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ज्यादातर अमीर पेरेंट्स बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश भेजने को तैयार, लेकिन काफी कम के पास इनवेस्टमेंट प्लान

ज्यादातर संपन्न माता-पिता (तकरीबन 78%) अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश भेजना चाहते हैं या उनके बच्चे पहले से विदेशी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई रहे हैं। हालांकि, इस लक्ष्य के लिए उनकी फाइनेंशियल तैयारी संतोषजनक नहीं है। HSBC की स्टडी में यह बात सामने आई है। HSBC की रिपोर्ट के मुताबिक, वे अपने रिटायरमेंट के बदले बच्चों के इंटरनेशनल एजुकेशन को प्राथमिकता देते हैं

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 11, 2024 पर 6:49 PM
ज्यादातर अमीर पेरेंट्स बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश भेजने को तैयार, लेकिन काफी कम के पास इनवेस्टमेंट प्लान
सर्वे के मुताबिक, सिर्फ 53 पर्सेंट भारतीयों के पास अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाने के लिए एजुकेशन सेविंग प्लान था।

ज्यादातर संपन्न माता-पिता (तकरीबन 78%) अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए विदेश भेजना चाहते हैं या उनके बच्चे पहले से विदेशी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे हैं। हालांकि, इस लक्ष्य के लिए उनकी फाइनेंशियल तैयारी संतोषजनक नहीं है। HSBC की स्टडी में यह बात सामने आई है। HSBC की रिपोर्ट के मुताबिक, वे अपने रिटायरमेंट के बदले बच्चों के इंटरनेशनल एजुकेशन को प्राथमिकता देते हैं।

साल 2025 तक तकरीबन 20 लाख भारतीय स्टूडेंट्स के विदेश मुल्कों में स्टडी करने की संभावना है। 'क्वॉलिटी ऑफ लाइफ' नामक इस स्टडी में कहा गया है, 'कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और फंडिंग पेरेंट्स की मुख्य चिंता है। अमेरिका, यूरोप आदि मुल्कों में तीन या चार साल के डिग्री प्रोग्राम की फंडिंग कॉस्ट में भारतीय पेरेंट्स की रिटायरमेंट सेविंग्स का 64 पर्सेंट हिस्सा खर्च हो जाता है।' यह सर्वे 1,456 भारतीय पेरेंट्स पर किया गया।

सर्वे के मुताबिक, सिर्फ 53 पर्सेंट भारतीयों के पास अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाने के लिए एजुकेशन सेविंग प्लान था। सर्वे में शामिल 40% पेरेंट्स का कहना था कि उनके बच्चे स्टूडेंट लोन लेंगे, जबकि 51 पर्सेंट को उम्मीद थी कि वे स्कॉलरशिप हासिल करेंगे। स्टडी में कहा गया है, ' फंडिंग हासिल करने के अलावा, पेरेंट्स की चिंता इस बात को लेकर भी थी कि वे कौन सा कोर्स, यूनिवर्सिटी आदि चुनेंगे और यह कितना सही होगा।'

लिविंग कॉस्ट में बढ़ोतरी सबसे बड़ी चिंता

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