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NSE Colocation Scam: विदेशी शेयरहोल्डर्स ने चित्रा रामकृष्णन पर सेबी के आदेश से पहले NSE के शेयर बेच दिए थे

पिछले एक-डेढ़ साल में एनएसई के शेयर का भाव दोगुना हो गया है। जून 2020 में इस शेयर का भाव करीब 1,000 रुपये था। इसकी वजह यह है कि इनवेस्टर्स को स्टॉक एक्सचेंजों पर एनएसई की लिस्टिंग की उम्मीद है

MoneyControl Newsअपडेटेड Feb 23, 2022 पर 12:26 PM
NSE Colocation Scam: विदेशी शेयरहोल्डर्स ने चित्रा रामकृष्णन पर सेबी के आदेश से पहले NSE के शेयर बेच दिए थे
एक दशक से एनएसई में इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स की हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम हो रही है। उधर, इंडिविजुअल इनवेस्टर्स की हिस्सेदारी बढ़ती रही है।

जनवरी में NSE की पूर्व एमडी और सीईओ चित्रा रामकृष्णन (Chitra Ramkrishna) पर सेबी (SEBI) के आदेश से ठीक पहले एनएसई के शेयरों में गतिविधि काफी बढ़ गई थी। एनएसई की वेबसाइट पर शेयर ट्रांसफर के डेटा से इसका पता चलता है। सेबी ने पिछले महीने सीक्रेट इंफॉर्मेशन हिमालय के एक गुमनान योगी को लीक करने के आरोप में चित्रा पर जुर्माना लगाया है।

एनएसई की वेबसाइट के डेटा के मुताबिक, एनएसई के शेयर में 209 ट्रांजेक्शन हुए. इनमें से एक-तिहाई विदेशी शेयरहोल्डर्स से जुड़े हैं। ऐसा लगता है कि इन विदेशी शेयरहोल्डर्स ने एनएसई के शेयर्स डोमेस्टिक शेयरहोल्डर्स को बेचे थे। विदेशी निवेशकों ने कुल 11.61 लाख शेयर्स 1,650 और 2,800 रुपये की कीमतों के बीच बेचे। इनमें से ज्यादातर सौदे 2,000 रुपये से कम भाव पर हुए। इस बात की जानकारी नहीं मिल सकी है कि ये शेयर सिर्फ एक फॉरेन इनवेस्टर ने बेचे या कई ने।

11.61 लाख शेयर्स एनएसई के कुल इक्विटी बेस का सिर्फ 0.2 फीसदी है। एनएसई स्टॉक मार्केट में लिस्टेड नहीं है, जिससे इसके शेयरों में एक्टिव ट्रेडिंग नहीं होती है। जनवरी में एनएसई के शेयर का उच्चतम भाव 3,650 रुपये था। इस भाव पर दो डोमेस्टिक इनवेस्टर्स के बीच डील हुई थी। लेकिन, इस डील में शेयरों की संख्या बहुत कम थी। जनवरी में फॉरेन इनवेस्टर्स की तरफ से एनएसई के शेयरों की डिस्ट्रेस सेलिंग के संकेत मिलते हैं। इसकी वजह यह है कि ऐसे करीब 50 फीसदी ट्रांजेक्शन दिसंबर में 2,000 रुपये प्रति शेयर के भाव से ऊपर हुए थे। दिसंबर में कई फॉरेन इनवेस्टर्स और नॉन-रेजिडेंट इंडियंस ने एनएसई में अपनी हिस्सेदारी घटाई।

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