अंग्रेजों की गुलामी से आजादी तो हमने 1947 में पा ली थी। लेकिन, आपने आर्थिक आजादी हासिल की है? आज फाइनेंशियल फ्रीडम हासिल करना बेहद जरूरी हो गया है। लेकिन, आप इसे तभी हासिल कर पाएंगे, जब इसका मतलब ठीक तरह से समझेंगे। फाइनेंशियल फ्रीडम का सही मतलब कम लोग जानते हैं। ज्यादातर लोग समझते हैं कि फाइनेंशियल फ्रीडम का मतलब जल्द रिटायरमेंट, लग्जरी लाइफ स्टाइल और मोटा बैंक बैलेंस है। लेकिन, यह सच नहीं है। आइए फाइनेंशियल फ्रीडम के बारे में 5 गलत धारणाओं के बारे में जानते हैं।
1. फाइनेंशियल फ्रीडम के लिए ज्यादा इनकम जरूरी है
ज्यादातर लोग मानते हैं कि ज्यादा इनकम से फाइनेंशियल फ्रीडम मिलती है। लेकिन, दोनों के बीच सीधा संबंध नहीं है। सवाल है कि इनकम से आप अपना कितना खर्च पूरा कर पाते हैं और इसके बाद आपके हाथ में क्या बचता है। इसे एक उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति की मंथली इनकम 2 लाख रुपये है। लेकिन, वह EMI और दूसरे खर्च की वजह से हमेशा मुश्किल में रहता है। एक दूसरा व्यक्ति है जिसकी इनकम सिर्फ 1 लाख रुपये है, लेकिन जरूरी खर्च के बाद भी हर महीने उसके हाथ में पैसे बच जाते हैं। इसे वह इनवेस्ट करता है। दूसरा व्यक्ति आर्थिक रूप से ज्यादा आजाद हैं।
2. रिटायरमेंट के लिए 1 करोड़ का फंड काफी है
नौकरी करने वाले कई लोग मानते हैं कि अगर वे 1 करोड़ रुपये जुटा लेंगे तो वे आर्थिक रूप से पूरी तरह आजाद हो जाएंगे। लेकिन, यह सच नहीं है। रिटायरमेंट के बाद आपके लिए कितना बड़ा जरूरी होगा, यह इस बात से तय होता है कि आपकी लाइफ स्टाइल क्या है। दूसरा, रिटायरमेंट के बाद के खर्च हर साल इनफ्लेशन की वजह से बढ़ते जाते हैं। इसलिए आपने रिटायरमेंट के लिए जो फंड बनाया है, उसकी वैल्यू बढ़नी जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर आपके पैसे की वैल्यू कम होती जाएगी। तीसरा, रिटायरमेंट बाद हेल्थ पर होने वाला खर्च बढ़ जाता है।
3. नौकरी छोड़ने का मतलब आजादी है
कई लोग नौकरी से ऊब जाते हैं। उन्हें लगता है कि नौकरी छोड़ने के बाद वे पूरी तरह से आजाद हो जाएंगे। लेकिन, यह सच नहीं है। नौकरी छोड़ने के बाद आर्थिक दबाव बढ़ जाता है। सेविंग्स और इमर्जेंसी फंड के पैसे खर्च होने लगते हैं। ऐसे में आजाद महसूस करने की जगह आप टेंशन महसूस करने लगते हैं। फाइनेंशियल प्रेशर में रहने वाला व्यक्ति आजाद कैसे महसूस कर सकता है।
4. रियल एस्टेट और गोल्ड में निवेश करना सबसे सुरक्षित है
लोग सदियों से रियल एस्टेट और गोल्ड में इनवेस्ट करते आए हैं। लेकिन, यह तब की बात है जब फाइनेंशियल मार्केट इतना विकसित नहीं था। रियल एस्टेट और गोल्ड में अच्छा रिटर्न देने की क्षमता है। लेकिन, इस रिटर्न की गारंटी नहीं है। दूसरा, दोनों लिक्विडिटी के लिहाज से अच्छे नहीं हैं। इसका मतलब है कि अचानक पैसे की जरूरत पड़ने पर रियल एस्टेट को बेचना मुश्किल हो सकता है।
5. सेविंग से फाइनेंशियल फ्रीडम मिलेगी
सेविंग्स जरूरी है। लेकिन, सिर्फ सेविंग्स से फाइनेंशियल फ्रीडम नहीं मिलेगी। आपको सेविंग्स के पैसे को सही जगह इनवेस्ट करना होगा। इससे आपके पैसे की वैल्यू बढ़ती रहेगी। अगर आपके पैसे पर मिलने वाला रिटर्न इनफ्लेशन के रेट से कम है तो जान लीजिए कि आपके पैसे की वैल्यू धीर-धीरे घट रही है। शेयरों या इक्विटी म्यूचुअल फंड की स्कीम में सिप से निवेश कर लंबी अवधि में बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। यह फंड आपकी फाइनेंशियल फ्रीडम में मददगार हो सकता है।