Income Tax Return: नए आईटीआर फॉर्म्स जल्द होंगे जारी, जानिए क्या-क्या बदलाव हो सकते हैं

Income Tax Return :नया इनकम टैक्स एक्ट इस साल 1 अप्रैल से लागू होगा। इसके पहले सरकार नए आईटीआर फॉर्म्स जारी करेगी। इससे टैक्सपेयर्स को उनमें हुए बदलावों का पता चलेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार नए आईटीआर फॉर्म्स को और आसान बना सकती है

अपडेटेड Feb 10, 2026 पर 12:18 PM
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इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 31 जुलाई होती है।

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के नए इनकम टैक्स फॉर्म्स जल्द जारी होने की संभावना है। पिछले कुछ सालों में सरकार ने आईटीआर फॉर्म्स को आसान बनाने की कोशिश की है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आईटीआर फॉर्म्स को और आसान बनाने की गुंजाइश है। खासकर इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए आईटीआर-1, आईटीआर-2 और आईटीआर-3 को और आसान बनाए जाने की उम्मीद है।

ITR-1 क्या है और इसमें क्या-क्या बदलाव हो सकते हैं?

आईटीआर-1 फॉर्म को सहज भी कहा जाता है। यह फॉर्म उन इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स के लिए जिनकी इनकम का स्रोत सैलरी है, जिनका एक घर है और इंटरेस्ट जैसे दूसरे स्रोतों से आय होती है। हालांकि, यह सबसे आसान आईटीआर फॉर्म है, लेकिन इसमें टैक्सपेयर्स को कई डिसक्लोजर्स करने पड़ते हैं।

श्री टैक्स चैंबर्स के फाउंडर और सीईओ प्रभाकर केएस ने कहा कि एक सैलरीड टैक्सपेयर या सीनियर सिटीजन को डिसक्लोजर्स के कई पेज को चेक करना पड़ता है। हालांकि, ज्यादातर उसके लिए नहीं होते हैं। उनका मानना है कि नए ITR-1 में शुरुआत में ही 'रेडियो बटन' ऑप्शन दिया जा सकता है। इसमें टैक्सपेयर्स यह बता सकते हैं कि उनकी डिविडेंड इनकम या कोई दूसरी खास हेड वाली इनकम है। अगर टैक्सपेयर 'नहीं' (No) सेलेक्ट करता है तो तिमाही डिविडेंड वाले नहीं लागू होने वाले सेक्शन ऑटोमैटिकली स्किप हो सकते हैं।


ITR-2 क्या है और इसमें क्या-क्या बदलाव हो सकते हैं?

आईटीआर-2 फॉर्म उन इंडिविजुअल्स और हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के लिए है, जिनकी बिजनेस या प्रोफेशन से इनकम नहीं है, लेकिन कैपिटल गेंस और फॉरेन एसेट्स जैसी इनकम के दूसरे स्रोत हैं। इसमें आईटीआर-1 के मुकाबले ज्यादा डिसक्लोजर्स होते हैं। प्रिंट करने पर यह 40 से ज्यादा पेज वाला फॉर्म है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि आईटीआर-2 में भी रेडियो बटन का विकल्प दिया जा सकता है। टैक्सपेयर्स को यह बताने का विकल्प दिया जा सकता है कि क्या उन्होंने किसी रिप्रजेंटिटिव को अथॉराइज गिया है, अनलिस्टेड शेयरों में उनका निवेश है या किसी तरह का खास डिसक्लोजर्स है। अगर टैक्सपेयर्स 'नहीं' (No) को सेलेक्ट करता है तो फिर उसे उन सेक्शंस को चेक करने या देखने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जो उसके लिए नहीं हैं।

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एक्सपर्ट्स का कहना है कि विदेश में इनकम की रिपोर्टिंग में कई चैलेंजेज आते हैं। कई टैक्सपेयर्स को ब्लैक मनी एक्ट के तहत काफी पेनाल्टी चुकानी पड़ती है। कई बार तो छोटी गलती पर भी ज्यादा पेनाल्टी चुकानी पड़ती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि रिपोर्टिंग को आसान बनाई जा सकती है। फॉरेन इनकम की रिपोर्टिंग के लिए एक न्यूनतम सीमा निश्चित की जा सकती है।

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