HNIs : अमीर इन फंड्स पर लगा रहे हैं बड़े दांव, जान लीजिए निवेश बढ़ाने की वजह

हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स और अल्ट्रा एचएनआई  ने अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड्स  (AIFs) में अपना अलोकेशन खासा बढ़ा दिया है

अपडेटेड Sep 05, 2022 पर 4:48 PM
AIFs पूल्ड प्राइवेट फंड्स में निवेश करते हैं। उनकी निवेश सीमा ज्यादा होती है और सामान्य रूप से उन्हें नियमित म्यूचुअल फंड्स की तुलना में ज्यादा जोखिम भरा माना जाता है, क्योंकि वे अनलिस्टेड सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं और ज्यादातर उधार ली गई रकम को इस्तेमाल कर सकते हैं

हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और अल्ट्रा एचएनआई  (UHNIs) ने अल्टरनेटिव इनवेस्टमेंट फंड्स  (AIFs) में अपना अलोकेशन खासा बढ़ा दिया है। सेबी से मिले डाटा से यह जानकारी सामने आई है।

जून, 2022 में यह 42.5 फीसदी बढ़कर 6.94 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया, जो जून 2021 में 4.87 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर था। इसका ज्यादातर हिस्सा AIF Category-II funds में गया और यह जून 2022 में 43.7 फीसदी बढ़कर 5.6 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो जून 2021 में 3.9 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर था।

कितनी कैटेगरी के होते हैं एआईएफ


AIFs तीन तरह के होते हैं- Category I, Category II and Category III और वे पूल्ड प्राइवेट फंड्स में निवेश करते हैं। उनकी निवेश सीमा ज्यादा होती है और सामान्य रूप से उन्हें नियमित म्यूचुअल फंड्स की तुलना में ज्यादा जोखिम भरा माना जाता है, क्योंकि वे अनलिस्टेड सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं और ज्यादातर उधार ली गई रकम को इस्तेमाल कर सकते हैं। AIF Category II फंड्स को अपने ऑपरेशनल खर्च के अलावा उधार ली गई रकम को इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती है।

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AIF Category-I funds ऐसे सेक्टर के स्टार्टअप्स सहित शुरुआती स्तर के बिजनेसेज में निवेश करते हैं, जिन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर समझा जाता है। इसलिए, इसका समग्र इकोनॉमी पर ज्यादा निगेटिव असर पड़ सकता है। इस फंड में निवेश को प्रोत्साहन के लिए इंसेंटिव की पेशकश की जा सकती है।

युवाओं का दखल बढ़ने का दिख रहा असर

TrustPlutus Wealth (India) के मैनेजिंग पार्टनर- प्रोडक्ट्स और सीओओ विशाल चांदीरमानी ने कहा कि इसके पीछे कई फैक्टर्स काम करते हैं। उन्होंने मनीकंट्रोल को बताया, “कई एचएनआई फैमिलीज के युवा अब निवेश के कुछ फैसलों में शामिल हो रहे हैं और उनमें निवेश के मौकों को लेकर जागरूकता बढ़ी है। मीडिया में स्टोरीज उन्हें प्रोत्साहित कर रही हैं, जो स्टार्टअप्स में काम करने वाले कर्मचारियों के करोड़ों कमाने से जुड़ी होती हैं।”

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ब्याज दरों की भी रही भूमिका

ब्याज दरें कम होने का भी असर दिखा है। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ महीनों को छोड़ दें तो बीते दो साल से कोविड महामारी के बाद ब्याज दरें रिकॉर्ड लो पर पहुंच गई थीं। इसलिए, एचएनआई फैमिलीज ऐसे इनवेस्टमेंट्स पर विचार कर रही हैं। डेट म्यूचुअल फंड्स 5-6 फीसदी के पोस्ट टैक्स रिटर्न की पेशकश करते हैं, इसलिए ये खास आकर्षक नहीं है।”

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