नए इनकम टैक्स नियमों के ड्राफ्ट में जो प्रस्ताव है, उससे सैलरी पर टैक्स लगने का तरीका पूरी तरह से बदल जाएगा। कुछ अलाउन्सेज की एग्जेम्प्शंस लिमिट काफी बढ़ जाएगी। इससे इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में सैलरीड टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी फिर से बढ़ सकती है। डिडक्शंस और एग्जेम्प्शंस सिर्फ ओल्ड रीजीम में मिलते हैं। हालांकि, नई रीजीम डिफॉल्ट रीजीम है। इसमें पिछले कुछ सालों में इंडिविजुअल और सैलरीड टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी बढ़ी है।
एजुकेशन अलाउन्स की एग्जेम्प्शन लिमिट काफी बढ़ जाएगी
सरकार ने नए इनकम टैक्स नियमों का ड्राफ्ट 7 फरवरी को पेश किया था। इसमें एक बच्चे के एजुकेशन अलाउन्स की एग्जेम्प्शन लिमिट को प्रति माह 100 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने का प्रस्ताव है। मैक्सिमम दो बच्चों के एजुकेशन अलाउन्स पर एग्जेम्प्शन की इजाजत है। हॉस्टल एक्सपेंडिचर अलाउन्स लिमिट को प्रति बच्चा 300 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 9,000 रुपये करने का प्रस्ताव है। इसे भी मैक्सिमम 2 बच्चों तक क्लेम किया जा सकता है। ये दोनों लिमिट पिछले कई सालों से अपरिवर्तित थे।
सैलरीड टैक्सपेयर्स की दिलचस्पी ओल्ड रीजीम में बढ़ सकती है
मखीजानी गेरा एंड एसोसिएट्स के पार्टनर गौरव मखीजानी ने कहा, "अलाउन्सेज पर एग्जेम्प्शंस लिमिट बढ़ने से ओल्ड रीजीम फिर से ज्यादा अट्रैक्टिव हो जाएगी।" हालांकि किसी सैलरीड टैक्सपेयर्स को मिलने वाला कुल टैक्स बेनेफिट उसकी सैलरी स्ट्रक्चर और दूसरे उपलब्ध डिडक्शंस पर निर्भर करेगा। एकेएम ग्लोबल के लीड (पर्सनल टैक्स) विकास शर्मा ने कहा, "कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि नई रीजीम और पुरानी रीजीम में से किसी एक का चुनाव उसके तहत मिलने वाले फायदे पर निर्भर करेगा।"
ज्यादा एजुकेशन अलाउन्स एक्सपेंसेज के टैक्सपेयर्सी की मांग पूरी होगी
उन्होंने कहा, "ज्यादा बेनेफिट का इस्तेमाल करने वाले सैलरीड एंप्लॉयीज को पुरानी रीजीम ज्यादा अट्रैक्टिव लग सकती है। बाकी टैक्सपेयर्स के लिए नई रीजीम फायदेमंद रहेगी। इसका टैक्स स्ट्रक्चर आसान है।" ज्यादा एजुकेशन अलाउन्स एग्जेम्प्शन से इनफ्लेशन एडजस्टमेंट की पुरानी मांग पूरी हो जाएगी।
एंप्लॉयीज को मिलने वाले परक्विजिट्स का मतलब
परक्विजिट्स का मतलब नॉन-कैश बेनेफिट्स और एमेनिटीज से है, जो एंप्लायर सैलरी के अलावा एंप्लॉयीज को देता है। ये सैलरी इनकम के पार्ट होते हैं और वैल्यूएशंस के तय नियमों के हिसाब से इन पर टैक्स लगता है। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि एंप्लॉयी ने ओल्ड और न्यू रीजीम में से किसका चुनाव किया है।
परक्विजिट्स की तय वैल्यू पर लगता है टैक्स
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 (और इनकम टैक्स रूल्स, 1962) के मुताबिक, जब कोई एंप्लॉयर अपने एंप्लॉयी को ऑफिशियल और पर्सनल दोनों इस्तेमाल के लिए कार और ड्राइवर की सुविधा देता है तो एक फिक्स्ड मंथली वैल्यू को टैक्सेबल परक्विजिट माना जाता है। अभी यह वैल्यू छोटी कारों (1.6 लीटर तक) के प्रति माह 2,700 रुपये और बड़ी कारों के लिए 3,300 रुपये प्रति माह है। नए नियमों में इसे बढ़ाकर 8,000 रुपये प्रति माह और 10,000 प्रति माह करने का प्रस्ताव है। इससे टैक्सेबल सैलरी बढ़ जाएगी और एंप्लॉयीज पर टैक्स भी बढ़ जाएगा।
गिफ्ट्स के लिए एग्जेम्प्शन लिमिट बढ़ाने का प्रस्ताव
इनकम टैक्स के नए रूल्स में एंप्लॉयर की तरफ से मिलने वाले गिफ्ट्स के लिए एग्जेम्प्शन लिमिट सालाना 5,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये कर दिया गया है। सरकार ने नए नियमों के ड्राफ्ट पर 22 फरवरी तक लोगों की राय मांगी है। इस बारे में एक्सपर्ट्स सहित बाकी पक्षों का फीडबैक मिलने के बाद सरकार अंतिम नियम जारी करेगी।