Retirement Planning: महंगाई को कोस रहे? भारत अभी भी रिटायर होने के लिए काफी सस्ता; जानें कितना चाहिए पैसा
Retirement Planning: HSBC रिपोर्ट के अनुसार, भारत रिटायरमेंट के लिए दुनिया के सबसे सस्ते देशों में है। यहां समृद्ध लोगों को रिटायर होने के लिए वैश्विक औसत के मुकाबले आधे से भी कम रकम की जरूरत होती है। जानिए पूरी डिटेल।
12 देशों के इस सर्वे में अमेरिका (United States) सबसे महंगा देश है।
Retirement Planning: भारत समेत दुनियाभर में तेजी से महंगाई बढ़ रही है। बेशक इसका असर रिटायरमेंट प्लानिंग पर भी पड़ा है। फिर भी भारत अभी भी रिटायर होने के लिए दुनिया के तमाम देशों के मुकाबले काफी सस्ता है। यह खुलासा HSBC की दूसरी एडिशन रिपोर्ट ‘अफ्लुएंट इन्वेस्टर स्नैपशॉट (Affluent Investor Snapshot)’ में हुआ है।
समृद्ध भारतीय निवेशकों (Affluent Investors) को सुरक्षित और आरामदायक रिटायरमेंट के लिए औसतन 3.5 करोड़ रुपये (लगभग 4 लाख डॉलर) की बचत की जरूरत होगी। वहीं, वैश्विक स्तर पर संपन्न निवेशकों के लिए यह औसत रकम ₹8.75 करोड़ (10 लाख डॉलर) से भी ज्यादा है।
रिपोर्ट बताती है कि आरामदायक रिटायरमेंट के लिए जरूरी औसत बचत में पिछले एक साल में 34.6% की बढ़ोतरी हुई है। कैलेंडर वर्ष 2024 में यह जरूरत 7.8 लाख डॉलर थी, जो 2025 में बढ़कर 10.5 लाख डॉलर हो गई। यह स्टडी 21 से 69 साल उम्र के 10,797 समृद्ध निवेशकों पर आधारित है। इन निवेशकों के पास 1 लाख डॉलर से 20 लाख डॉलर तक की निवेश लायक संपत्ति (Investable Assets) थी।
सबसे महंगा-सस्ता रिटायरमेंट
HSBC की रिपोर्ट के अनुसार, 12 देशों के इस सर्वे में अमेरिका (United States) सबसे महंगा देश है। वहां, रिटायरमेंट के लिए औसतन 15.7 लाख डॉलर (1.57 million USD) बचाने की जरूरत होती है। इसके मुकाबले भारत (India) सबसे किफायती है, जहां यह औसत केवल लगभग 4 लाख डॉलर (400,000 USD) है।
भारतीय निवेशकों का रुझान
HSBC की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय समृद्ध निवेशकों ने पिछले एक साल में अपने नकद (Cash Holdings) का हिस्सा घटाकर 15% कर दिया है। इक्विटी (Equities) में एलोकेशन कम करके उन्होंने सोने (Gold) और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (Alternative Investment Funds) में निवेश बढ़ाया है।
पिछले 12 महीनों में सोने में सबसे ज्यादा निवेश बढ़ा, उसके बाद वैकल्पिक साधनों जैसे प्राइवेट इक्विटी (Private Equity), प्राइवेट क्रेडिट (Private Credit) और हेज फंड्स (Hedge Funds) में निवेश का रुझान बढ़ा है। ये बदलाव इस बात का संकेत हैं कि महंगाई (Inflation) और व्यापक आर्थिक जोखिम (Macroeconomic Risks) निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर रहे हैं।
आगे क्या करेंगे भारतीय निवेशक?
62% भारतीय निवेशक आगे भी वैकल्पिक फंड्स (Alternative Funds) में निवेश बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद उनकी प्राथमिकता मैनेज्ड सॉल्यूशंस (Managed Solutions) जैसे म्यूचुअल फंड, यूनिट ट्रस्ट (Unit Trust) और एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (Exchange-Traded Funds - ETFs) हैं।
वैश्विक स्तर पर भी यही रुझान दिखा है। वहां, आधे से ज्यादा निवेशक अगले एक साल में वैकल्पिक संपत्तियों में निवेश बढ़ाने का प्लान कर रहे हैं। यह मौजूदा स्तर से लगभग दोगुना है।
निवेश की जानकारी कहां से ले रहे हैं लोग?
भले ही सोशल मीडिया (Social Media), ऑनलाइन वीडियो (Online Videos) और पॉडकास्ट (Podcasts) लोकप्रिय हो गए हों। लेकिन, ज्यादातर निवेशक अभी भी वेल्थ या फाइनेंशियल स्पेशलिस्ट (Financial Specialists) और बैंक रिलेशनशिप मैनेजर (Bank Relationship Managers) पर निवेश सलाह के लिए भरोसा करते हैं। अब एक-तिहाई से ज्यादा निवेशक वित्तीय इन्फ्लुएंसर्स (Finfluencers) को भी अपने प्रमुख सलाहकारों में शामिल कर रहे हैं।
प्रॉपर्टी और लाइफस्टाइल में निवेश की प्राथमिकता
भारतीय निवेशकों के लिए प्रॉपर्टी (Property) में निवेश प्राथमिकता में बना हुआ है। लेकिन छुट्टियों (Vacations) और लाइफस्टाइल से जुड़ी बचत भी अब 40% निवेशकों के लिए अहम हो रही है। यह रुझान वैश्विक स्तर पर भी समान है, जहां सभी पीढ़ियों के लिए छुट्टियों की बचत एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। जेन जेड (Gen Z) से लेकर बेबी बूमर्स (Baby Boomers) तक।
युवा निवेशकों का फोकस किस पर है
जीवन-यापन की बढ़ती लागत (Cost of Living), भू-राजनीतिक अनिश्चितता (Geopolitical Uncertainty) और व्यापक आर्थिक कारक (Macroeconomic Factors) दुनिया भर में निवेशकों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं।
पीढ़ियों के हिसाब से, युवा समृद्ध निवेशक (Younger Affluent Investors) अपने वित्तीय लक्ष्यों को पूरा करने को लेकर सबसे ज्यादा आत्मविश्वासी हैं। इनमें छुट्टियों के लिए बचत, वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करना और रिटायरमेंट की तैयारी जैसी प्राथमिकताएं शामिल हैं।
HSBC की हेड ऑफ प्रीमियर वेल्थ सॉल्यूशंस (Head of Premier Wealth Solutions) जेनी वांग (Jenny Wang) ने कहा, “बड़ी तस्वीर के फैक्टर हमारे नियंत्रण से बाहर होते हैं। लेकिन वे हमारे सामने आने वाले विकल्पों को तय करते हैं। जो बातें हमें रातों को जगाए रखती हैं, वे संकेत हैं कि हमारे फाइनेंशियल प्लान और निवेश पोर्टफोलियो को एडजस्ट करने की जरूरत है ताकि हम अपने जीवन के लक्ष्यों को हासिल कर सकें।”