क्या आने वाले समय में आपके हाथ में कागज के बजाय प्लास्टिक का 100, 500 या 200 रुपये का नोट हो सकता है? इसकी संभावना अब बढ़ती नजर आ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में प्लास्टिक यानी पॉलीमर बैंक नोट शुरू करने की योजना पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय बैंक जल्द ही इसके लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर सकता है।
क्यों बढ़ रही है प्लास्टिक नोटों की जरूरत?
दरअसल, हर साल बड़ी संख्या में नोट खराब, फट या गंदे हो जाते हैं, जिन्हें चलन से हटाना पड़ता है। RBI की सालाना रिपोर्ट के अनुसार फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में करीब 23.8 अरब पुराने और खराब नोटों को चलन से बाहर किया गया। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 12 फीसदी से ज्यादा है।
सबसे ज्यादा खराब होने वाले नोटों में 500 रुपये और 100 रुपये के नोट शामिल रहे। वहीं नोटों की छपाई पर होने वाला खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में नोट छापने पर करीब 6,373 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो एक साल पहले 5,101 करोड़ रुपये था।
क्या होते हैं पॉलीमर नोट?
पॉलीमर नोट एक खास तरह के प्लास्टिक से बनाए जाते हैं। ये सामान्य कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा मजबूत होते हैं और पानी, गंदगी तथा फटने से आसानी से खराब नहीं होते। पॉलीमर नोट कागज के नोटों की तुलना में करीब ढाई गुना ज्यादा समय तक चल सकते हैं। यही वजह है कि कई देशों ने इन्हें अपनाया है।
नकली नोटों पर भी लग सकती है लगाम
पॉलीमर नोटों में कई आधुनिक सुरक्षा फीचर होते हैं। इनमें पारदर्शी विंडो, विशेष प्रिंटिंग और ऐसे सुरक्षा तत्व शामिल होते हैं, जिन्हें नकली बनाना काफी मुश्किल होता है। इससे जाली नोटों की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।
दुनिया के कई देशों में पहले से चल रहे हैं ये नोट
पॉलीमर नोट सबसे पहले 1988 में ऑस्ट्रेलिया में शुरू किए गए थे। आज कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, वियतनाम, मॉरीशस और रोमानिया समेत 45 से अधिक देशों में इनका इस्तेमाल हो रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जब ये नोट चलन से बाहर होते हैं, तो इन्हें रिसाइकिल करके दूसरी उपयोगी प्लास्टिक वस्तुएं भी बनाई जा सकती हैं।