इंडियन कंपनियों के शेयरों में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के इन्वेस्टमेंट की वैल्यू 9.53 लाख करोड़ रुपये है। हालांकि, उसने शेयरों में अपने कुल फंड का सिर्फ 3.67 फीसदी इन्वेस्ट किया है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में लिस्टेड 278 कंपनियों में एलआईसी का निवेश एक फीसदी से ज्यादा है। अंग्रेजी बिजनेस न्यूज वेबसाइट इकोनॉमिक टाइम्स ने यह खबर दी है।
इंडियन कंपनियों के शेयरों में इंश्योरेंस कंपनियों के कुल इन्वेस्टमेंट में एलआईसी की हिस्सेदारी 77 फीसदी है। फीसदी के लिहाज से आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) में एलआईसी की सबसे ज्यादा 49.24 फीसदी हिस्सेदारी है। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस (LIC Housing Finance) में उसकी 45.24 फीसदी हिस्सेदारी है। एलआईसी ने आईडीबीआई में सरकार की बड़ी हिस्सेदारी खरीदी थी। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस होम लोन देने वाली कंपनी है।
आईटीसी (ITC) में एलआईसी की हिस्सेदारी 16.21 फीसदी, हिंदुस्तान कॉपर में 14.22 फीसदी, एनएमडीसी में 14.16 फीसदी, एमटीएनएल में 13.12 फीसदी, एलएंडटी में 12 फीसदी और ऑयल इंडिया में 11.85 फीसदी हिस्सेदारी है। वैल्यू के लिहाज से एलआईसी के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के 95,274 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर थे। इंफोसिस और टीसीएस में एलआईसी की हिस्सेदारी की वैल्यू 95,488 करोड़ रुपये थी। ये आंकड़े 31 दिसंबर, 2021 के हैं।
एलआईसी ने दिसंबर तिमाही में पावर ग्रिड, ड्रेजिंग कॉर्पोरेशन, कंप्यूटर सर्विसेज, कोफोर्ज, दीपक नाइट्राइट और जेएसडब्लूय स्टील में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। इस दौरान उसने आईआरबी इंफ्रा, एबीबी इंडिया, हिंदुस्तान मोटर्स, स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज, एचएएल और बॉम्बे डाइंग में अपनी हिस्सेदारी घटाई।
एलआईसी आईपीओ पेश करने जा रही है। वह आईपीओ से 70,000 से एक लाख करोड़ रुपये तक जुटा सकती है। कंपनी का आईपीओ अगले महीने आने की उम्मीद है। यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। लिस्टिंग के बाद एलआईसी का बाजार पूंजीकरण 13 से 15 लाख करोड़ रुपये के बीच होगा। इस तरह वह देश की सबसे बड़ी कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो जाएगी। अभी रिलायंस इंडस्ट्रीज और टीसीएस देश की सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनियां हैं।
अभी एलआईसी का मालिकाना हक सरकार के पास है। यह देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी है। सरकार इस कंपनी में हिस्सेदारी बेचकर करीब 70,000 से एक लाख करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। इससे सरकार को चालू वित्त वर्ष के डिसइन्वेस्टमेंट टार्गेट को हासिल करने में मदद मिलेगी। आईपीओ के बाद भी एलआईसी पर सरकार का मालिकाना हक बना रहेगा। कानून के मुताबिक, एलआईसी में सरकार की हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम नहीं हो सकती। इसके अलावा 5 साल के दौरान सरकार एलआईसी में अपनी 25 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी नहीं बेच सकती।