Income Tax Return 2026: इनकम टैक्स से जुड़े एक अहम मामले में मुंबई स्थित इनकम टैक्स अपीलीय न्यायाधिटैक्सण (ITAT) ने टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत दी है। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा है कि अगर किसी व्यक्ति की को Form 26AS के आधार पर टैक्स के दायरे में माना जाता है, तो उसे उस इनकम पर कटे TDS का लाभ भी मिलना चाहिए। सिर्फ इस वजह से TDS क्रेडिट नहीं रोका जा सकता कि व्यक्ति ने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल नहीं किया था।
यह मामला नवी मुंबई के एक टैक्सपेयर्स से जुड़ा है। इनकम टैक्स विभाग ने फाइनेंशियल ईयर 2010-11 के लिए उनके टैक्स आकलन को दोबारा खोला था। विभाग को Form 26AS और अन्य रिकॉर्ड से कुछ इनकम की जानकारी मिली थी। चूंकि संबंधित व्यक्ति ने ITR दाखिल नहीं किया था और विभाग के नोटिस का भी जवाब नहीं दिया था, इसलिए इनकम टैक्स अधिकारी ने एकतरफा कार्रवाई टैक्सते हुए Form 26AS में दिखाई गई पूरी रकम को टैक्स योग्य इनकम मान लिया। हालांकि, इस दौरान उस इनकम पर पहले से कटे TDS का क्रेडिट नहीं दिया गया।
टैक्सपेयर्स ने ITAT में दलील दी कि जब विभाग पूरी इनकम को टैक्स के दायरे में ला रहा है, तो उस पर पहले से जमा TDS का लाभ भी मिलना चाहिए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो यह डबल टैक्सेशन जैसा होगा। ट्रिब्यूनल ने इस तर्क को सही माना और कहा कि सरकार के पास पहले से जमा TDS को सिर्फ तकनीकी कारणों से नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके बाद ITAT ने इनकम टैक्स अधिकारी को Form 26AS की जांच टैक्स TDS का क्रेडिट देने का निर्देश दिया।
आम टैक्सपेयर्स के लिए क्या है मतलब?
टैक्स एक्सपर्ट का कहना है कि यह फैसला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी इनकम Form 26AS या अन्य टैक्स रिकॉर्ड में दर्ज है लेकिन किसी कारणवश उन्होंने ITR दाखिल नहीं किया। फैसले का साफ संदेश है कि यदि इनकम टैक्स विभाग किसी इनकम पर टैक्स वसूलना चाहता है, तो उसी इनकम पर पहले से कटे और सरकार के पास जमा TDS को भी मान्यता देनी होगी।
एक्सपर्ट के अनुसार भले ही अब Form 26AS की जगह नई सूचना प्रणाली लागू हो रही हो, लेकिन मूल सिद्धांत वही रहेगा टैक्सपेयर्स के नाम पर जमा किए गए टैक्स को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों में टैक्सपेयर्स को राहत देने वाला साबित हो सकता है।