इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने का सीजन शुरू हो गया है। लाखों टैक्सपेयर्स ने आईटीआर फाइल कर दिए हैं। हालांकि, इस बार इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 15 सितंबर है। अगर आपको एक से ज्यादा सोर्स से इनकम है या आप शेयरों में ट्रेडिंग करते हैं तो आपको रिटर्न फाइलिंग में सावधानी बरतने की जरूरत है। अगर इनकम के कैलुकेशन में गलती हुई तो आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस आ सकता है।
टैक्सबडी डॉट कॉम के फाउंडर सुजीत बांगर ने इनकम के कैलकुलेशन में गलती के एक दिलचस्प मामले के बारे में बताया है। उन्होंने एक लिंक्डइन पोस्ट किया है। उन्होंने बताया है कि कैसे इनकम के कैलकुलेशन में हुई गलती की वजह से एक व्यक्ति को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (Income Tax Department) की तरफ से 74,375 रुपये Income Tax चुकाने का नोटिस आ गया। ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है। खासकर उन लोगों को बड़ा झटका लग सकता है, जो शेयर ट्रेडिंग करते हैं।
टैक्स का नोटिस आने पर गलती का चला पता
बांगर ने एक फुल-टाइम इनवेस्टर के मामले में बारे में बताया है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा है कि राहुल को शेयरों को बेचने से 7 लाख रुपये का प्रॉफिट हुआ। उन्होंने यह सोचा कि उनकी इनकम 12 लाख रुपये से कम है, जिससे उन्हें कोई टैक्स नहीं देना होगा। लेकिन, जब उन्हें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से 74,375 रुपये टैक्स चुकाने का नोटिस आया तो उन्हें जोर का झटका लगा। पूरे मामले को समझने पर उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ।
कहां हुई कैलकुलेशन में गलती
राहुल की इनकम में कई तरह का कैलकुलेशन था। उन्हें इंट्राडे ट्रेडिंग से 3 लाख रुपये का लॉस हुआ था। उन्हें F&O से 2.5 लाख रुपये का गेंस हुआ था। उन्हें शेयरों को बेचने से 3.5 लाख रुपये का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस हुआ था। 4 लाख रुपये का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस हुआ था। उन्होंने अपने इनकम का कैलकुलेशन 7 लाख रुपये (₹2.5 लाख + ₹3.5 लाख + ₹4 लाख − ₹3 लाख = ₹7 लाख) किया। उन्हें लगा कि चूंकि उनकी इनकम सालाना 12 लाख रुपये से कम है तो उन्हें कोई टैक्स नही चुकाना होगा।
अलग-अलग इनकम के लिए अलग-अलग टैक्स
राहुल ने इनकम के कैलकुलेशन में बड़ी गलती की। इनकम टैक्स के नियमों में अलग-अलग स्रोत से होने वाली इनकम को अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है। हर कैटेगरी के लिए टैक्स के नियम भी अलग-अलग हैं। इंट्राडे ट्रांजेक्शन को स्पेकुलेटिव बिजनेस माना जाता है। F&O ट्रांजेक्शन को नॉन-स्पेकुलेटिव ट्रांजेक्शन माना जाता है। शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस पर 20 फीसदी टैक्स लगता है, जबकि लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस पर 12.5 फीसदी टैक्स लगता है। यह टैक्स तभी लगता है जब एक वित्त वर्ष में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस 1.25 लाख रुपये से ज्यादा होता है।
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12 टैक्स छूट के नियम की शर्तें
राहुल को इनकम टैक्स के नियमों के बारे में ठीक से पता नहीं था। उन्होंने अपने हिसाब से सभी प्रॉफिट को जोड़ दिया और उसमें से लॉस घटा दिया। इनकम टैक्स के नियमों के हिसाब से कैलकुलेशन का यह तरीका गलत है। राहुल का यह मानना भी गलत है कि चूंकि उनकी इनकम सालाना 12 लाख रुपये से कम है, जिससे उन्हें टैक्स नहीं देना पड़ेगा। इनकम टैक्स का नियम कहता है कि सेक्शन 87 के तहत सालाना 12 रुपये तक की इनकम पर टैक्स नहीं लगता है। लेकिन, यह रिबेट लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस होने पर लागू नहीं होता है।
रिटर्न फाइलिंग में बरतें सावधानी
इस मामले से यह साफ हो जाता है कि अगर किसी टैक्सपेयर्स को कई सोर्स खासकर शेयर ट्रेडिंग से इनकम है तो उसे अपने प्रॉफिट और गेंस के आधार पर इनकम के कैलकुलेशन में सावधानी बरतनी होगी। हर इनकम पर टैक्स के नियम को ध्यान में रखना होगा। ऐसा नहीं करने पर कैलकुलेशन गलत हो जाएगा और इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस आ जाएगा। इससे टैक्सपेयर्स के लिए मुश्किल काफी बढ़ जाएगी। इस मुश्किल से बचने के लिए टैक्स के नियमों के हिसाब से इनकम का कैलकुलेशन करना होगा और उस पर टैक्स देना होगा।