नौकरीपेशा शख्स इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय हमेशा यह चाहता है कि किसी तरह टैक्स बचा लिया जाए। नए बजट में 12 लाख रुपये तक की टैक्सेबल इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगने की घोषणा हुई है। ऐसे में टैक्स बचाने में सबसे बड़ा योगदान उन रीइंबर्समेंट्स(Reimbursement) और अलाउंस (Allowance) की होती है, जो टैक्स फ्री होते हैं। कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को अलग-अलग अलाउंस देती हैं, जिनमें ट्रैवल, मेडिकल, हाउस रेंट और टेलीफोन रीइंबर्समेंट जैसे कई ऑप्शन शामिल होते हैं।
अगर आप अपनी सैलरी में मिलने वाले इन अलाउंस का सही तरीके से इस्तेमाल करें तो आपको ज्यादा फायदा हो सकता हैं। आइए जानते हैं उन अलाउंस के बारे में जिनसे आपकी बचत संभव है।
ट्रांसपोर्ट या कन्वेंस अलाउंस आपके ऑफिस से घर आने-जाने के खर्च को कवर करता है। कई कंपनियां यह भत्ता अपने कर्मचारियों को देती हैं, लेकिन कुछ कंपनियां इसे सैलरी पैकेज में शामिल नहीं करतीं। अगर आपकी सैलरी में यह अलाउंस नहीं है तो इसको जुड़वाने की कोशिश करें। इससे आपके आने-जाने का खर्च भी कवर होगा और इस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा, जिससे आपकी बचत बढ़ सकती है।
कई कंपनियां अपने कर्मचारियों और उनके परिवार के इलाज के खर्च को कवर करने के लिए मेडिकल अलाउंस देती हैं। अगर आपकी कंपनी यह सुविधा नहीं देती तो इसे सैलरी पैकेज में शामिल करवाने की कोशिश करें। इससे आपके मेडिकल खर्च रीइम्बर्स हो सकते हैं। इससे न केवल पैसों की बचत होगी, बल्कि परिवार की सेहत का भी बेहतर ध्यान रखा जा सकेगा।
कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों को फूड कूपन और मील वाउचर कूपन देती हैं, जिससे खाने-पीने का खर्च कम हो जाता है और टैक्स भी बचता है। इसे कई जगहों पर एंटरटेनमेंट अलाउंस भी कहा जाता है। अगर आपकी सैलरी में यह शामिल नहीं है तो कंपनी की पॉलिसी चेक करें और इसे जोड़ने की कोशिश करें।
कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों को कार मेंटेनेंस अलाउंस देती हैं, जिससे कार से जुड़ा खर्च कम हो जाता है। इस अलाउंस के तहत पेट्रोल-डीजल, सर्विसिंग और ड्राइवर की सैलरी जैसी चीजों का खर्च कवर किया जाता है। अगर आपका कार खर्च ज्यादा है, तो आप अपनी कंपनी के एचआर से बात कर सकते हैं और इसे अपनी सैलरी का हिस्सा बनवा सकते हैं। इस पर कोई टैक्स नहीं लगता, जिससे आपकी बचत भी होती है और वाहन का खर्च संभालना भी आसान हो जाता है।
अगर आप ऑफिस के काम के लिए मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, तो कुछ कंपनियां इसका खर्च रीइम्बर्स करती हैं। इस अलाउंस के तहत आपके फोन और इंटरनेट के बिल का भुगतान एक तय सीमा तक टैक्स फ्री होता है। इससे आपकी टैक्स योग्य आय कम हो जाती है और आपको आर्थिक रूप से फायदा मिलता है।
अगर आपके काम में अखबार, मैगजीन या किताबें पढ़ना जरूरी है, तो आपकी कंपनी इसके लिए अलाउंस दे सकती है। यह अलाउंस टैक्स फ्री होता है, जिससे आपकी सैलरी पर टैक्स का बोझ कम हो सकता है। अगर आपकी कंपनी में यह पॉलिसी मौजूद है, तो इसे अपनी सैलरी का हिस्सा बनाकर टैक्स बचाने का फायदा उठा सकते हैं।
अगर आप किराए के मकान में रहते हैं तो आपके लिए हाउस रेंट अलाउंस (HRA) आपकी सैलरी का अहम हिस्सा हो सकता है। कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को यह भत्ता देती हैं, जो आपकी बेसिक सैलरी का 40-50% तक हो सकता है।
कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों को यूनिफॉर्म अलाउंस भी देती हैं, जिससे वे अपने ऑफिस ड्रेस को मेंटेन कर सकें। अगर आपकी कंपनी भी यह सुविधा देती है तो इसे अपनी सैलरी में शामिल करवाएं। क्योंकि इस पर कोई टैक्स नहीं लगता।