PM सूर्य घर योजना में ऑन-ग्रिड या ऑफ-ग्रिड, कौन सा सिस्टम लगवाना फायदेमंद? जानें आपके घर के लिए क्या है सही
On Grid vs Off Grid Solar System: ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम वह सेटअप है, जो आपके घर के साथ-साथ सरकारी बिजली ग्रिड से हमेशा जुड़ा रहता है। इसमें बैटरी की जरूरत नहीं होती है। वहीं ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम सरकारी बिजली ग्रिड से पूरी तरह अलग होता है
जानिए आपके घर के लिए कौन सा सही रहेगा और किस सिस्टम पर आपको सरकार की तरफ से भारी सब्सिडी मिलेगी
PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत अगर आप भी अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने की सोच रहे हैं, तो ये खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। इसके तहत आपके सामने सबसे बड़ा सवाल यही आएगा कि 'ऑन-ग्रिड' सिस्टम लगवाएं या 'ऑफ-ग्रिड'। दोनों ही सिस्टम के अपने फायदे और नुकसान हैं। लेकिन जब बात पीएम सूर्य घर योजना के तहत सब्सिडी और अधिकतम मुनाफे की आती है, तो गणित पूरी तरह बदल जाता है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इन दोनों सोलर सिस्टम में क्या अंतर है, आपके घर के लिए कौन सा सही रहेगा और किस सिस्टम पर आपको सरकार की तरफ से भारी सब्सिडी मिलेगी।
क्या है ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम? क्यों यह स्कीम है बेस्ट
ऑन-ग्रिड सोलर सिस्टम वह सेटअप है, जो आपके घर के साथ-साथ सरकारी बिजली ग्रिड से हमेशा जुड़ा रहता है। इसमें बैटरी की जरूरत नहीं होती है।
कैसे काम करता है: दिन के समय सोलर पैनल से जो बिजली बनती है, उससे आपके घर के उपकरण चलते हैं। अगर जरूरत से ज्यादा बिजली बनती है, तो वह 'नेट मीटरिंग' के जरिए सीधे सरकारी ग्रिड में चली जाती है। रात के समय जब धूप नहीं होती, तब आप ग्रिड यानी सरकारी बिजली से सप्लाई लेते हैं।
फायदा: इसमें महंगी बैटरी का खर्च नहीं होता, इसलिए यह काफी सस्ता है। आपकी एक्स्ट्रा बिजली सरकार खरीद लेती है, जिससे आपका बिल शून्य या माइनस में आ जाता है।
पीएम सूर्य घर योजना और सब्सिडी: ध्यान रहे, 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के तहत सरकार केवल 'ऑन-ग्रिड' सोलर सिस्टम लगवाने पर ही सब्सिडी देती है। अगर आप ग्रिड से कनेक्टेड सिस्टम लगवाएंगे, तभी आपको ₹78000 तक की सरकारी सब्सिडी का लाभ मिलेगा।
क्या है ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम? किसे पड़ती है इसकी जरूरत
ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम सरकारी बिजली ग्रिड से पूरी तरह अलग होता है। इस सिस्टम का सरकारी बिजली बोर्ड से कोई लेना-देना नहीं होता।
कैसे काम करता है: इसमें सोलर पैनल के साथ भारी-भरकम बैटरियां लगाई जाती हैं। दिन में धूप से जो बिजली बनती है, उससे घर के उपकरण भी चलते हैं और बची हुई बिजली से बैटरियां चार्ज होती हैं। रात के समय या बादलों वाले दिनों में घर की लाइट इसी बैटरी बैकअप से चलती है।
नुकसान: बैटरियां शामिल होने के कारण यह सिस्टम ऑन-ग्रिड के मुकाबले दो से तीन गुना तक महंगा हो जाता है। इसके अलावा हर 4-5 साल में बैटरी बदलने का एक्स्ट्रा खर्च भी उठाना पड़ता है। सबसे बड़ी बात, इस सिस्टम पर पीएम सूर्य घर योजना की सब्सिडी नहीं मिलती है।
किसके लिए है सही: यह सिस्टम उन सुदूर ग्रामीण इलाकों या पहाड़ी क्षेत्रों के लिए वरदान है, जहां सरकारी बिजली की ग्रिड ही नहीं पहुंची है या जहां दिन-रात 12 से 15 घंटे का भारी पावर कट रहता है।
आपके घर के लिए कौन सा सिस्टम रहेगा फायदेमंद?
अगर आप किसी ऐसे शहर या इलाके में रहते हैं जहां बिजली की कटौती बहुत कम होती है, तो आपके लिए आंख बंद करके 'ऑन-ग्रिड' सोलर सिस्टम चुनना ही सबसे समझदारी का फैसला है। इसके तीन बड़े कारण हैं:
पैसा वसूल निवेश: यह बहुत सस्ता है और सरकार की तरफ से मोटी सब्सिडी मिल जाएगी।
बिजली बिल से मुक्ति: नेट मीटरिंग के कारण आपका बिजली का बिल पूरी तरह जीरो हो जाएगा और आप सरकार को बिजली बेचकर कमाई भी कर सकते हैं।
कम मेंटेनेंस: इसमें बैटरी नहीं होने के कारण मेंटेनेंस का कोई झंझट नहीं होता और पैनल की लाइफ 25 साल तक की होती है।
अगर आपके इलाके में बिजली कटती भी है और आप सब्सिडी भी चाहते हैं, तो आप 'हाइब्रिड सोलर सिस्टम' का रुख कर सकते हैं। यह ऑन-ग्रिड और ऑफ-ग्रिड का मिक्स होता है। इसमें आपको ग्रिड कनेक्टिविटी के कारण योजना की सब्सिडी भी मिल जाएगी और पावर बैकअप के लिए आप छोटी बैटरी भी जोड़ सकते हैं, हालांकि यह सामान्य ऑन-ग्रिड से थोड़ा महंगा होता है।