडक्शन?
इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन अब भी 50,000 रुपये है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 2020 में इनकम टैक्स की नई रीजीम की शुरुआत की थी। तब से उनका फोकस नई रीजीम पर रहा है। नई रीजीम को अट्रैक्टिव बनाने के लिए उन्होंने कई ऐलान किए हैं। लेकिन पुरानी रीजीम के लिए उन्होंने कोई ऐलान नहीं किया है। दरअसल सरकार नई रीजीम में टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी बढ़ाना चाहती है।
स्टैंडर्ड डिडक्शन की शुरुआत कब हुई थी?
स्टैंडर्ड डिडक्शन की शुरुआत इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 16 के तहत 1974 में हुई थी। 2005 के यूनियन बजट में सरकार ने इसे खत्म करने का ऐलान किया। फिर, 2018 में दोबारा इसे लागू किया गया। तब सरकार ने ट्रांसपोर्ट और मेडिकल अलाउन्स को वापस ले लिया था। उसकी जगह स्टैंडर्ड डिडक्शन का ऐलान किया था। तब यह 40,000 रुपये था। यूनियन बजट 2019 में इसे बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया।