'सिर्फ अमेरिका पर निर्भर नहीं भारत', पूर्व RBI MPC मेंबर ने ट्रेड डील से जुड़े जोखिमों को किया खारिज

India US trade deal: पूर्व RBI MPC सदस्य और अर्थशास्त्री आशिमा गोयल का कहना है कि भारत की आर्थिक ग्रोथ अमेरिका पर निर्भर नहीं है। उभरते बाजार, वैकल्पिक ट्रेड पार्टनर और सीमित एक्सपोजर भारत को मजबूती देते हैं। इसलिए भारत को जल्दबाजी में ट्रेड डील के लिए अपने हितों से समझौता नहीं करना चाहिए।

अपडेटेड Jan 11, 2026 पर 3:55 PM
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आशिमा गोयल ने कहा कि कि भारत का अमेरिका पर व्यापारिक निर्भरता कई अन्य एशियाई देशों के मुकाबले काफी कम है।

India US trade deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी को लेकर अटकलें काफी बढ़ गई हैं। इन सबके बीच अर्थशास्त्री और आरबीआई की पूर्व मौद्रिक नीति समिति (MPC) सदस्य आशिमा गोयल (Ashima Goyal) ने साफ कहा है कि भारत की ग्रोथ अमेरिका पर टिकी हुई नहीं है। उनका मानना है कि आज के दौर में उभरते बाजार और वैकल्पिक साझेदारियां कहीं ज्यादा अहम भूमिका निभा रही हैं।

अमेरिका पर जरूरत से ज्यादा फोकस

CNBC इंटरनेशनल से बातचीत में आशिमा गोयल ने कहा कि बाजारों में अमेरिका को लेकर अत्यधिक फोकस कोई नई बात नहीं है।


उन्होंने बताया कि MPC मेंबर रहते हुए भी उन्होंने यही ट्रेंड देखा था। अमेरिका से जुड़ी खबरों की अधिकता, वहां से आने वाला FDI और डेटा की उपलब्धता की वजह से यह धारणा बनती है कि भारत की आर्थिक दिशा अमेरिका से तय होती है, जबकि हकीकत इससे अलग है।

ब्याज दर और रुपये पर भारत की स्वतंत्रता

गोयल ने कहा कि पूंजी प्रवाह और एक्सचेंज रेट जैसे संवेदनशील मामलों में भी भारत को जितना आश्रित माना जाता है, वह उतना नहीं है।

उन्होंने समझाया कि भारत में चरणबद्ध कैपिटल अकाउंट कन्वर्टिबिलिटी है। इससे ब्याज दरों के प्रति संवेदनशील विदेशी पूंजी प्रवाह सीमित रहता है। इसी वजह से भारत अमेरिका से अलग रहते हुए अपनी ब्याज दरों पर फैसले ले पाया।

उभरते बाजार अब ग्रोथ का बड़ा इंजन

आशिमा गोयल के मुताबिक, आज वैश्विक आर्थिक वृद्धि में उभरते बाजारों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से ज्यादा हो चुकी है।

उन्होंने ने कहा कि अगर अमेरिका सहयोग के लिए तैयार नहीं होता, तो देश विकल्प तैयार कर लेते हैं। इसलिए भारत को सिर्फ अमेरिका-ट्रेड डील को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है, बल्कि उपलब्ध और उभरते विकल्पों पर भरोसा करना चाहिए।

अमेरिका पर भारत की निर्भरता सीमित

आशिमा गोयल ने यह भी कहा कि कि भारत का अमेरिका पर व्यापारिक निर्भरता कई अन्य एशियाई देशों के मुकाबले काफी कम है।

उन्होंने कहा कि भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी छोटी है, खासकर जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की तुलना में। यही वजह है कि अमेरिका के साथ व्यापार में किसी तरह की रुकावट भारत की अर्थव्यवस्था पर बड़ा झटका नहीं देती।

अमेरिका से रिश्ते अहम, लेकिन शर्तों के साथ

गोयल ने साफ किया कि भारत अमेरिका के साथ संबंधों को महत्व देता है। वहां बड़ी NRI आबादी है और कई क्षेत्रों में सहयोग से भारत को फायदा होता है।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी ट्रेड डील की कीमत भारत के किसानों को नहीं चुकानी चाहिए। अमेरिका को भारत की घरेलू संवेदनशीलताओं को समझना होगा।

देरी बेहतर, लेकिन नुकसानदेह समझौता नहीं

पूर्व एमपीसी सदस्य गोयल के मुताबिक, भारत ने अब तक जिन एफटीए (FTA) पर साइन किए हैं, उनमें दोनों देशों की प्राथमिकताओं का सम्मान हुआ है। ऐसे में नतीजे दोनों देशों के लिए विन-विन रहे हैं।

उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका के साथ ट्रेड डील में देरी होती है लेकिन शर्तें बेहतर मिलती हैं, तो वह जल्दबाजी में किए गए ऐसे समझौते से बेहतर है जो बड़े कारोबारी और कमजोर वर्गों को नुकसान पहुंचाए।

ट्रेड डील पर ताजा विवाद क्या है

हाल ही में अमेरिकी वाणिज्य मंत्री Howard Lutnick ने दावा किया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील इसलिए अटक गई क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को व्यक्तिगत रूप से फोन नहीं किया।

भारत सरकार ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा कि यह बयान 'सटीक नहीं' है।

लगातार जारी रही भारत-अमेरिका के बीच वार्ता

रंधीर जायसवाल ने बताया कि फरवरी से ही भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय ट्रेड डील को लेकर कई दौर की बातचीत हो चुकी है और कई बार समझौता करीब पहुंचा है।

उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच आठ बार बातचीत हुई थी। इसमें भारत-अमेरिका साझेदारी के अलग-अलग पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई थी।

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